Eksandeshlive Desk
नई दिल्ली : केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोमवार को कहा कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा संकट के बीच भारत को विदेशी मुद्रा संरक्षण, घरेलू निवेश बढ़ाने तथा नवाचार आधारित विनिर्माण पर विशेष ध्यान देना होगा। सीआईआई वार्षिक बिजनेस समिट को संबोधित करते हुए वैष्णव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अपील का उल्लेख करते हुए कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में नागरिकों और उद्योग जगत दोनों को विदेशी मुद्रा बचाने और निर्यात बढ़ाने में योगदान देना चाहिए। उन्होंने कहा, “संघर्ष अभी जारी है और शांति अभी काफी दूर दिख रही है। ऐसे समय में नागरिकों को विदेशी मुद्रा खर्च होने वाली चीजों पर अनावश्यक खर्च कम करना चाहिए और उद्योगों को अधिक निवेश तथा निर्यात बढ़ाने की दिशा में काम करना चाहिए।”
मंत्री ने कहा कि भारत ने विवेकपूर्ण आर्थिक नीतियों के जरिए वैश्विक अस्थिरता के बावजूद पेट्रोल-डीजल कीमतों और मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखा है। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत छह से आठ प्रतिशत की विकास दर बनाए रखेगा और मौजूदा वैश्विक उथल-पुथल से विजेता बनकर उभरेगा। रेलवे क्षेत्र में बदलावों का उल्लेख करते हुए वैष्णव ने कहा कि पिछले दस वर्षों में 36,000 किलोमीटर नई रेल लाइनें बिछाई गईं और 49,000 किलोमीटर रेलमार्ग का विद्युतीकरण किया गया, जो जर्मनी के कुल रेल नेटवर्क से भी अधिक है। उन्होंने कहा कि रेलवे पूंजीगत व्यय कुछ वर्षों पहले के 66,000 करोड़ रुपये से बढ़कर पिछले वित्त वर्ष में लगभग 2.72 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। उन्होंने बताया कि समर्पित माल गलियारा (डीएफसी) पांच अप्रैल को पूरा हो गया और अब इस पर प्रतिदिन करीब 480 ट्रेनें चल रही हैं, जिससे बंदरगाहों तक माल पहुंचाने का समय 48 घंटे से घटकर 12 से 16 घंटे रह गया है। उच्च गति रेल परियोजनाओं का जिक्र करते हुए वैष्णव ने कहा कि सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं को नई दिशा देंगे। उन्होंने कहा कि मुंबई से पुणे की यात्रा केवल 48 मिनट में पूरी होगी, जबकि पुणे-हैदराबाद के बीच यात्रा 1 घंटा 55 मिनट और हैदराबाद-बेंगलुरु के बीच सफर 2 घंटे 8 मिनट में पूरा किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि दिल्ली-लखनऊ यात्रा लगभग दो घंटे में पूरी होगी और दिल्ली से सिलीगुड़ी तक की यात्रा करीब छह घंटे में संभव हो जाएगी। इन परियोजनाओं में लगभग 16 लाख करोड़ रुपये का निवेश होगा, जिसका बड़ा हिस्सा भारतीय कंपनियों और विनिर्माताओं को मिलेगा।
मंत्री ने कहा कि रेलवे तकनीक में भारत अब वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर रहा है और देश जर्मनी, फ्रांस, इटली, स्विट्जरलैंड तथा अमेरिका जैसे देशों को रेल इंजन के प्रोपल्शन सिस्टम निर्यात कर रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सेमीकंडक्टर क्षेत्र का उल्लेख करते हुए वैष्णव ने कहा कि पिछले वित्त वर्ष में स्मार्टफोन भारत का सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद बन गया। उन्होंने बताया कि देश में दो सेमीकंडक्टर इकाइयां व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर चुकी हैं, जबकि तीसरी जुलाई और चौथी इस वर्ष के अंत तक उत्पादन शुरू करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार डेटा सेंटर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) अवसंरचना पर विशेष ध्यान दे रही है और 2047 तक डेटा सेंटर पर कर नहीं लगाने की नीति से करीब 200 अरब डॉलर के निवेश को प्रोत्साहन मिला है। कार्यक्रम में उद्योगपति सुनील भारती मित्तल और वेणु श्रीनिवासन को सीआईआई प्रेसिडेंट्स लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। इस दौरान दोनों उद्योगपतियों ने भी घरेलू निवेश, गुणवत्ता, अनुसंधान एवं विकास तथा विनिर्माण प्रतिस्पर्धा बढ़ाने पर जोर दिया।
