जलडेगा में करम पर्व की धूम, चीक टोली में उमड़ा जनसैलाब

Ek Sandesh Live Religious

मांदर की थाप और करम गीतों से देर रात तक गूंजता रहा अखड़ा, प्रकृति और संस्कृति के रंग में रंगा पूरा क्षेत्र

AMIT RANJAN

जलडेगा: प्रखंड क्षेत्र के जलडेगा, ओड़गा, परबा, कोंमेरला, कारीमट्टी सहित चीक टोली में प्रकृति, कृषि और भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक करम पर्व पूरे हर्षोल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। महापर्व को लेकर ग्रामीण इलाकों में उत्साह का माहौल रहा। चीक टोली सहित आसपास के गांवों के अखड़े आकर्षक ढंग से सजाए गए, जहां करम पर्व की पारंपरिक छटा देखते ही बनी।

करम पर्व को लेकर कुंवारी युवतियों द्वारा विधि-विधान से जावा जगाया गया। इसके साथ ही मांदर की गूंज और मधुर करम गीतों से पूरा वातावरण भक्तिमय और संगीतमय हो उठा। युवतियों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार जावा की पूजा कर क्षेत्र में सुख-समृद्धि और अच्छी फसल की कामना की।

प्रकृति और संस्कृति के संरक्षण का संदेश

करम पर्व झारखंड की प्रकृति और कृषि संस्कृति से गहराई से जुड़ा पर्व है। इस अवसर पर प्रकृति की पूजा के साथ अच्छी फसल, परिवार की खुशहाली और समाज की समृद्धि की कामना की जाती है। वहीं बहनें अपने भाइयों की दीर्घायु, सुख-शांति और मंगलमय जीवन की कामना को लेकर उपवास रखती हैं और करम राजा की पूजा-अर्चना करती हैं। करम पर्व के दौरान युवतियों द्वारा टोकरियों में बालू भरकर विभिन्न अनाजों के बीज से तैयार किए गए जावा की विशेष पूजा की गई। जावा के अंकुरित होने को हरियाली, समृद्धि और बेहतर फसल का प्रतीक माना जाता है।

अखड़ा में देर रात तक गूंजती रही मांदर की थाप

शाम ढलते ही पाहन-पुरोहितों की मौजूदगी में विधि-विधान के साथ अखड़ा में करम डाली स्थापित की गई। पूजा-अर्चना और करम कथा के बाद पारंपरिक सांस्कृतिक कार्यक्रम शुरू हुआ। मांदर, ढोल-नगाड़ों की थाप और करम गीतों पर ग्रामीण महिला-पुरुष देर रात तक नृत्य करते रहे। पारंपरिक वेशभूषा में युवतियों और ग्रामीणों की सामूहिक प्रस्तुति ने समारोह में चार चांद लगा दिया।

चीक टोली में आयोजित करम पूजा समारोह में करमा समिति के सदस्यों सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग और ग्रामीण शामिल हुए। मौके पर विनोद बड़ाईक, अशोक बड़ाईक, चंदन मिश्रा, बीरेन बड़ाईक, विशाल बड़ाईक, सुनील महतो, निरल हेमरोम, सुरजा बड़ाईक, कलिन्द्र बड़ाईक, पहलाद बड़ाईक, संतु बड़ाईक, नेलशन तोपनो, अर्जुन बड़ाईक, दीपक चीक बड़ाईक, मन्तू बड़ाईक, शम्भू बड़ाईक, प्रदीप सिंह, अनिल बड़ाईक, मंगरा बड़ाईक, डेविड तोपनो, हीरो तोपनो, प्रभा देवी, सुलेखा देवी, सुगंति देवी, नीलम देवी, दूरपति, अनुष्का, जयंती देवी, लच्छू बड़ाईक, कन्हाई बड़ाईक, अनामिका कुमारी, आंचल कुमारी, पूजा कुमारी, सती कुमारी, नमिता कुमारी एवं मंजू कुमारी समेत बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण महिला-पुरुष उपस्थित रहे।

करम पर्व के दौरान ग्रामीणों ने पारंपरिक गीत, नृत्य और पूजा-पद्धति के माध्यम से अपनी समृद्ध लोकसंस्कृति की झलक प्रस्तुत की। पूरे आयोजन ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि करम केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति, कृषि, रिश्तों और झारखंड की सांस्कृतिक पहचान को जोड़ने वाली जीवंत परंपरा है।

Spread the love