खूंटी: जिले के डुंगरा गांव स्थित आम बगीचा में पड़हा राजाओं के संयुक्त बैठक में रुढ़िवादी जनजातीय समुदाय के लोगों ने पेशा कानून पर अपनी अपनी बातें रखीं। मौके पर बतौर मुख्य अतिथि पंचायती राज विभाग के पूर्व निदेशक निशा उरांव ने कहा कि पेशा कानून हजारों वर्ष पुरानी जनजातीय, पारंपरिक व धर्मिक विरासत के संरक्षण के लिए बना है। जिसमें हातू मुंडा, पाहन, पानीभरा, महतो आदि पारंपरिक पद होता है। हातु मुंडा ग्राम प्रधान होते हैं। ऐसे लोग समाज का विकास के साथ अपने धर्म की रक्षा के लिए मी चयनित होते हैं। लेकिन इसे बदल कर जो रुढ़िवादी परंपरा को छोड़कर दूसरे संप्रदाय में चले गये हैं, उन्हें पदाधिकारी बनाया जा रहा है, यह पेशा कानून से संगत नहीं है व आदिवासी के पारंपरिक विरासत को नुकसान कर रहा है। उन्होंने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा हमारे जमीन, धर्म व संस्कृति की रक्षा केलिए तीर धनुष से अंग्रेजों के खिलाफ उलगुलान किए थे। आज उनके वंशज उसी पारंपरिक विरासत की रक्षा करने के लिए कानून की मदद से अंग्रेजी मानसिकता वालों के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारे धर्म आस्था से जो लोग अलग हो गए हैं, वह अब सामाजिक जिम्मेदारी के साथ पद की धार्मिक जिम्मेदारी नहीं निभा पाते हैं, अत: उनका पारस्परिक पदाधिकारी बने रहने का कोई औचित्य नहीं है। एक तरह से वे अब आदिवासी के पारंपरिक विरासत व संवैधानिक अधिकार पर कब्जा व घुसपैठ कर रहे हैं। आज हम रुढ़िवादी जनजातीय समुदाय के हमलोग अंतिम पीढ़ी है, जिनको कि अपना गीत, संगीत, रीति रिवाज आदि याद है। अत: ऐसे में अब समाज को उनका अधिकार नहीं मिलेगा, तो हमारी रुढ़िवादी आदिवासी परंपरा समाप्त हो जाएगी। इसलिए हमें अपने हक व अधिकार के लिए लड़ना होगा। कार्यक्रम में खूंटी, मुरहू, कर्रा, तमाड़, अड़की सहित अन्य प्रखंड के अनेक पड़हा राजा शामिल हुए। सभी ने कहा कि पेशा कानून 1996 में जिसके लिए बना है उसे ही मिलना चाहिए। पेशा कानून रुढ़िवादी जनजातीय समुदाय के लोगों के लिए बना है, लेकिन जबरन इसपर लेग कब्जा करना चाहते हैं। वहीं उड़िसा व छत्तीसगढ़ सरकार ने पेशा कानून को लागू किया है, लेकिन इसपर आदि धर्म को परित्याग कर इसाई मतों को माननेवाले अल्पसंख्यक वर्ग के लोग इसका लाभ लेना चाह रहे हैं, जो गलत है। पड़हा राजा मंगल सिंह मुंडा ने कहा कि हम हमारे पूर्वजों के बताए मार्ग पर चलते आ रहे हैं। यह पेशा कानून हमारे लिए व हमारे संरक्षण के लिए बना है। हमें अपने आनेवाली पीढ़ी को राह दिखाने व बचाने वाला कानून है यह पेशा कानून। इसके लिए लड़ाई लड़ना होगा, ताकि आनेवाले पीढ़ी इस मजबूत कानून व अपने अधिकार को समझ सके।
ग्राम प्रधान संघ के तमाड़ प्रखंड के पूर्णचंद्र मुंडा ने कहा कि हमारे देश का कानून हमें अधिकार दिया है कि हम अपना विकास अपने अनुसार कर सकें। अपने धर्म की रक्षा स्वयं हमे ही करना होगा इसके लिए हम सभी एकजुट हैं। इसलिए इसकी लड़ाई हमें ही लड़ना है। इस दौरान महेन्द्र मुंडा, भीम सिंह बिझिया, महादेव पाहन, रुखू मुंडा, सुनील सांगा, सोमरा मुंडा सहित सैकड़ों लोग कार्यक्रम में शामिल थे।
