झारखंड के आंगनवाड़ी केंद्रों में पोषण सेवाओं पर सवाल, ‘भोजन का अधिकार अभियान’ ने सर्वे में बताईं अनियमितताएं

Health

हालांकि, 97 प्रतिशत सेविकाओं ने माना- अंडा मिलने से बच्चों की उपस्थिति में हुआ सुधार

Eksandeshlive Desk

रांची : ‘भोजन का अधिकार अभियान’ झारखंड के कार्यकर्ता विवेक गुप्ता ने राज्य के आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों और महिलाओं को मिलने वाली पोषण सेवाओं में कई गंभीर खामियों का दावा किया है। उन्होंने शनिवार को सत्यभारती सभागार, कामिल बुल्के पथ में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान यह दावा किया। विवेक गुप्ता ने इस मौके पर बताया कि नवंबर-दिसंबर 2025 के दौरान राज्य के नौ जिलों के 15 प्रखंडों में 106 आंगनवाड़ी केंद्रों पर किए गए सर्वेक्षण में कई अनियमितताएं सामने आई हैं। विशेष रूप से बच्चों को दिए जाने वाले अंडा वितरण कार्यक्रम में गंभीर गड़बड़ियां पाई गईं। सर्वे के अनुसार केवल 43 प्रतिशत केंद्रों में ही सप्ताह में छह दिन अंडा उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा निर्धारित छह रुपये प्रति अंडा की दर बाजार मूल्य से कम है, जिसके कारण सेविकाओं को कई बार अपने खर्च से भुगतान करना पड़ता है। साथ ही, भुगतान में महीनों की देरी भी हो रही है। इसके बावजूद 97 प्रतिशत सेविकाओं ने माना कि अंडा मिलने से बच्चों की उपस्थिति में सुधार हुआ है।

डिजिटल प्रणालियों के अत्यधिक दबाव और प्रशासनिक लापरवाही : विवेक गुप्ता ने यह भी बताया कि ई-केवाईसी प्रक्रिया बड़ी बाधा बनकर सामने आई है, क्योंकि केवल 56.1 प्रतिशत लाभार्थियों का ही ई-केवाईसी पूरा हो पाया है। ओटीपी में देरी और तकनीकी समस्याओं के कारण कई पात्र लाभार्थी योजनाओं से वंचित रह जा रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता तारामणि साहू ने प्रेस वार्ता में कहा कि सबसे चिंताजनक स्थिति टेक-होम राशन (टीएचआर) वितरण की है, जहां 87 प्रतिशत केंद्रों में पिछले महीने वितरण नहीं हुआ, जबकि कई जगह पोषण ट्रैकर में वितरण दर्ज किया गया है। उन्होंने चेहरा पहचान प्रणाली (एफआरएस) को भी समस्याग्रस्त बताया और कहा कि नेटवर्क की कमी, तकनीकी विफलता और बढ़ते कार्यभार के कारण सेविकाएं कठिनाइयों का सामना कर रही हैं। सामाजिक कार्यकर्ता ज्यां द्रेज ने कहा कि डिजिटल प्रणालियों के अत्यधिक दबाव और प्रशासनिक लापरवाही के कारण महिलाओं और बच्चों तक पोषण सेवाएं प्रभावी ढंग से नहीं पहुंच पा रही हैं। उन्होंने यह भी बताया कि झारखंड के 575 गांव अभी भी मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सुविधा से वंचित हैं, जिससे डिजिटल व्यवस्था की अनिवार्यता व्यवहारिक रूप से चुनौतीपूर्ण बन गई है। प्रेस वार्ता में तारामणि साहू, सरिता एक्का, बुद्धि देवी, अफजल अनीश, जेम्स हेरेंज, मनीषा दिग्गी, सुगिया देवी, नन्हकु सिंह सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

Spread the love