By Sunil
रांची। विश्व सिकल सेल दिवस के अवसर पर सदर अस्पताल में सिकल सेल एनीमिया के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के लिए शुक्रवार को कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार ने कहा कि सिकल सेल एनीमिया एक आनुवंशिक लेकिन रोकथाम योग्य बीमारी है। समय पर जांच, जागरूकता एवं उचित उपचार के माध्यम से इसके प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि जिले के सदर अस्पताल एवं सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में सिकल सेल एनीमिया की जांच पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध है। वर्तमान में गर्भवती महिलाओं की एएनसी जांच के दौरान भी सिकल सेल स्क्रीनिंग को शामिल किया गया है, जिससे गर्भावस्था के दौरान ही जोखिम की पहचान कर उचित परामर्श एवं प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सके।
उन्होंने आमजन से अपील करते हुए कहा कि अधिक से अधिक लोग सिकल सेल एनीमिया की जांच कराएं तथा विवाह पूर्व जांच को भी बढ़ावा दें, ताकि आने वाली पीढ़ियों को इस बीमारी से सुरक्षित रखा जा सके। कार्यक्रम के दौरान हेमेटोलॉजिस्ट डॉ. अभिषेक रंजन ने सिकल सेल एनीमिया के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि झारखंड में सिकल सेल जीन का प्रसार काफी अधिक है तथा राज्य की लगभग 8 से 10 प्रतिशत आबादी यानी 32 लाख लोगों में इसका जीन पाया जाता है। वहीं 1 से 2 प्रतिशत लोग इस बीमारी से प्रभावित हैं। उन्होंने कहा कि सिकल सेल एनीमिया से ग्रसित बच्चों में पांच वर्ष की आयु से पहले मृत्यु का जोखिम अधिक रहता है तथा यह बीमारी व्यक्ति की जीवन प्रत्याशा को भी प्रभावित करती है। डॉ. अभिषेक रंजन ने बताया कि इस बीमारी के मरीजों को हाथ-पैर, पेट एवं छाती में असहनीय दर्द, बार-बार बुखार, खून की कमी, थकान, सांस फूलना एवं संक्रमण जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। गंभीर मामलों में किडनी, फेफड़े और तिल्ली भी प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि समय पर हाइड्रॉक्सी यूरिया, फोलिक एसिड एवं अन्य आवश्यक उपचार लेने तथा मेनिंगोकोकल एवं इन्फ्लुएंजा जैसी वैक्सीन लगवाने से मरीजों की जीवन गुणवत्ता में सुधार लाया जा सकता है वही गर्भवती महिलाओं की पहली तिमाही में एचपीएलसी द्वारा अनिवार्य प्रसवपूर्व जांच की जानी चाहिए। यदि गर्भवती महिला की जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आती है, तो उसके पति की भी जांच कराई जानी चाहिए। यदि दोनों की जांच पॉजिटिव होती है, तो गर्भस्थ शिशु में सिकल सेल रोग अथवा अन्य हीमोग्लोबिन विकारों की पहचान के लिए एम्नियोसेंटेसिस या कोरियोनिक विलस सैम्पलिंग द्वारा प्रसवपूर्व जांच की सुविधा प्रदान की जानी चाहिए। उचित जेनेटिक काउंसलिंग के माध्यम से प्रभावित शिशु के जन्म की संभावना के बारे में जानकारी देकर आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श उपलब्ध कराया जाना चाहिए ताकि इस बीमारी को बढ़ाने से रोका जा सके l
डॉ अभिषेक ने इस वर्ष की थीम पर चर्चा करते हुए कहा कि सिकल सेल एनीमिया की रोकथाम एवं नियंत्रण में समुदाय की सक्रिय भागीदारी, समय पर जांच, सही परामर्श एवं सामाजिक जागरूकता की महत्वपूर्ण भूमिका है। साथ ही बीमारी से जुड़े सामाजिक भेदभाव को समाप्त करने और प्रत्येक स्तर पर उपचार एवं दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने की आवश्यकता जरुरी है l राज्य नोडल पदाधिकारी, ब्लड सेल, डॉ. प्रमोद कुमार सिन्हा ने कहा कि सिकल सेल एनीमिया एक गंभीर आनुवंशिक विकार है, जो दीर्घकालिक एनीमिया, तीव्र दर्द, रक्त वाहिकाओं के अवरोध तथा अंगों को क्षति पहुंचा सकता है। उन्होंने बताया कि राज्य में शीघ्र ही विशेष सर्वेक्षण अभियान चलाया जाएगा, जिसके तहत 0 से 5 वर्ष एवं 18 से 30 वर्ष आयु वर्ग के लोगों की निःशुल्क जांच की जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा सिकल सेल एनीमिया के मरीजों के लिए निःशुल्क रक्त की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
