पंचायत भवन बना रणक्षेत्र: जमीन विवाद में खूनी संघर्ष

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MUSTFA

मेसरा: मेसरा पश्चिमी पंचायत भवन में रविवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब भूदान की जमीन के बंटवारे को लेकर बुलाई गई एक शांतिपूर्ण पंचायत ‘जंग के मैदान’ में तब्दील हो गई। इस हिंसक झड़प में लात-घूंसे चले और दोनों पक्षों के बीच जमकर मारपीट हुई। मामले की गंभीरता को देखते हुए मेसरा ओपी पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायतों के आधार पर क्रॉस एफ़आईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। ​पीड़ित राजेंद्र कुमार सिंह (उर्फ बचानू सिंह) ने पुलिस को दिए आवेदन में सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें जमीन विवाद सुलझाने के बहाने पंचायत भवन बुलाया गया था। वहां पहले से घात लगाए बैठे 12-13 लोगों ने साजिश के तहत उन्हें एक कमरे में बंद कर दिया और उन पर जानलेवा हमला किया। राजेंद्र सिंह के अनुसार, हमलावरों ने न केवल उन्हें बुरी तरह पीटा, बल्कि उनके गले से सोने की चेन, घड़ी और चश्मा भी छीन लिया। उन्होंने स्थानीय मुखिया सुशीला देवी समेत आधा दर्जन लोगों को नामजद आरोपी बनाया है। ​दूसरी ओर आशा देवी (पति स्व. सोहराई मुंडा) ने भी थाना प्रभारी को शिकायत दी है। उनका आरोप है कि जब जमीन बंटवारे को लेकर ग्रामीणों के बीच वार्ता चल रही थी, तभी राजेंद्र सिंह ने वहां पहुंचकर व्यवधान डाला। आशा देवी का दावा है कि राजेंद्र सिंह ने संजय मुंडा और संजू मुंडा के साथ मारपीट की और उनके लिए जातिसूचक अपशब्दों का प्रयोग किया। मुखिया सुशीला देवी ने भी अपने आधिकारिक पत्र में राजेंद्र सिंह द्वारा बैठक में अशांति फैलाने और गाली-गलौज करने की बात कही है। ​

मिली जानकारी के अनुसार विवाद की मुख्य वजह भूदान की जमीन का आपसी बंटवारा है, जो लंबे समय से लंबित है। इसे सुलझाने के लिए रविवार सुबह 10 बजे का समय तय किया गया था। चश्मदीदों के अनुसार शुरुआत में बातचीत सामान्य थी, लेकिन अचानक एक पक्ष द्वारा उग्र व्यवहार करने से स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई।

मेसरा ओपी प्रभारी ने बताया कि दोनों पक्षों के आवेदन प्राप्त हुए हैं और कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पुलिस ने मामले में निम्नलिखित को नामजद किया है: ​आरोपी (पक्ष-1 की ओर से): मुखिया सुशीला देवी, मुनेश्वर पाहन, रविन्द्र महतो, आशा देवी, संजय मुंडा और राहुल राम। गवाह राजू मुंडा और सोनी देवी।

ओपी प्रभारी रामेश्वर वर्मा का कथन:

दोनों पक्षों की ओर से मामला दर्ज किया गया है। प्रारंभिक तौर पर यह जमीन के बंटवारे से उपजा विवाद है। पुलिस साक्ष्य जुटा रही है और जांच के बाद दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

​ग्रामीणों में आक्रोश: पंचायत भवन जैसे सुरक्षित और सार्वजनिक स्थान पर हुई इस हिंसक घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों में असुरक्षा का माहौल है। लोगों का कहना है कि अगर न्याय के केंद्र में ही हिंसा होगी, तो ग्रामीण अपनी फरियाद लेकर कहां जाएंगे।

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