Eksandeshlive Desk
काठमांडू : राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के संसदीय दल के नेता बालेन्द्र शाह (बालेन) ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल ने शीतल निवास में आयोजित विशेष समारोह में 36 वर्षीय बालेन को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इससे पहले राष्ट्रपति पौडेल ने संविधान के अनुच्छेद 76(1) के अनुसार प्रतिनिधि सभा में बहुमत प्राप्त दल के नेता के रूप में शाह को प्रधानमंत्री नियुक्त किया था। नेपाल के संविधान 2015 (2072) के लागू होने के बाद इस धारा का उपयोग कर प्रधानमंत्री नियुक्त किए जाने का यह पहला अवसर है। साथ ही मधेशी समुदाय से किसी व्यक्ति का नेपाल का प्रधानमंत्री बनना भी पहली बार हुआ है। काठमांडू महानगर के मेयर पद से इस्तीफा देकर चुनाव में भाग लेने वाले शाह पहली बार संसद में प्रवेश करते ही प्रधानमंत्री बने हैं। उन्होंने झापा क्षेत्र-5 संसदीय क्षेत्र से पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को लगभग 50 हजार मतों के अंतर से हराकर प्रतिनिधि सभा सदस्य का चुनाव जीता था। शाह मंत्रिपरिषद में स्वर्णिम वाग्ले को वित्त मंत्री बनाया और सुदन गुरूंग को गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है। शिशिर खनाल को विदेश मंत्रालय का कार्यभार सौंपा गया है। सुनिल लम्साल को भौतिक पूर्वाधार, परिवहन तथा शहरी विकास मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है। विराजभक्त श्रेष्ठ को ऊर्जा, जलस्रोत तथा सिंचाई मंत्रालय का नेतृत्व दिया गया है, जबकि खड्कराज पौडेल (गनेश) को पर्यटन मंत्री बनाया गया है। सस्मित पोखरेल को शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा युवा एवं खेलकूद मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई है। निशा मेहता स्वास्थ्य एवं जनसंख्या मंत्री बनी हैं, जबकि विक्रम तिमिल्सिना को संचार मंत्री नियुक्त किया गया है। इसी तरह प्रतिभा रावल को सामान्य प्रशासन मंत्री, दीपक साह को श्रम एवं रोजगार मंत्री और सोविता गौतम को कानून मंत्री बनाया गया है। गीता चौधरी को कृषि एवं पशुपंक्षी विकास तथा वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि सीता वादी महिला, बालबालिका मंत्री बनी हैं।
काठमांडू के मेयर से सिंह दरबार तक बालेन्द्र शाह का असाधारण सफर : नेपाल की समकालीन राजनीति में एक ऐसा नाम उभरा है जिसने पारंपरिक ढांचे को चुनौती देते हुए युवाओं की आकांक्षाओं को नई दिशा दी। वो नाम है—बालेन्द्र शाह (बालेन)। एक रैपर, इंजीनियर। देश के प्रधानमंत्री पद तक का उनका सफर न केवल असामान्य है, बल्कि यह नेपाल की बदलती राजनीतिक संस्कृति का प्रतीक भी बन चुका है। राजनीति में आने से पहले बालेन शाह नेपाल के हिप-हॉप जगत में एक जाना-पहचाना नाम रहे हैं। उन्होंने अपने गीतों के जरिए सामाजिक असमानता, भ्रष्टाचार और युवाओं की निराशा जैसे मुद्दों को उठाया। उनका संगीत केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि व्यवस्था के खिलाफ एक आवाज रहा है—जिसने उन्हें खासकर जेन जी के बीच लोकप्रिय बना दिया। बालेन का राजनीतिक प्रवेश पारंपरिक दलों से अलग रहा। उन्होंने खुद को “स्वतंत्र उम्मीदवार” के रूप में प्रस्तुत किया और राजनीति में पारदर्शिता, जवाबदेही और तकनीकी दक्षता को प्राथमिकता दी। उनकी छवि एक ऐसे नेता की बनी जो सिस्टम के बाहर से आकर उसे बदलने का दावा करता है—और यही बात युवाओं को सबसे ज्यादा आकर्षित करती रही। 2022 में काठमांडू महानगरपालिका के मेयर के रूप में उनकी जीत ऐतिहासिक रही। उन्होंने बड़े राजनीतिक दलों को पीछे छोड़ते हुए जनता का भरोसा जीता। मेयर बनने के बाद उन्होंने कई सख्त और त्वरित फैसले लिए, जैसे- अवैध संरचनाओं पर कार्रवाई, सार्वजनिक स्थानों का संरक्षण, शहरी प्रबंधन में सुधार। इन कदमों ने उन्हें “एक्शन-ओरिएंटेड” नेता के रूप में स्थापित किया। बालेन शाह को नेपाल में जेन जेड आंदोलन का प्रतीक माना जाता है। उनकी भाषा, सोच और कार्यशैली ने युवा पीढ़ी को राजनीति के करीब लाने में बड़ी भूमिका निभाई। सोशल मीडिया के प्रभावी उपयोग और सीधे संवाद की शैली ने उन्हें युवाओं का “अपना नेता” बना दिया। जहां एक ओर उनके फैसलों की सराहना हुई, वहीं कई कदम विवादों में भी रहे। वह अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई को लेकर आलोचना के केंद्र में रहे। प्रशासनिक प्रक्रिया