क्लस्टर प्रणाली से जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं की अस्मिता और विरासत पर पड़ेगा प्रतिकूल प्रभाव

Ek Sandesh Live

रांची: जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग के शिक्षकों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों एवं भाषा प्रेमियों ने आज पूर्व शिक्षा मंत्री से मुलाकात कर जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं में लागू क्लस्टर प्रणाली से उत्पन्न होने वाली समस्याओं से अवगत कराया तथा एक ज्ञापन सौंपा। उन्होंने कहा कि क्लस्टर प्रणाली लागू होने से जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं की स्वतंत्र पहचान, अध्ययन-अध्यापन व्यवस्था, भाषा संरक्षण की प्रक्रिया तथा विद्यार्थियों के शैक्षणिक हित प्रभावित होंगे। इसका प्रतिकूल प्रभाव झारखंड की भाषाई विविधता, सांस्कृतिक अस्मिता, लोक साहित्य, पारंपरिक ज्ञान और समृद्ध विरासत पर पड़ेगा। इससे भाषाओं की विशिष्ट पहचान कमजोर होगी तथा उनके संरक्षण और संवर्धन के प्रयासों को भी नुकसान पहुंचेगा।ज्ञापन में मांग की गई कि जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं को क्लस्टर प्रणाली से मुक्त रखा जाए तथा पूर्व की भांति स्वतंत्र रूप से संचालित किया जाए, ताकि प्रत्येक भाषा की अपनी विशिष्टता, साहित्यिक परंपरा और सांस्कृतिक पहचान सुरक्षित रह सके।मुलाकात के दौरान इस विषय की गंभीरता पर चर्चा हुई और जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण एवं संवर्धन की आवश्यकता पर बल दिया गया। साथ ही आगामी 1 जुलाई 2026 को जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं का एक कॉन्क्लेव आयोजित करने का प्रस्ताव रखा गया, जिसमें भाषाओं से जुड़े विभिन्न पक्षों के साथ व्यापक विमर्श कर समाधान की दिशा में पहल की जाएगी।
बैठक में जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग के शिक्षक, शोधार्थी, विद्यार्थी एवं भाषा प्रेमी बड़ी संख्या में उपस्थित थे। सभी ने आशा व्यक्त की कि जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के शैक्षणिक, सांस्कृतिक और सामाजिक हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

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