साहिबगंज: विधायक मो ताजउद्दीन उर्फ एमटी राजा ने कहा कि मालदा मंडल अंतर्गत साहिबगंज जिला का तीनपहाड़, बाकुडी, तालझारी, मिर्जाचौकी व राजमहल से रेलवे को करोड़ों की राजस्व प्राप्ति होती है लेकिन यहां यात्री सुविधा से क्षेत्र के लोग आज भी वंचित हैं. यात्रियों को रेलवे स्टेशन पर ट्रेन ठहराव एवं प्लेटफार्म पर मिलने वाली मूलभूत सुविधा रेलवे के माध्यम से उपलब्ध नहीं कर पाना यह कहीं ना कहीं क्षेत्र के प्रति सौतेलापन जाहिर करता है. साहिबगंज के पूर्वी एवं पश्चिमी फाटक पर आरओबी का निर्माण की दिशा में और रेल प्रशासन त्वरित पहल करें. साहिबगंज में रेलवे के खाली पड़ी जमीन पर वाशिंग पित खोलने का भी मांग पूर्व में की गई है. मैं 2010 से क्षेत्र में रेलवे की मूलभूत समस्याओं की मांग को लेकर पत्राचार एवं धरना जैसे आंदोलन को कर रहा हूं. जनप्रतिनिधि बनने के बाद भी लगातार रेलवे को मेरे माध्यम से मांग पत्र सौंप जा रही है. रेलवे के वरिष्ठ पदाधिकारी को इस दिशा में सकारात्मक पहल करनी चाहिए. क्षेत्र के पत्थर व्यवसायी के द्वारा रक लोडिंग बंद कर जो आंदोलन क्या गया है वह क्षेत्र हित में जायज है. रेलवे यात्रियों को मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं की पूर्ति करें. उन्होंने कहा कि राजमहल रेलवे स्टेशन परिसर का व्यवसायिक जमीन मुख्य मार्ग से जुड़ा है.रेलवे के माध्यम से अगर मार्केट कम्प्लेक्स का निर्माण होता हैं तो क्षेत्र के लोगो के लिए रोजगार सृजन का अवसर प्राप्त होगा जिससे रेलवे को भी राजस्व की प्राप्ति होगी.झारखण्ड राज्य में एक मात्र राजमहल विधानसभा क्षेत्र से प्रवाहित होने वाली गंगा नदी जो ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टिकोण से अपना विशेष महत्व रखती है. राजमहल को मुगलकालीन शासन में बिहार बंगाल एवं उड़ीसा राज्य के राजधानी होने का भी गौरव प्राप्त है. राजमहल के ऐतिहासिक धरोहर जामी मस्जिद, बारादरी, सिधी दलान, टकसाल घर, झारखण्ड का एकमात्र रामसर साईट उथवा पक्षी अभ्यारण, खाद्यान्न जीवाश्म फॉसिल्स कटघर जहां झारखण्ड सहित पश्चिम बंगाल एवं बिहार के अलावे विदेशी पर्यटकों का आगमन वर्ष भर होते रहता है वही विश्व प्रसिद्ध ईस्कॉन द्वारा संचालित कन्हाई नाट्यशाला (गुप्त वृंदावन) में देश के विभिन्न क्षेत्रों के अलाचे विदेशों से भी कृष्णभक्त का आगमन होता है.पश्चिम बंगाल के नवद्वीप धाम मायापुर इंस्कान मंदिर से प्रतिदिन श्रद्धालुओं का आगमन होता है.मालदा रेल मंडल अंतर्गत राजमहल, तीनपहाड़ एवं साहेबगंज रेलवे स्टेशन से रेलवे को राजस्व की प्राप्ति होती है लेकिन यात्री सुविधा और रेल खण्ड पर संचालित प्रमुख ट्रेनों का ठहराव नहीं होने के कारण क्षेत्र में जाने वाले विभिन्न राज्यों के पर्यटको को काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है.