रेलवे ने इस साल 1670 मिलियन टन माल ढुलाई का बनाया रिकॉर्ड : वैष्णव

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Eksandeshlive Desk

नई दिल्ली : रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को कहा कि भारतीय रेल ने वर्ष 2025-26 के दौरान माल ढुलाई में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए 1670 मिलियन टन (एमटी) कार्गो का परिवहन किया है। यह पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 3.25 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है और देश की लॉजिस्टिक्स प्रणाली में रेल की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करता है। लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान वैष्णव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पूरे देश में रेलवे के विकास के लिए रिकॉर्ड बजट आवंटन किया है, उसका लाभ भी बहुत मिला है। जैसा कि रेलवे गरीबों और मध्यम वर्ग की सवारी है। पिछले एक दशक में जो निवेश हुआ है उसका लाभ गरीब से गरीब व्यक्ति और मध्यम वर्ग परिवारों को हुआ है। उन्होंने कहा कि हाल ही में समाप्त हुए वित्त वर्ष में भारतीय रेलवे ने 76,352 विशेष ट्रेनें चलाईं हैं। वर्तमान में रेलवे नेटवर्क पर प्रतिदिन लगभग 25,000 ट्रेनें चलती हैं। रेलवे ने इस वर्ष के दौरान 1,670 मिलियन मीट्रिक टन माल परिवहन का रिकॉर्ड हासिल किया है। उन्होंने कहा कि रेलवे के 50 साल के इतिहास में इस वर्ष सबसे कम संख्या में गंभीर दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। केवल 16 गंभीर दुर्घटनाओं की सूचना मिली, जो सुरक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि बीते वित्त वर्ष में 1914 लोको मैन्युफैक्चर हुए हैं जोकि कई देशों से अधिक है।

किफायती, भरोसेमंद और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन : रेल मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार इस अवधि में वैगनों की संख्या में भी 4.56 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। 2024-25 में जहां 2,79,12,271 वैगनों का उपयोग हुआ था, वहीं 2025-26 में यह बढ़कर 2,91,86,475 हो गया। यह वृद्धि देश में किफायती, विश्वसनीय और कुशल परिवहन के रूप में रेलवे की बढ़ती मांग को दर्शाती है। माल ढुलाई में वृद्धि का प्रमुख कारण उर्वरक तथा ‘पिग आयरन और स्टील’ क्षेत्रों में तेज वृद्धि रही। उर्वरक परिवहन में 13.49 प्रतिशत और पिग आयरन एवं तैयार स्टील में 13.11 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह कृषि क्षेत्र में बढ़ती मांग और औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार का संकेत है। बुनियादी ढांचा क्षेत्र से जुड़े प्रमुख उत्पादों ने भी इस वृद्धि को मजबूती दी। लौह अयस्क का परिवहन 6.74 प्रतिशत बढ़कर 190.12 मिलियन टन तक पहुंच गया, जबकि सीमेंट ढुलाई में 4.74 प्रतिशत की वृद्धि के साथ यह 157.17 मिलियन टन हो गया। इससे देश में जारी निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास गतिविधियों की रफ्तार का संकेत मिलता है। क्षेत्रवार प्रदर्शन में भी व्यापक सुधार देखने को मिला। दक्षिण पश्चिम रेलवे (एसडब्ल्यूआर) ने 14.89 प्रतिशत की वृद्धि के साथ सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। इसके अलावा उत्तर मध्य रेलवे (12.62 प्रतिशत), पूर्वी तट रेलवे (10.42 प्रतिशत) और पश्चिम मध्य रेलवे (10.06 प्रतिशत) ने भी दो अंकों की वृद्धि दर्ज की। अन्य रेलवे जोनों में भी सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई, जिनमें पूर्वी रेलवे (0.78 प्रतिशत), पूर्व मध्य रेलवे (0.39 प्रतिशत), उत्तर पूर्वी रेलवे (0.25 प्रतिशत), पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (6.75 प्रतिशत), उत्तर पश्चिम रेलवे (5.17 प्रतिशत), दक्षिण मध्य रेलवे (2.59 प्रतिशत), दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (3.18 प्रतिशत), दक्षिण रेलवे (1.10 प्रतिशत) और पश्चिम रेलवे (3.57 प्रतिशत) शामिल हैं। रेल मंत्रालय के अनुसार विभिन्न जोनों में यह संतुलित वृद्धि देशभर में माल ढुलाई क्षमता में सुधार और क्षेत्रीय विकास को दर्शाती है। भारतीय रेल ने इस प्रदर्शन के जरिए एक बार फिर देश की आर्थिक प्रगति में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया है। किफायती, भरोसेमंद और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन माध्यम के रूप में रेलवे न केवल लॉजिस्टिक्स लागत को कम कर रही है, बल्कि सड़कों पर दबाव भी घटा रही है और हरित परिवहन प्रणाली को बढ़ावा दे रही है।

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