Eksandeshlive Desk
काठमांडू : राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) ने नई सरकार गठन को लेकर मंथन शुरू कर दिया है। प्रधानमंत्री पद के दावेदार बालेन्द्र शाह अपनी टीम में मंत्री बनाने को लेकर लगातार विचार विमर्श कर रहे हैं। आरएसपी ने अपने चुनावी घोषणापत्र में ही संघीय मंत्रालयों की संख्या कम करने और ‘विशेषज्ञ मंत्रियों’ की नियुक्ति करने का वादा किया था। अब संसदीय चुनाव में लगभग दो-तिहाई बहुमत हासिल करने के बाद सवाल उठने लगा है कि पार्टी अपने घोषणापत्र में किए गए इस वादे को कैसे लागू करेगी। हालांकि, घोषणापत्र में यह स्पष्ट रूप से नहीं कहा गया है कि मंत्रियों की नियुक्ति संघीय संसद के बाहर से की जाएगी, लेकिन इस समय बालेन्द्र शाह की कोर टीम बैठ कर विशेषज्ञों की सूची तैयार कर रही है। इनमें सांसद और गैर सांसद दोनों तरह के लोग शामिल हैं।
संविधान के अनुसार प्रधानमंत्री सहित मंत्रियों की अधिकतम संख्या 25 हो सकती है : नेपाल के संविधान के अनुच्छेद 76(9) के अनुसार राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की सिफारिश पर संघीय संसद के सदस्यों में से समावेशिता सुनिश्चित करते हुए मंत्रिपरिषद का गठन करने का प्रावधान है। संविधान के अनुसार प्रधानमंत्री सहित मंत्रियों की अधिकतम संख्या 25 हो सकती है। इस प्रावधान के तहत मंत्रियों की नियुक्ति मुख्य रूप से नेपाल की संघीय संसद के सदस्यों में से ही की जा सकती है, जिसमें प्रतिनिधि सभा और राष्ट्रीय सभा के सदस्य शामिल होते हैं। हालांकि, संविधान में सीमित अवधि के लिए गैर-सांसद को भी मंत्री नियुक्त करने की व्यवस्था है। अनुच्छेद 78 के अनुसार राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सिफारिश पर किसी भी व्यक्ति को मंत्री नियुक्त कर सकते हैं, लेकिन उस व्यक्ति को शपथ लेने के छह महीने के भीतर संघीय संसद का सदस्य बनना अनिवार्य होता है। इसका अर्थ है कि यदि कोई गैर-सांसद मंत्री बनाया जाता है, तो वह अधिकतम छह महीने तक ही पद पर रह सकता है, जब तक कि वह इस अवधि में संसद का सदस्य न बन जाए। काठमांडू-7 से नवनिर्वाचित सांसद और आरएसपी नेता गणेश पराजुली ने कहा कि घोषणापत्र में इस्तेमाल किया गया ‘विशेषज्ञ’ शब्द पार्टी के भीतर चुने गए योग्य व्यक्तियों को दर्शाता है, न कि बाहरी तकनीकी विशेषज्ञों को। उन्होंने कहा कि विशेषज्ञ का मतलब उस क्षेत्र में ज्ञान और अनुभव रखने वाले व्यक्ति से है। इसका मतलब बाहर से लोगों को लाना नहीं है। वर्तमान संसदीय व्यवस्था और संवैधानिक ढांचे के तहत संविधान संशोधन के बिना ऐसा संभव भी नहीं है। पराजुली के अनुसार पार्टी का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संबंधित क्षेत्र की विशेषज्ञता रखने वाले सक्षम व्यक्तियों को ही उपयुक्त मंत्रालयों की जिम्मेदारी दी जाए। उन्होंने यह भी बताया कि घोषणापत्र के अनुरूप आरएसपी के नेतृत्व वाली सरकार में बनने वाली नई मंत्रिपरिषद में मंत्रियों की संख्या 18 तक सीमित रहने की संभावना है।
नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री ओली की चुनाव पर पहली प्रतिक्रिया में हार का दर्द छलका : पूर्व प्रधानमंत्री तथा सीपीएन यूएमएल के अध्यक्ष केपी शर्मा ओली की चुनाव परिणाम के बाद पहली प्रतिक्रिया सामने आई है। गुरुवार को उन्होंने फेसबुक पोस्ट में मतदाताओं को धन्यवाद देते हुए कहा कि उनकी पार्टी जनता के साथ अपने संबंध को और मजबूत बनाएगी। ओली ने कहा, “इस बार के चुनाव में मुझे अपेक्षा के अनुसार परिणाम प्राप्त नहीं हुआ। हमारी पार्टी भी अपेक्षित परिणाम नहीं ला सकी। लोकतंत्र में अंतिम फैसला जनता का होता है और उस फैसले को स्वीकार करना मेरा और मेरी पार्टी का कर्तव्य है।” उन्होंने कहा कि “हम जनता के बीच ही रहेंगे, जनता के लिए काम करते रहेंगे और विश्वास के इस संबंध को और मजबूत बनाते हुए आगे बढ़ेंगे। मत देने, साथ देने और विश्वास रखने वाले सभी लोगों को हृदय से धन्यवाद।” झापा 5 निर्वाचन क्षेत्र से राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के उम्मीदवार बालेन्द्र शाह से चुनाव में पराजित होने के बाद यह उनकी पहली प्रतिक्रिया है। नेपाल में वामपंथी दलों के इतिहास में यह पहली बार है जब यूएमएल पार्टी आम चुनाव में दहाई का आंकड़ा भी पार नहीं सका। यूएमएल को प्रत्यक्ष में सिर्फ 9 सीटे हासिल हुई। इसी तरह समानुपतिक में पार्टी को अब तक सबसे कम वोट 14.55 लाख वोट हासिल हुए।अब तक पार्टी को हमेशा ही 30 लाख से ऊपर ही वोट मिलता रहा है।
