रांची : अखिल भारतीय संपूर्ण क्रांति राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद, पूर्व जैक उपाध्यक्ष और झारखण्ड मजदूर मोर्चा के अध्यक्ष डॉ. सूरज मंडल ने कहा है कि झारखण्ड में संपन्न राज्यसभा चुनाव में नीति, नियत, नेतृत्व क्षमता और दूरदर्शिता का वैसा स्पष्ट अभाव नजर आया जो किसी भी राज्य के लिये दुर्भाग्यपूर्ण है. डॉ. मंडल ने कहा कि झारखण्ड में राज्यसभा के लिये संपन्न हुए दो सीटों के चुनाव ने न केवल झारखण्ड बल्कि पूरे देश में तथाकथित इंडिया ब्लॉक की जड़ें दिला दी है और यह स्पष्ट नजर आता है कि इस तथाकथित गठबंधन के पास ना तो सिर है और ना ही पैर और केवल संयोगों के आधार पर कुछेक प्रदेशों में इसकी सरकार है या फिर ये सभी राजनीतिक दल चल रहे हैं।डॉ. मंडल ने कहा कि क्रॉस वोटिंग के बाद जिस प्रकार से कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल और सीपीआई माले के विधायक और नेता एक-दूसरे के ऊपर दोषारोपण कर रहे हैं वह न केवल इन सभी राजनीतिक दलों को बदनाम कर रहा है बल्कि इससे राजनीतिक शब्द और झारखण्ड की भी बदनामी हो रही है जो दुर्भाग्यपूर्ण है।डाॅ. मंडल ने कहा कि आज न सिर्फ वे बल्कि सैंकड़ों-हजारों झारखण्ड आन्दोलनकारी, झारखण्ड का गठन कर पछता रहे हैं क्योंकि ऐसे दिन की कल्पना उन्होंने सपनों में भी नहीं की थी। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति केवल इसलिये उत्पन्न हुई है क्योंकि एक वैसे गैर आन्दोलनकारी के हाथ में सत्ता की कमान है जो आन्दोलन का दर्द और इसकी गरिमा को नहीं समझता. डाॅ. मंडल ने कहा कि झारखण्ड का गठन इसलिये नहीं हुआ था कि इस प्रदेश से बाहर के व्यक्ति को राज्यसभा सदस्य बनाने के लिये मुम्बई, दिल्ली, गोवा जैसे स्थानों पर डील की जाये।
झारखण्ड से निर्वाचित राज्यसभा सदस्य परिमल नाथवानी पर बाहरी होने का आरोप लगाने वालों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए डॉ. मंडल ने कहा कि यदि झारखण्ड मुक्ति मोर्चा, कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल और सीपीआई माले तथा अन्य दलों को बाहरी-भीतरी की इतनी ही चिंता है तो वे सभी यह बतायें कि क्या प्रणव झा के अलावे उन सभी को पूरे झारखण्ड में कोई भी एक ऐसा व्यक्ति नहीं मिला जिसे वह राज्यसभा के प्रत्याशी के रूप में खड़ा कर सकता था। श्री मंडल ने कहा कि झारखण्ड में केवल और केवल अपनी नाक और अपनी टोपी बचाने की लड़ाई चल रही है जिसमें इन सभी दलों को निश्चित रूप से असफलता ही हाथ लगेगी क्योंकि, सबकी नजर जनसेवा की बजाय भ्रष्टाचार और उल-जुलूल तरीके से पैसे कमाने पर है जिसका खामियाजा पूरे झारखण्ड की जनता आज भुगत रही है।
