खूंटी में 2.19 करोड़ का बस पड़ाव बना शोपीस! उद्घाटन के बाद भी पुराने ठिकानों से चल रहीं बसें, जाम से बेहाल शहरवासी

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Eksandeshlive Desk

खूंटी : खूंटी शहर की यातायात व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने के उद्देश्य से लगभग 2.19 करोड़ रुपये की लागत से नामकोम में निर्मित आधुनिक बस पड़ाव का उद्घाटन 25 जून को बड़े उत्साह के साथ किया गया था। उद्घाटन के दौरान जिला प्रशासन और नगर पंचायत ने घोषणा की थी कि खूंटी होकर गुजरने वाली सभी यात्री बसों का संचालन अब इसी नए बस पड़ाव से होगा। साथ ही शहर के मुख्य मार्गों पर बसें खड़ी कर यात्रियों को चढ़ाने-उतारने वाले बस संचालकों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी। हालांकि उद्घाटन के कई दिन बाद भी हालात नहीं बदले हैं। अधिकांश यात्री बसें आज भी पुराने स्थानों से ही संचालित हो रही हैं, जबकि नया बस पड़ाव लगभग खाली पड़ा है। इससे करोड़ों रुपये की इस सार्वजनिक परियोजना की उपयोगिता पर सवाल उठने लगे हैं। वहीं शहर की यातायात व्यवस्था भी पहले की तरह अव्यवस्थित बनी हुई है।

वर्तमान में रांची, सिमडेगा, चाईबासा, तोरपा, मुरहू, तमाड़ और अन्य क्षेत्रों के लिए चलने वाली अधिकांश बसें अब भी खूंटी थाना, मेन रोड, नीचे चौक तथा शहर के अन्य प्रमुख स्थानों पर रुककर यात्रियों को चढ़ा-उतार रही हैं। इसके कारण नए बस पड़ाव पर दिनभर सन्नाटा पसरा रहता है, जबकि शहर के मुख्य मार्गों पर जाम की समस्या लगातार बनी हुई है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि बसों का संचालन पहले की तरह शहर के बीचों-बीच ही होता रहा, तो नए बस पड़ाव के निर्माण का उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए इस बस पड़ाव का लाभ तभी मिलेगा, जब सभी बसों का संचालन अनिवार्य रूप से यहीं से कराया जाए। खूंटी का मुख्य बाजार और मेन रोड पहले से ही संकरी सड़कों और लगातार बढ़ते वाहनों के दबाव से जूझ रहे हैं। ऐसे में सड़क किनारे बसों के रुकने से अक्सर लंबा जाम लग जाता है। इसका असर छोटे वाहन चालकों, दोपहिया सवारों, पैदल यात्रियों और व्यापारियों पर पड़ रहा है। व्यापारियों का कहना है कि जाम के कारण ग्राहकों का बाजार तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है, जबकि कई बार एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन वाहनों को भी रास्ता बनाने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है। लोगों का आरोप है कि उद्घाटन के समय प्रशासन ने जिस सख्ती की बात कही थी, वह अब तक धरातल पर दिखाई नहीं दे रही है। उनका कहना है कि यदि बसों का संचालन पुराने स्थानों से ही जारी रखना था, तो फिर करोड़ों रुपये खर्च कर नया बस पड़ाव बनाने का औचित्य क्या था। उनके अनुसार, किसी भी सार्वजनिक परियोजना की सफलता केवल उसके निर्माण में नहीं, बल्कि उसके प्रभावी संचालन और उपयोग में निहित होती है।

गौरतलब है कि खूंटी में यह पहली बार नहीं है जब बस स्टैंड के उपयोग को लेकर ऐसी स्थिति बनी हो। करीब 10 से 15 वर्ष पहले तमाड़ रोड पर भी एक बस स्टैंड का निर्माण कराया गया था। उस समय भी सभी बसों के संचालन का दावा किया गया था, लेकिन कुछ समय बाद बसें फिर पुराने स्थानों से चलने लगीं और वह बस स्टैंड धीरे-धीरे अनुपयोगी हो गया। आज भी वह उपेक्षा का शिकार है। ऐसे में लोगों को आशंका है कि यदि इस बार भी प्रशासन प्रभावी कदम नहीं उठाता, तो नामकोम का नया बस पड़ाव भी उसी स्थिति में पहुंच सकता है। स्थानीय नागरिकों का यह भी कहना है कि नया बस पड़ाव शहर के मुख्य बाजार से कुछ दूरी पर स्थित है। ऐसे में यात्रियों को बस पकड़ने या उतरने के बाद शहर तक पहुंचने के लिए ऑटो या अन्य छोटे वाहनों का सहारा लेना पड़ेगा, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ेगा। हालांकि प्रशासन का मानना है कि इससे स्थानीय ऑटो चालकों को रोजगार के अवसर मिलेंगे और शहर के भीतर यातायात का बेहतर प्रबंधन संभव होगा। लोगों का सुझाव है कि नए बस पड़ाव को पूरी तरह प्रभावी बनाने से पहले वहां तक सस्ती, नियमित और सुगम सार्वजनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

जिला परिवहन पदाधिकारी सृष्टि दिप्रिया मिंज ने कहा कि खूंटी शहर की आबादी लगातार बढ़ रही है और भविष्य की आवश्यकताओं को देखते हुए यातायात व्यवस्था में सुधार अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि शहर को व्यवस्थित बनाने के लिए बस संचालकों और आम लोगों, दोनों को अपनी पुरानी कार्यप्रणाली में बदलाव लाना होगा। उन्होंने स्वीकार किया कि प्रशासन को भी इस दिशा में और अधिक सख्ती बरतने की जरूरत है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सभी बसों का परिचालन केवल निर्धारित बस पड़ाव से ही सुनिश्चित कराया जाएगा तथा सड़क किनारे बसें खड़ी कर यातायात बाधित करने वाले संचालकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल शहरवासियों की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। लोगों का कहना है कि यदि नए बस पड़ाव का नियमित और अनिवार्य उपयोग सुनिश्चित नहीं किया गया, तो करोड़ों रुपये की यह महत्वाकांक्षी परियोजना भी पिछली योजनाओं की तरह केवल एक सरकारी ढांचा बनकर रह जाएगी। उनका मानना है कि बस पड़ाव का उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब प्रशासन अपने आदेशों को प्रभावी ढंग से लागू करे, सभी बसों का संचालन निर्धारित स्थल से सुनिश्चित कराए और शहर को जाम की समस्या से स्थायी राहत दिलाने की दिशा में ठोस कदम उठाए।

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