Eksandeshlive Desk
मनामा/कुवैत सिटी/तेहरान : ईरान ने ताजा अमेरिकी हमलों के जवाब में उसके सहयोगी देशों कुवैत और बहरीन के नागरिक और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। तेजी से बदल रहे ताजा घटनाक्रम से होर्मुज जलडमरूमध्य में शांति की उम्मीदें धराशायी हो गई हैं। ईरान और अमेरिका ने एक-दूसरे पर युद्धविराम संधि के उल्लंघन का आरोप लगाया है। दोनों देशों की आक्रामकता से पश्चिम एशिया में युद्ध खत्म करने के लिए चल रही बातचीत पर असर पड़ा है। अरब न्यूज और सऊदी प्रेस एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, बहरीन के गृह मंत्रालय ने बताया कि रविवार को ईरान के हमले में मुहर्रक गवर्नरेट में एक रिहायशी इमारत को नुकसान पहुंचा लेकिन किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। गृह मंत्रालय ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर कहा, “संबंधित अधिकारी घटनास्थल पर जरूरी कदम उठा रहे हैं।” बहरीन डिफेंस फोर्स की जनरल कमांड ने बयान में कहा कि उसने नागरिकों को निशाना बनाने वाली कई ईरानी मिसाइलों और ड्रोनों को रोका। कमांड ने जोर देकर कहा, “नागरिकों और निजी संपत्ति को निशाना बनाने के लिए मिसाइलों और ड्रोन का जानबूझकर इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का खुला उल्लंघन है।” इस बीच, कुवैत के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि सशस्त्र बलों ने रविवार तड़के ईरान की दो बैलिस्टिक मिसाइलों को रोक कर नष्ट किया। इन मिसाइलों को रोकने के दौरान कोई नुकसान या किसी के घायल होने की खबर नहीं है।
कुवैत व बहरीन ने अपने इलाकों को निशाना बनाकर किए गए हमलों की निंदा की
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने रविवार को कहा कि उसने ईरानी क्षेत्र पर अमेरिकी हमलों के जवाब में कुवैत और बहरीन के खिलाफ हमले किए। आईआरजीसी ने बयान में कहा “कुवैत में अली अल-सलेम बेस और बहरीन में पोर्ट सलमान स्थित फिफ्थ फ्लीट नेवल बेस पर अमेरिका के आठ अहम सैन्य ठिकानों को नष्ट कर दिया गया है। दुश्मन की किसी भी आक्रामकता का करारा जवाब दिया जाएगा।” आईआरजीसी ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले यातायात को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाए गए हैं। नियमों का उल्लंघन करने वाले जहाजों से पहले की तुलना में सख्ती से निपटा जाएगा। कुवैत और बहरीन ने अपने इलाकों को निशाना बनाकर किए गए ईरान के हमलों की कड़ी निंदा की है। उन्होंने इन घटनाओं को अपनी संप्रभुता का गंभीर उल्लंघन और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया है। कुवैत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह हमले अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के नियमों का स्पष्ट उल्लंघन हैं। बहरीन ने भी हमलों की निंदा करते हुए कहा कि ईरान ने एक बार फिर बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से किंगडम को निशाना बनाया है। यह तनाव बढ़ाने वाला कदम है। यह किंगडम की संप्रभुता और उसके नागरिकों की सुरक्षा के खिलाफ सीधा प्रहार है। दोनों देशों ने खाड़ी क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करने और नए सिरे से राजनयिक प्रयास करने का आह्वान किया। मुस्लिम वर्ल्ड लीग ने ड्रोन से बहरीन को निशाना बनाने वाली ईरानी आक्रामकता की कड़ी निंदा की। लीग के महासचिव और मुस्लिम विद्वानों की परिषद के अध्यक्ष शेख मोहम्मद बिन अब्दुल करीम अल-इस्सा ने बहरीन पर हुए ईरानी हमलों की निंदा की। उन्होंने कहा कि इन हमलों ने सभी धार्मिक मूल्यों, अंतरराष्ट्रीय और मानवीय कानूनों और मानदंडों का उल्लंघन किया है। ईरान ने सुरक्षा व स्थिरता बहाल करने के प्रयासों को कमजोर किया है।
बाहरी दखल से होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने में होगी देरी : अराघची
