Eksandeshlive Desk
काठमांडू : नेपाल में कुष्ठ रोग के उन्मूलन की घोषणा के 16 वर्ष बाद देश के कई हिस्सों में फिर से कुष्ठ के रोगी पाए गए हैं। यह बात स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करने वाली संस्था साशाख्वा हेल्थ फाउंडेशन के अध्ययन में सामने आई है। अध्ययन के मुताबिक देश के 16 जिलों में 2,409 लोग कुष्ठ संक्रमित पाए गए हैं, जिनमें 145 बच्चे भी हैं। नेपाल में वर्ष 2010 में कुष्ठ रोग उन्मूलन की घोषणा की गयी थी। उस समय प्रति 10 हजार जनसंख्या पर कम से कम एक संक्रमित मिलने के आधार पर सरकार ने उन्मूलन की घोषणा की थी। यह अध्ययन कपिलवस्तु, धनुषा, रौतहट, पश्चिम नवलपरासी, पर्सा, झापा, कैलाली, सिरहा, सुनसरी, सर्लाही, बारा, मोरंग, महोत्तरी, बांके, रुपन्देही और पर्वत जिलों को आधार बनाकर किया गया था।
रिपोर्ट के अनुसार कपिलवस्तु में प्रति 10 हजार पर 2.4, धनुषा में 1.9, रौतहट में 1.8, पश्चिम नवलपरासी में 1.8, पर्सा में 1.7, झापा में 1.6, कैलाली में 1.6, सिरहा में 1.5, सुनसरी में 1.4, सर्लाही में 1.4, मोरंग में 1.3, महोत्तरी में 1.3, बांके में 1.3, रुपन्देही में 1.2 और पर्वत में 1.1 संक्रमण दर दर्ज की गई है। स्वास्थ्य तथा जनसंख्या मंत्रालय के सचिव डॉ. विकास देवकोटा ने कुष्ठ रोग उन्मूलन के लिए मल्टी-सेक्टोरल अवधारणा की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि वर्ष 2010 में उन्मूलन की घोषणा होने के बावजूद वर्तमान में 16 जिलों में प्रति 10 हजार पर एक से अधिक मरीज मिलना चिंता का विषय है। अब ब्लैंकेट एप्रोच के बजाय इक्विटी एप्रोच अपनाकर जहां समस्या है, वहीं विशेष हस्तक्षेप करना होगा। डॉ. देवकोटा ने बताया कि बच्चों में संक्रमण दर अधिक होने का मुख्य कारण परिवार में रोग की देर से पहचान और उपचार है। सामाजिक भेदभाव और कलंक के कारण लोग अभी भी बीमारी छिपाते हैं, जिससे संक्रमण समुदाय में फैलता है। उन्होंने कहा, “अब हमें अपनी सोच, व्यवहार और कार्यान्वयन में ब्लैंकेट एप्रोच की जगह इक्विटी एप्रोच अपनानी होगी। जहां-जहां समस्या है, वहां उसी अनुसार हस्तक्षेप करना होगा। समय पर उपचार न होने या देरी होने से बच्चों में यह संक्रमण फैलता है। विकलांगता या अंग-भंग की स्थिति में देर से आने के मामले भी हैं, जिससे उपचार देर से शुरू होता है। समग्र रूप से देखें तो समुदाय स्तर पर शीघ्र पहचान और तत्काल उपचार से ही जिम्मेदारी पूरी की जा सकती है। विशेषज्ञों ने कुष्ठ रोग के आंकड़ों को चिंताजनक बताते हुए इसके नियंत्रण में विलंब न करने की सलाह दी है। कुल 2,409 संक्रमितों में 154 बच्चों का होना संक्रमण की गंभीर स्थिति का संकेत माना गया है।
