बीआईटी मेसरा ने अपने भूस्थानिक रीसर्च नेटवर्क के विस्तार के लिए एनईएसएसी के साथ किया एमओयू

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Reporting by Sunil

रांची: बीआईटी मेसरा और भारत सरकार के अंतरिक्ष विभाग के नॉर्थ ईस्टर्न स्पेस एप्लीकेशन्स सेंटर ने बीआईटी मेसरा रांची में भू-स्थानिक प्रौद्योगिकियों, जीइओआॅलअनुसंधान, रिमोट सेंसिंग और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग को औपचारिक रूप देने के लिए एक एमओयू साईन किया है। मौके पर आॅफिस आॅफ डीआरआईई की ओर से बात करते हुए डॉ प्रवीण श्रीवास्तव ने बहु-आयामी अनुसंधान एवं इनोवेशन को बढा़वा देने के लिए संस्थागत साझेदारियों की आवश्यकता पर जोर दिया। इसके बाद डॉ राजेश जैन ने सभा को सम्बोधित करते हुए साझेदारी के प्रयोजन एवं विजन पर रोशनी डाली। इस साईन किए गए एमओयू में इंटर्नशिप, अनुसंधान का आदान-प्रदान, पाठ्यक्रम में उभरते भूस्थानिक विषयों को शामिल करना, गेस्ट फैकल्टी की भागीदारी, अनुसंधान परियोजनाएं और उच्च शिक्षा के अवसरों के प्रावधान शामिल हैं। इसके अलावा, इस समझौते के तहत ठएरअउ के वैज्ञानिक बीआईटी मेसरा के रीसर्च स्कॉलर्स का संयुक्त सुपरविजन भी करेंगे। इस समझौते के तहत, एनईएसएसी संयुक्त अनुसंधान गतिविधियों में सहायता के लिए भू-स्थानिक डेटाबेस, सैटेलाईट इमेजरी, मौसम संबंधी डेटासेट और धरती के अवलोकन तथा जीआईएस ऐप्लीकेशन्स छम्ै।ब् में तकनीकी विशेषज्ञता प्रदान करेगा। ,एन के वैज्ञानिक/इंजीनियर-एसई, निलय निशांत ने एमओयू के उद्देश्यों, परिचालन प्रावधानों और सहयोग के ढांचे पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने इस समझौते के उद्देश्यों की रूपरेखा प्रस्तुत की, जिसमें पूर्वोत्तर क्षेत्र के छात्रों के लिए शैक्षणिक पहुंच में सुधार करना, तथा भूस्थानिक अनुप्रयोगों और अनुसंधान के क्षेत्र में बीआईटी मेसरा और ठएरअउ की पूरक क्षमताओं का उपयोग करना शामिल है।वहीं बीआईटी मेसरा- संयुक्त नेशनल-इंटरनेशनल रीसर्च, आउटरीच गतिविधियों, प्रशिक्षण प्रोग्रामों तथा इंजीनियरिंग एवं रिमोट सेंसिंग डोमेन में क्षमता निर्माण में योगदान देगी। इस साझेदारी के तहत खासतौर पर धरती के प्रेक्षण के चित्रयों एवं उभरती भूस्थानिक तकनीकों पर ध्यान केन्द्रित करते हुए संयुक्त सेमिनार, कार्यशालाएं एवं प्रशिक्षण प्रोग्राम भी आयोजित किए जाएंगे।बीआईटी मेसरा, ठएरअउ के वैज्ञानिकों को गेस्ट फैकल्टी के रूप में अपने साथ जोड़ेगी। ये वैज्ञानिक और रीसर्च स्कॉॅलर बीआईटी मेसरा में पार्ट-टाईम मास्टर्स और डॉक्टोरल प्रोग्राम भी कर सकते हैं, जो संस्थान के नियमों और अप्रोग्राम का समापन डॉ एसएस सोलकी, डीन पीजी स्टडीज द्वारा समापन सम्बोधन के साथ हुआ जिसके बाद श्री निलय निशांत ने धन्यवाद ज्ञापन दिया।यह समझौता ज्ञापन पांच वर्षों के लिए प्रभावी है, जिसमें विस्तार का प्रावधान भी है। समझौते के तहत जीईअरेआॅल रीसर्च, रिमोट सेंसिंग, भूस्थानिक विशलेषण और राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं के अनुरूप बहु-आयामी अनुसंधान को शामिल किया गया है।

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