बगदाद/तेहरान : ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रविवार को चेतावनी दी कि समुद्री व्यवस्थाओं में किसी भी बाहरी दखल से स्थिति जटिल होती जाएगी और होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की प्रक्रिया में देरी होगी। ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तसनीम न्यूज़ के अनुसार, बगदाद में इराकी विदेश मंत्री फुआद हुसैन के साथ संयुक्त प्रेसवार्ता में अराघची ने जोर दिया कि ईरान के समुद्री प्रबंधन के फैसलों पर बाहरी दबाव या दखल नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि “नई व्यवस्था थोपने की किसी भी कोशिश से केवल जटिलताएं पैदा होंगी और होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने में देरी होगी।” ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि उनकी इराक यात्रा खास और संवेदनशील संदर्भ में हो रही है। उन्होंने इसे ईरान के खिलाफ अमेरिका-इज़राइल के आक्रामक युद्ध के बाद पहली यात्रा बताया। उन्होंने हमलों की निंदा करने और इराकी सरकार व जनता द्वारा दिखाए गए मजबूत समर्थन के लिए इराक का आभार व्यक्त किया। अराघची ने कहा कि उनकी यात्रा के तीन मुख्य उद्देश्य थे: समर्थन के लिए इराक को धन्यवाद देना, नई इराकी सरकार को बधाई देना और पवित्र शहरों नजफ, कर्बला, समारा और काज़िमिया में इस्लामिक क्रांति के दिवंगत नेता अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई के अंतिम संस्कार समारोहों से जुड़ी व्यवस्थाओं का समन्वय करना। उन्होंने बताया कि कई इराकी समूहों ने इसमें भाग लेने की इच्छा जताई है। उन्होंने कहा कि बातचीत में राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा क्षेत्रों पर भी चर्चा हुई। उन्होंने जोर दिया कि ईरान-इराक के बीच कीमती रणनीतिक संबंध हैं और वे नई इराकी सरकार के तहत सहयोग बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
इराक ने किसी भी देश के खिलाफ़ युद्ध और आक्रामकता के विरोध पर ज़ोर दिया
अराघची ने आगे कहा कि उन्होंने अपने इराकी समकक्ष को हाल की क्षेत्रीय घटनाओं के बारे में जानकारी दी, जिसमें होर्मुज़ जलडमरूमध्य और लेबनान से संबंधित तनाव के साथ-साथ चल रही राजनयिक बातचीत भी शामिल है। समुद्री व्यवस्थाओं का जिक्र करते हुए, उन्होंने दोहराया कि आपसी समझ के तहत होर्मुज़ जलडमरूमध्य 30 दिनों के भीतर ईरान के प्रबंधन में संकट-पूर्व की स्थिति में लौट आएगा और इस संबंध में किसी देश या संस्था की कोई जिम्मेदारी नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि इन व्यवस्थाओं में दखल देने की किसी भी कोशिश से अस्थिरता और बढ़ेगी। अराघची ने यह भी कहा कि क्षेत्रीय सुरक्षा बाहरी ताकतों को छोड़कर एक नए ढांचे पर आधारित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ईरान, फारस की खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के देशों के साथ-साथ ईरान और इराक को शामिल करते हुए क्षेत्रीय बातचीत तंत्र के लिए इराक के प्रस्ताव का स्वागत करता है। इराक के विदेश मंत्री फ़ुआद हुसैन ने ईरान-इराक संबंधों को ऐतिहासिक, भौगोलिक, धार्मिक और रणनीतिक बताते हुए किसी भी देश के खिलाफ़ युद्ध और आक्रामकता के विरोध पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि इराक ने पहले तेहरान और वाशिंगटन के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी, लेकिन हाल की घटनाओं के कारण तनाव बढ़ गया है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से इराक के तेल निर्यात पर गंभीर असर पड़ेगा। हुसैन ने क्षेत्रीय संघर्षों को खत्म करने के लिए इराक के समर्थन को दोहराया और एक व्यापक क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे का प्रस्ताव रखा। उन्होंने फारस की खाड़ी के देशों, ईरान और इराक को शामिल करते हुए एक क्षेत्रीय शिखर सम्मेलन का सुझाव दिया और ऐसी बैठक की मेजबानी करने के लिए बगदाद की तत्परता की पुष्टि की।
