शिवपुर-कठौतिया रेलवे लाइन परियोजना में नया मोड़, इरकॉन की भूमिका पर उठे सवाल

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News By Ashok Anant
​चतरा: शिवपुर-कठौतिया रेलवे लाइन परियोजना में मिट्टी खनन से जुड़े ₹26 करोड़ के फर्जी स्वामित्व प्रमाण पत्र मामले में एक नया और सनसनीखेज मोड़ आ गया है। जिला खनन पदाधिकारी मनोज टोप्पो के हाल ही में दिए गए बयान ने इस पूरे मामले की दिशा बदल दी है। अब तक खुद को पीड़ित बता रही इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड (Irco और संवेदक राजा कंस्ट्रक्शन की मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है, जिससे इस बड़े घोटाले में इरकॉन के अधिकारियों की भूमिका भी सीधे जांच के दायरे में आ गई है।
​बिना सत्यापन के हुआ 26 करोड़ का भुगतान
​जिला खनन पदाधिकारी मनोज टोप्पो ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि इरकॉन द्वारा राजा कंस्ट्रक्शन के माध्यम से जमा किए गए 16 कथित स्वामित्व प्रमाण पत्रों का जिला खनन कार्यालय के आधिकारिक ई-मेल या डाक के माध्यम से कभी कोई सत्यापन (वेरिफिकेशन) नहीं कराया गया था।
​डीएमओ मनोज टोप्पो का बयान
“बिना किसी विधिवत विभागीय सत्यापन के इन दस्तावेजों को सही मान लेना और उसके आधार पर संवेदक को करोड़ों रुपये का भुगतान कर देना बेहद संदेहास्पद है। इस लापरवाही या मिलीभगत की निष्पक्ष जांच से ही पूरी सच्चाई सामने आ पाएगी।”
​खनन विभाग की चेतावनियों को किया गया नजरअंदाज
​जांच में यह बात भी सामने आई है कि जिला खनन कार्यालय इस मामले को लेकर लगातार सक्रिय था, लेकिन इरकॉन की ओर से जानबूझकर उदासीनता बरती गई। डीएमओ के अनुसार, आधिकारिक ई-मेल आईडी से इरकॉन के अधिकारियों को लगातार चार बार पत्र भेजे गए थे:
​26 अप्रैल 2024
​24 जून 2024
​6 नवंबर 2024
​4 फरवरी 2025
​इन सभी पत्रों के माध्यम से मिट्टी खनिज के स्वामित्व भुगतान से संबंधित विसंगतियों की जानकारी दी गई थी और आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया था। इसके बावजूद, इरकॉन प्रबंधन ने किसी भी पत्र का जवाब देना उचित नहीं समझा।
​इरकॉन की कार्यप्रणाली पर दोहरा मापदंड
​इस मामले में इरकॉन की मंशा पर सबसे बड़ा सवाल उसके दोहरे रवैये को लेकर उठ रहा है। 30 जुलाई 2025 को इरकॉन ने इसी रेलवे परियोजना में इस्तेमाल हो रहे पत्थर और बालू के लिए आरके इंफ्राकॉप प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दिए गए प्रमाण पत्रों के सत्यापन के लिए खनन विभाग को ई-मेल भेजा था।
​हैरानी की बात यह है कि जहां बालू और पत्थर के लिए नियमों का पालन किया गया, वहीं राजा कंस्ट्रक्शन द्वारा जमा किए गए मिट्टी के 16 स्वामित्व प्रमाण पत्रों की सत्यता जांचने के लिए कभी कोई अनुरोध नहीं किया गया। इसी वजह से अधिकारियों की संलिप्तता की आशंका को बल मिल रहा है।

​क्या है मूल मामला

​गौरतलब है कि कुछ समय पहले इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड ने चतरा पुलिस को एक आवेदन देकर राजा कंस्ट्रक्शन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की थी। इरकॉन का आरोप था कि संवेदक ने रेलवे परियोजना में मिट्टी भराई के काम के नाम पर 16 फर्जी स्वामित्व प्रमाण पत्र और 12 फर्जी सत्यापन प्रतिवेदन जमा कर करीब ₹26 करोड़ का अवैध भुगतान प्राप्त कर लिया है।
​लेकिन अब खनन विभाग के इस नए खुलासे के बाद कि इरकॉन ने खुद कभी इन कागजातों को वेरीफाई ही नहीं कराया और विभाग के पत्रों को दबाए रखा, यह मामला पूरी तरह पलट चुका है। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि कहीं यह एफआईआर खुद को बचाने की कवायद तो नहीं थी। स्थानीय प्रशासन और पुलिस द्वारा इस मामले में जल्द ही बड़ी कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है

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