दो ड्रॉ के बाद चार अंकों के साथ पांचवें स्थान पर मेजबान, दिल्ली के खिलाफ बल्लेबाजी में निरंतरता और गेंदबाजी में धार की चुनौती
Ranjeet Kumar
रांची: घरेलू मैदान, सामने दिल्ली और जरूरत जीत की। रणजी ट्रॉफी में लगातार दो ड्रॉ के बाद झारखंड सोमवार से जेएससीए इंटरनेशनल स्टेडियम में उतरेगा तो उसके सामने अंकतालिका में अपनी स्थिति सुधारने के साथ प्रदर्शन की कमजोर कड़ियां दुरुस्त करने की चुनौती होगी। प्रमुख बल्लेबाजों की गैरमौजूदगी में कप्तान विराट सिंह और अनुभवी खिलाड़ियों को आगे बढ़कर जिम्मेदारी उठानी होगी। एलीट ग्रुप सी में झारखंड दो मैचों से चार अंक लेकर पांचवें स्थान पर है। बंगाल 12, महाराष्ट्र नौ तथा केरल और गुजरात आठ-आठ अंकों के साथ उससे आगे हैं। दिल्ली तीन अंकों के साथ छठे स्थान पर है। केरल के खिलाफ पहली पारी की बढ़त से तीन अंक हासिल करने वाले झारखंड को महाराष्ट्र के खिलाफ ड्रॉ से सिर्फ एक अंक मिला। अगले दौर की संभावनाएं बरकरार हैं, लेकिन शीर्ष दो की दौड़ में पकड़ बनाने के लिए अब जीत जरूरी होती जा रही है। दिल्ली के खिलाफ छह अंक उसे दस अंकों तक पहुंचाकर दावेदारी मजबूत कर सकते हैं।
अधूरी पारियां और विकेट का इंतजार बढ़ा रहे चिंता: उत्कर्ष सिंह का अर्धशतक को शतक में नहीं बदल पाना झारखंड को बड़े स्कोर तक पहुंचने से रोक रहा है। उनसे क्रीज पर जमने के बाद पारी को निर्णायक आकार देने की अपेक्षा होगी। वहीं, रॉबिन मिंज का बल्ला अब तक खामोश रहा है। प्रमुख बल्लेबाजों की अनुपस्थिति में उनका लगातार नाकाम रहना मध्यक्रम की चिंता बढ़ाता है। दिल्ली के खिलाफ उन्हें अपनी आक्रामक क्षमता को टिकाऊ पारी में बदलना होगा। गेंदबाजी में अनुकूल रॉय का विकेट नहीं निकाल पाना भी टीम के लिए परेशानी है। घोषित दल में शामिल इस अनुभवी ऑलराउंडर से रन रोकने के साथ साझेदारियां तोड़ने की जरूरत होगी। बल्लेबाजी में भी उनका योगदान निचले क्रम को मजबूती दे सकता है। कुनैन कुरैशी की प्रतिभा का भी टीम अब तक पूरा उपयोग नहीं कर सकी है। कप्तान और टीम प्रबंधन को उनकी भूमिका स्पष्ट कर सही समय पर आक्रमण में लगाना होगा। गेंदबाजी विकल्पों का प्रभावी इस्तेमाल किए बिना दिल्ली को दबाव में रखना आसान नहीं होगा। झारखंड के लिए जीत का रास्ता साफ है—बल्लेबाज शुरुआत को बड़ी पारियों में बदलें, गेंदबाज मौके बनाएं और क्षेत्ररक्षक उन्हें हाथ से न जाने दें। दो ड्रॉ के बाद अब घरेलू मैदान पर टीम को अपनी क्षमता का प्रमाण परिणाम से देना होगा।
विराट को संभालना होगा मोर्चा: शिखर मोहन के साथ कुमार कुशाग्र और ईशान किशन भी झारखंड के लिए उपलब्ध नहीं हैं। इनकी गैरमौजूदगी ने बल्लेबाजी की चुनौती बढ़ा दी है। ऐसे में विराट सिंह से महज उपयोगी योगदान नहीं, बड़ी कप्तानी पारी की उम्मीद होगी। उन्हें एक छोर संभालकर साझेदारियां बनानी होंगी, ताकि बल्लेबाजी शुरुआती झटकों के बाद बिखरे नहीं। लंबे अंतराल के बाद लौटे कुमार देवब्रत के लिए भी अनुभव को रन में बदलने का समय है। उनके सामने मिले मौके को भुनाने और टीम को स्थिरता देने की दोहरी जिम्मेदारी होगी।
