Eksandeshlive Desk
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच वैश्विक झटकों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूती दिखाई है। वैश्विक रेटिंग एजेंसी मूडीज रेटिंग्स ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर का अनुमान छह फीसदी से बढ़ाकर सात फीसदी कर दिया है। एजेंसी ने साथ ही तेल की ऊंची कीमतों और अल नीनो के असर से महंगाई बढ़ने के जोखिम को लेकर आगाह किया है। रेटिंग एजेंसी ने शुक्रवार को जारी अपने ताजा अनुमान में कहा कि वर्ष 2026 की पहली तिमाही में वार्षिक आधार पर भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 8.2 फीसदी रही, जबकि 2025 में यह 7.3 फीसदी रही थी। यह मजबूत निजी खपत, निवेश, बुनियादी ढांचे पर सरकार के लगातार खर्च, सेवा क्षेत्र की मजबूती और निजी निवेश में तेजी के कारण संभव हुआ है।
भारत तेज रफ्तार से बढ़ना जारी रखेगा: इस महीने की शुरुआत में जापान की क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ‘जेसीआर’ ने भारत की रेटिंग को बढ़ाकर ‘ए-’ कर दिया था। मजबूत आर्थिक वृद्धि और मजबूत वित्तीय प्रणाली का हवाला देते हुए 35 साल के अंतराल के बाद यह उपलब्धि हासिल हुई थी। रेटिंग एजेंसी ने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष से उत्पन्न हुए वैश्विक झटके के प्रति अर्थव्यवस्था की दिखाई गई मजबूती के कारण हमने 31 मार्च, 2027 को समाप्त होने वाला वित्त वर्ष 2026-27 में वास्तविक जीडीपी वृद्धि का अनुमान पहले के छह फीसदी से बढ़ाकर सात प्रतिशत कर दिया है। एजेंसी ने बताया कि जीडीपी वृद्धि दर के अनुमान में यह संशोधन पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण उत्पन्न अनिश्चिताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाता है। एजेंसी का यह अनुमान आरबीआई, एसएंडपी और फिच के अनुमानों से ज़्यादा है। रेटिंग एजेंसी ने आशा व्यक्त की कि भारत सभी अन्य जी-20 अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में तेज रफ्तार से बढ़ना जारी रखेगा। चालू वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून पहली तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था 7.8 फीसदी की दर से बढ़ी है, जो आरबीआई के सात फीसदी जीडीपी के वृद्धि दर के अनुमान से अधिक है।
शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 13 फीसदी बढ़कर 12.12 लाख करोड़ रुपये पर पहुंचा: देश की अर्थव्यवस्था और सरकारी खजाने के लिए राहत देने वाली खबर है। चालू वित्त वर्ष 2026-27 में सरकार का शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 17 सितंबर तक 13 फीसदी बढ़कर 12.12 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा है। अग्रिम कर संग्रह में वृद्धि से प्रत्यक्ष कर संग्रह बढ़ा है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के आंकड़ों के अनुसार 17 सितंबर तक सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह 15 फीसदी बढ़कर 14.32 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा है। वहीं, कर ‘रिफंड’ भी 29.19 फीसदी बढ़कर 2.20 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा। कॉरपोरेट कर संग्रह 19.48 फीसदी बढ़कर लगभग 5.56 लाख करोड़ रुपये हो गया। इस दौरान गैर-कॉरपोरेट कर (व्यक्तिगत और हिंदू अविभाजित परिवार) का संग्रह छह फीसदी बढ़कर 6.16 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा है। वहीं, एक अप्रैल से 17 सितंबर के बीच प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) संग्रह 53 फीसदी बढ़कर 40,214 करोड़ रुपये हो गया। आंकड़ों के अनुसार 17 सितंबर तक अग्रिम कर संग्रह 16.18 फीसदी बढ़कर करीब 5.22 लाख करोड़ रुपये हो गया। इसमें अग्रिम कॉरपोरेट कर भुगतान 18 फीसदी बढ़कर 4.16 लाख करोड़ रुपये से अधिक और गैर-कॉरपोरेट अग्रिम कर भुगतान 9.24 फीसदी बढ़कर 1.06 लाख करोड़ रुपये रहा।
