Eksandeshlive Desk
पलामू: पलामू जिले के पड़वा प्रखंड के सिक्का गांव में एक ही परिवार के 6 सदस्यों की मौत मामले में स्वास्थ्य विभाग के दावे पर सवाल उठाया गया है। परिवार में जीवित बचे अनुज मेहता और सुनील मेहता ने आर्गेमोन के तेल इस्तेमाल से इनकार किया है। बताते चलें कि जून और जुलाई के महीने में अनुज मेहता के परिवार के 6 सदस्यों की मौत हो गई थी। उस समय पलामू स्वास्थ्य विभाग ने मौत का कारण ड्रॉप्सी नामक बीमारी बताया था। ड्रॉप्सी आर्गेमोन के तेल के सेवन के बाद होती है। जिले के सिविल सर्जन डॉ अनिल श्रीवास्तव ने दावे के साथ कहा था कि आर्गेमोन के तेल का इस्तेमाल परिवार कर रहा था जिसके कारण यह घटना घटी। इधर रांची रिम्स से इलाज कर लौटे सुनील मेहता ने रविवार काे साफ तौर पर कहा कि उसका परिवार आर्गेमोन का तेल खाने में इस्तेमाल नहीं कर रहा था। वह तेल केवल मवेशियों के लिए रखा था। इस तेल को जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग ले गया था। सुनील ने यह भी कहा कि प्रशासन की ओर से अब तक किसी तरह की कोई मदद नहीं मिली है।
उल्लेखनीय है कि अनुज और सुनील के पिता कुलदीप मेहता की 19 जून को सबसे पहले मौत हुई थी। इसके बाद 20 जून को उनकी बेटी बबीता कुमारी, 26 जून को दूसरी बेटी इंदु कुमारी, 28 जून को बहू श्वेता कुमारी, 29 जून को बेटा नकुल मेहता की एक के बाद एक मौत हो गई, जबकि कुलदीप मेहता की पत्नी लाखो देवी की 07-08 जुलाई को मौत हुई। कुलदीप मेहता के परिवार में अब सिर्फ उनके दो बेटे अनुज मेहता, सुनील मेहता और अनुज मेहता का चार वर्षीय बेटा जीवित है। सुनील मेहता भी बीमार था और लंबे वक्त के बाद रिम्स से इलाज कर वापस घर लौटा है। सभी मृतकों के शव का पोस्टमार्टम करवा दिया गया है, लेकिन अभी तक विसरा रिपोर्ट नहीं आई है। पलामू पुलिस ने विसरा की रिपोर्ट के लिए एफएसएल के साथ पत्राचार भी किया है। पांच मौत के बाद प्रशासनिक स्तर पर कुलदीप मेहता के घर से 29 जून को सैंपल लिया गया था और 2 जुलाई को रिपोर्ट आई थी। गांव के पूर्व मुखिया दिलीप मेहता का कहना है कि शुरू में ही जांच होती तो शायद अन्य सदस्यों की जान को बचाई जा सकती थी, लेकिन लापरवाही बरती गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी काफी देर से लिखी गई है। ग्रामीणों को यह जानकारी नहीं मिल पा रही है कि आखिर मौत का कारण क्या है। परिवार को कोई सहायता भी नहीं मिली है। गांव में इस तरह की पहले कभी घटना नहीं हुई है। ग्रामीणों को पता है कि कटैला के तेल (आर्गेमोन) का इस्तेमाल मवेशी के इलाज में होता है।