को दरकिनार करने का आरोप लगा। अभिव्यक्ति और नीति के बीच संतुलन पर सवाल उठे। आलोचकों का कहना है कि उनकी शैली कभी-कभी “अत्यधिक आक्रामक” दिखती है, जबकि समर्थक इसे “जरूरी सख्ती” मानते हैं। राष्ट्रीय राजनीति में प्रवेश के बाद बालेन शाह ने आम चुनाव में अभूतपूर्व सफलता हासिल की। उनके नेतृत्व में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी को संसद में दो-तिहाई बहुमत मिला—जो नेपाल की राजनीति में एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है। यह जनादेश स्पष्ट रूप से बदलाव, पारदर्शिता और नए नेतृत्व के प्रति जनता के विश्वास को दर्शाता है। इस ऐतिहासिक जीत के बाद बालेन शाह को नेपाल का प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया। उनकी नियुक्ति को “नए युग की शुरुआत” के रूप में देखा जा रहा है। बालेन शाह की कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की सफलता नहीं, बल्कि नेपाल की बदलती राजनीतिक सोच का प्रतिबिंब है। रैप से राजनीति तक का उनका सफर यह दिखाता है कि नई पीढ़ी अब केवल दर्शक नहीं, बल्कि परिवर्तन की चालक बन चुकी है।
बालेन्द्र शाह की पहली कैबिनेट बैठक 100 दिन 100 एजेंडा प्रस्ताव पारित करेगी : बालेन्द्र शाह के नेतृत्व में बनने वाली नई सरकार में कई पुरानी परंपराओं को बदलने की योजना बनाई गई है। इनमें पहली कैबिनेट बैठक से 100 दिन 100 एजेंडा का प्रस्ताव पारित करने की तैयारी है। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी ने इस बार संकेत दिया है कि मंत्री शपथ के बाद किए जाने वाले ‘पहले निर्णय’ की परंपरा को जारी नहीं रखा जाएगा। इसके बजाय, कैबिनेट स्तर पर ही 100 दिनों के भीतर लागू करने के लक्ष्य के साथ ‘100 निर्णय’ लेने की तैयारी की जा रही है। बालेन के करीबी नेता कुमार बेन ने कहा, “मंत्री व्यक्तिगत रूप से पहला निर्णय नहीं लेंगे, बल्कि कैबिनेट ही प्राथमिकताओं के आधार पर 100 फैसले करेगी। इसके बाद संबंधित मंत्रालय अपने अधिकार क्षेत्र में उन निर्णयों को लागू करेंगे—और परिणाम भी वहीं से दिखाई देंगे।” उनके अनुसार, इस मॉडल का उद्देश्य ‘लोकलुभावन घोषणाओं’ के बजाय परिणाममुखी कार्यों पर जोर देना है। उन्होंने मंत्रियों के काम को अधिक प्रभावी बनाने के लिए एक नई संरचना पर भी चर्चा करने की जानकारी दी है। कुमार बेन के अनुसार, प्रत्येक मंत्री की सहायता के लिए चार-चार सांसदों को नियुक्त करने के विषय में आंतरिक स्तर पर विचार-विमर्श चल रहा है। उन्होंने कहा, “मंत्री अकेले सब कुछ संभालेंगे, ऐसा नहीं है। सांसदों की टीम बनाकर काम कराने की तैयारी है। इससे निर्णयों के कार्यान्वयन और निगरानी दोनों में आसानी होगी।” इससे पहले वनस्थली स्थित केंद्रीय कार्यालय में हुई केंद्रीय समिति और संसदीय दल की संयुक्त बैठक में सभापति लामिछाने ने मंत्री चयन की जिम्मेदारी नेतृत्व पर छोड़ने का आग्रह किया था। उन्होंने यह भी कहा कि “हम विशेषज्ञता के आधार पर मंत्रियों का चयन करेंगे” और आंतरिक लॉबिंग से बचने का निर्देश दिया था।
शपथग्रहण से ठीक पहले बालेन ने रिलीज किया अपना नया रैप, यू-ट्यूब पर तोड़ा रिकॉर्ड : प्रधानमंत्री पद की आज शपथ लेने जा रहे राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के वरिष्ठ नेता बालेन्द्र शाह का प्रभाव सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि संगीत क्षेत्र में भी उतना ही प्रभावशाली है। शपथ ग्रहण से एक दिन पहले गुरुवार को सार्वजनिक किए गए उनके चर्चित रैप गीत ‘जय महाकाली’ ने यू-ट्यूब पर नेपाली गीतों के इतिहास में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इस गीत को रिलीज होने के मात्र 24 घंटे के भीतर ही 2४ लाख से अधिक बार देखा गया। यह अब तक का सबसे ज्यादा व्यूज पाने वाला नेपाली गीत बन गया है। इससे पहले यह रिकॉर्ड दुर्गेश थापा और सिसन बानियाँ के सहयोग से बने गीत ‘जाने भए जाम माया’ के नाम था, जिसे 24 घंटे में 16 लाख 36 हजार व्यूज मिले थे। इसी तरह, यह गीत सार्वजनिक होने के केवल 3 घंटे के भीतर ही 10 लाख व्यूज पार कर सबसे तेजी से 10 लाख व्यूज हासिल करने वाला नेपाली गीत भी बन गया है। ‘जय महाकाली’ का ऑडियो 11 वर्ष पहले ही तैयार हुआ था। इसे री-मास्टरिंग कर चुनावी अभियान के दृश्यों के साथ वीडियो रूप में फिर से जारी किया गया है। इस गीत के बोल खुद बालेन्द्र ने लिखे हैं। उन्होंने इसे अपने यू-ट्यूब चैनल पर इसे अपलोड किया।
