पश्चिम एशिया में तीसरे हफ्ते युद्ध की ज्वाला हुई और तेज, ईरान ने पहली बार इजराइल पर दागी सेजिल बैलिस्टिक मिसाइल

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Eksandeshlive Desk

तेहरान : अमेरिका-इजराइल और ईरान युद्ध का आज सोमवार को 17वां दिन है। पश्चिम एशिया में जारी इस जंग की ज्वाला तीसरे हफ्ते और अधिक तेज हो गई है। ईरान ने कुवैत, तुर्किए और यूएई में कई ठिकानों पर हमले किए हैं। इजराइल और अमेरिकी ठिकानों पर भी मिसाइल और ड्रोन दागे हैं। ईरान ने दावा किया है कि उसने चार अमेरिकी एयरबेस पर एकीकृत मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। ईरान ने रविवार को इस लड़ाई में पहली बार इजराइल पर ‘सेजिल बैलिस्टिक मिसाइल’ से हमला किया। यह जानकारी ईरान इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) की न्यूज एजेंसी तसनीम ने दी। वहीं इजराइल ने कहा है कि उसकी सेना ने दक्षिणी लेबनान में कई स्थानों पर हमले किए हैं। अल जजीरा की रिपोर्ट में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के हवाले से कहा गया है कि उसके नौसेना बलों ने रविवार आधीरात बाद भोर होने से पहले संयुक्त राज्य अमेरिका के एयरबेस पर चार बार समन्वित मिसाइल और ड्रोन हमले किए। हमले में अमेरिकी बलों से जुड़े कमांड सेंटर, एयर ट्रैफिक कंट्रोल टावर और वायु रक्षा सुविधाओं को निशाना बनाया गया। ईरानी बल आईआरजीसी ने दावा किया कि सैटेलाइट तस्वीरों में निशाना बनाए गए ठिकानों को भारी नुकसान दिखाई दिया है। इस बीच, लेबनान की राष्ट्रीय समाचार एजेंसी एनएनए के अनुसार, इजराइली युद्धक विमानों ने दक्षिणी लेबनान में हमलों की बौछार की है। इजराइल डिफेंस फोर्सेज (आईडीएफ) ने नबातीह जिले के जबदीन शहर को निशाना बनाया। हनिन, कफ़र, ऐता अल-शाब और यातेर में भी हमलों की खबरें आईं। इससे पहले, आईडीएफ ने एक्स पोस्ट में दावा किया कि अमेरिका में मिशिगन के सिनेगॉग (यहूदी प्रार्थना स्थल) पर हमले के पीछे जिस व्यक्ति का हाथ था, उसका भाई हिजबुल्लाह में एक कमांडर था। इब्राहिम पिछले सप्ताह इजराइली वायुसेना के हिजबुल्लाह के एक सैन्य ठिकाने पर किए गए हवाई हमले में मारा जा चुका है।

ईरान ने कहा- अमेरिका से युद्धविराम की पेशकश नहीं की : इस बीच, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कल कहा कि ईरान ने न तो युद्धविराम की मांग की है और न ही अमेरिका से बातचीत की पेशकश की है। जब तक जरूरत होगी ईरान अपनी रक्षा करता रहेगा। वहीं आईआरजीसी ने कहा कि सेजिल के माध्यम से इजराइल के सैन्य और रक्षा सुविधा को निशाना बनाया गया है। यह मिसाइल 2000-2500 किलोमीटर तक हमला कर सकती है। 28 फरवरी को अमेरिका-इजराइल के आक्रामक युद्ध शुरू होने के बाद से यह पहली बार है जब सेजिल मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया। आईआरजीसी जनसंपर्क कार्यालय के अनुसार, इस हमले के दौरान अन्य मिसाइलों का भी प्रयोग किया गया। 28 फरवरी के हमलों में पूरे ईरान में सैन्य और नागरिक ठिकानों को निशाना बनाया गया। इससे भारी जान-माल का नुकसान हुआ और बुनियादी ढांचे को व्यापक क्षति पहुंची है। इसके जवाब में ईरानी सशस्त्र बलों ने युद्ध शुरू किया है। वहीं, अमेरिकी न्यूज चैनल सीबीएस न्यूज को दिए साक्षात्कार में ईरान के विदेशमंत्री अब्बास अराघची ने कल कहा कि ईरान ने न तो युद्धविराम की मांग की है और न ही अमेरिका से बातचीत की कोशिश की है। जब तक जरूरत होगी ईरान खुद की रक्षा करता रहेगा। उन्होंने कहा कि ईरान इस संघर्ष में पीछे हटने वाला नहीं है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को यह स्वीकार करना होगा कि यह युद्ध न्यायसंगत नहीं है। जब तक वह स्वीकार नहीं करते, तब तक ईरान जवाब देता रहेगा। अराघची ने कहा कि अमेरिकी हमलों के बाद देश की परमाणु सामग्री जमीन के नीचे दब गई है। उन्होंने कहा कि भविष्य में इस सामग्री को शायद निकाला जा सके, लेकिन अभी यह पहुंच से बाहर है। ईरान की फिलहाल इसे वापस निकालने की कोई योजना नहीं है। अराघची ने कहा कि हालिया तनाव बढ़ने से पहले, अमेरिका के साथ बातचीत के दौरान ईरान अपनी अत्यधिक समृद्ध सामग्री के भंडार को कम करने के लिए पहले तैयार था।

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