Eksandeshlive Desk
काठमांडू : नेपाल सरकार द्वारा भूमिहीन लोगो की अव्यवस्थित बस्तियां हटाने की प्रक्रिया तथा बस्ती खाली करने की सूचनाओं के खिलाफ देशभर के भूमिहीन समुदाय ने सोमवार को भी कड़ा विरोध जताया है। रूपनदेही जिले के बुटवल में सोमवार की दोपहर 41 डिग्री तापमान के बीच प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन और नारेबाजी की। देश के विभिन्न हिस्सों से जुटे हजारों भूमिहीन लोगों में अधिकांश महिलाएं और बच्चे हैं, जबकि कुछ पुरुष प्रतिनिधिमूलक रूप से शामिल हुए। आरोप है कि सरकार ने वैकल्पिक व्यवस्था किए बिना सार्वजनिक जमीन संरक्षण के नाम पर “डोजर आतंक” मचाया है। इसी के विरोध में हजारों लोग सड़क पर उतरे। उन्होंने प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह सरकार से इस्तीफे की मांग करते हुए “वोट वापस करो” के नारे भी लगाए। तेज गर्मी के बीच प्रदर्शनकारियों ने बालेन सरकार मुर्दाबाद, हमारा वोट वापस करो, डोजर आतंक बंद करो, अव्यवस्थित बसोबासी को व्यवस्थित करो, रोटी और आवास की गारंटी दो, डोजर नहीं समाधान दो तथा सुकुम्बासी होना शौक नहीं, मजबूरी है.. जैसे नारे लगाए।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सरकार ने सार्वजनिक जमीन संरक्षण के नाम पर बिना वैकल्पिक व्यवस्था किए वर्षों से बसे लोगों की बस्तियों पर डोजर चलाया है, जिससे देशभर के भूमिहीन और अव्यवस्थित बसोबासी आंदोलन के लिए मजबूर हुए हैं। संघर्ष समिति रुपन्देही के संयोजक खगेंद्र पौडेल ने बताया कि नेपाल भूमिहीन संघर्ष समिति के इस प्रदर्शन में देश के विभिन्न जिलों से हजारों लोगों की भागीदारी रही। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जबरन बुलडोजर चलाया गया तो वे और सशक्त आंदोलन करेंगे। आंदोलनकारियों का कहना है कि दशकों से बसे स्थानों से उन्हें हटाना अन्यायपूर्ण है। भूमिहीन संघर्ष समिति के वीरेंद्र विश्वकर्मा ने प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह को चेतावनी देते हुए कहा कि राज्य नागरिकों से कर लेता है, मतदान कराता है, लेकिन उनके निवास को अवैध घोषित करता है, जो दोहरा व्यवहार है। उन्होंने कहा कि दशकों से बसे आम लोगों को विस्थापित कर प्रधानमंत्री गुमनाम नहीं रह सकते। हजारों लोगों की ताकत को नजरअंदाज करना महंगा पड़ सकता है। उनका दावा था कि भूमिहीन लोग भी कर चुकाने वाले, मतदान करने वाले और राज्य के प्रति दायित्व निभाने वाले वैधानिक नागरिक हैं। उन्होंने कहा कि अगर जिस जमीन पर हम रहते हैं वह अवैध है, तो हमारे वोट से बनी सरकार वैध कैसे हो सकती है? उन्होंने यह भी कहा कि राजतंत्र काल में हुकुम प्रमांगी के जरिए कई लोगों को जमीन मिली थी और अंततः देश की सारी जमीन राज्य की ही संपत्ति है। उनका कहना था कि एक ही देश में एक ही नेपाली नागरिक के साथ अलग-अलग व्यवहार नहीं किया जा सकता।
