मेसरा सड़क हादसा: मुआवजे की मांग को लेकर परिजनों ने किया रांची-हजारीबाग मार्ग जाम

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हादसे ने उजाड़ा हँसता-खेलता परिवार, पीछे छूट गए चार मासूम बच्चे, एक बेटी है दिव्यांग

​अंचल अधिकारी और समाजसेवी ने व्यक्तिगत सहायता देकर खुलवाया जाम, सरकारी मदद का मिला भरोसा

MUSTFA

​मेसरा (राँची): बीते सोमवार की रात मेसरा ओपी क्षेत्र के गेतलातू चौक पर हुए दर्दनाक सड़क हादसे, जिसमें माँ बबीता देवी (42 वर्ष) और उनकी पुत्री प्रीति कुमारी (12 वर्ष) की बस से कुचलकर मौत हो गई थी के विरोध में मंगलवार को परिजनों और स्थानीय ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। दोषियों पर कार्रवाई और उचित मुआवजे की मांग को लेकर परिजनों ने रांची-हजारीबाग मुख्य मार्ग को दोपहर 3:00 बजे से शाम 5:30 बजे तक जाम रखा। ​सड़क जाम की सूचना मिलते ही कांके अंचल अधिकारी अमित भगत और मेसरा ओपी थाना प्रभारी अजय कुमार दास दलबल के साथ मौके पर पहुँचे। परिजनों के प्रति संवेदाना व्यक्त करते हुए अंचल अधिकारी अमित भगत और स्थानीय समाजसेवी हाजी हयात अंसारी ने दरियादिली दिखाते हुए तत्काल राहत के तौर पर अपने निजी कोष से 10-10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता पीड़ित परिवार को प्रदान की। अधिकारियों द्वारा सरकारी प्रावधानों के तहत मिलने वाली अधिकतम सहायता राशि और अन्य सुविधाओं का आश्वासन मिलने के बाद ही ग्रामीणों ने जाम हटाया और आवागमन बहाल हुआ। ​प्रदर्शन के दौरान मृतक बबीता देवी के पति रंजीत साहू ने प्रशासन को एक मांग पत्र सौंपा। इस मांग पत्र में मुख्य रूप से निम्नलिखित मांगें रखी गई हैं। ​मृतका के परिजनों को उचित सरकारी मुआवजा प्रदान किया जाए। ​गेतलातू चौक और देवी दर्शन रोड के पास (जहाँ स्कूल और कॉलेज स्थित हैं) तत्काल बड़े स्पीड ब्रेकर और ट्रैफिक लाइट की व्यवस्था की जाए। ​दुर्घटना कारित करने वाली बस (जेएच 01 एफके 8555) के मालिक और चालक पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। ​इस हृदयविदारक हादसे ने रंजीत साहू के हँसते-खेलते परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। बबीता देवी अपने पीछे चार बच्चों को छोड़ गई हैं,जिनका भविष्य अब अंधकारमय दिख रहा है। ​रीतिका कुमारी (19 वर्ष), आरटीसी स्कूल में 11वीं की छात्रा। ​कृति कुमारी (15 वर्ष), प्रेमचंद स्कूल में 10वीं की छात्रा, ​रितेश कुमार (12 वर्ष), जो मृतका प्रीति का जुड़वा भाई है और प्रेमचंद स्कूल 5वीं कक्षा का छात्र है।
​मानसी कुमारी (8 वर्ष): जो शारीरिक और मानसिक रूप से विक्षिप्त (दिव्यांग) है और पूरी तरह माँ पर निर्भर थी। ​पति रंजीत साहू,जो एक छोटी सी किराना दुकान चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं,अपनी पत्नी और लाडली बेटी को खोने के बाद पूरी तरह टूट चुके हैं। स्थानीय लोगों ने सरकार से मांग की है कि इस विशेष परिस्थिति को देखते हुए परिवार को विशेष आर्थिक पैकेज दिया जाए ताकि इन बच्चों की पढ़ाई और दिव्यांग बेटी की देखरेख सुनिश्चित हो सके।

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