ऑप्टिज्म से बचाव करे, शुरूआत गर्भ से होती है: चंद्रशेखर थोडुपुनुरी

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रांची : रिस्प्लाइस आटिज्म रिसर्च इंस्टीट्यूट एंड फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. चंद्रशेखर थोडुपुनुरी ने कहा कि ऑप्टिज्म की शुरूआत गर्भ से ही होती है, इससे पहले कि आटिज्म आपके परिवार और बच्चे के जीवन को पंगु बना दे; एहतियाती कदम उठाएं, ऑप्टिज्म से बचाव करें। इसी को लेकर हैदराबाद स्थित रिस्प्लाइस आॅटिज्म रिसर्च इंस्टीट्यूट एंड फाउंडेशन भारत का पहला संस्थान है, जो आॅटिज्म की रोकथाम के लिए गर्भधारण पूर्व देखभाल (प्रीकॉन्सेप्शन केयर) तथा आॅटिस्टिक बच्चों में गट-ब्रेन एक्सिस पर आधारित करुणामूलक उपचार के रूप में फीकल माइक्रोबायोटा ट्रांसप्लांटेशन थेरेपी प्रदान करता है। रिस्प्लाइस आॅटिज्म रिसर्च फाउंडेशन 31 मई, 2026 को श्री भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति, तेतरटोली, बरियातू, रांची में ऑप्टिज्म रोगियों के लिए मुफ्त आंत स्वास्थ्य मूल्यांकन और माइक्रोबायोम परीक्षण शिविर का आयोजन किया जाएगा । भारत का अपनी तरह का पहला स्वास्थ्य केंद्र है, जो आॅटिज्म और अन्य न्यूरोलॉजिकल स्थितियों के प्रबंधन के लिए समग्र दृष्टिकोण प्रदान करता है। गर्भावस्था के दौरान ही आॅटिज्म की रोकथाम के उद्देश्य से रिस्प्लाइस ने आॅटिज्म प्रिवेंशन प्रोग्राम भी शुरू किया है। डॉ. चंद्रशेखर थोडुपुनुरी ने कहा कि पिछले चार-पांच दशकों में आॅटिज्म के मामलों में बढ़ोतरी गंभीर चिंता का विषय है। उभरते वैज्ञानिक तथ्यों से संकेत मिलता है कि कृषि रसायनों और फॉरएवर केमिकल्स (स्थायी कृत्रिम रसायनों) का जैव संचय ऑप्टिज्म का एक महत्वपूर्ण कारण हो सकता है। गर्भधारण की योजना बना रहे दंपत्तियों में इन रसायनों के संपर्क को कम करना और शरीर से इन्हें डिटॉक्स करना ऑप्टिज्म के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। यह प्रेस कॉन्फ्रेंस इस गंभीर जनस्वास्थ्य विषय पर जागरूक सार्वजनिक संवाद और नीतिगत स्तर पर सहभागिता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आयोजित की जा रही है। सम्मेलन का उद्देश्य प्रीकॉन्सेप्शन हेल्थ पॉलिसी पर विशेष ध्यान देते हुए रोकथाम संबंधी रणनीतियों की आवश्यकता को उजागर करना है। इस पहल के तहत फाउंडेशन ने देशभर में आॅटिज्म से ग्रस्त बच्चों के गट हेल्थ पैटर्न का अध्ययन शुरू किया है। इसके अंतर्गत मीडिया संवाद, जागरूकता शिविर, नि:शुल्क गट हेल्थ असेसमेंट और माइक्रोबायोम टेस्टिंग की जा रही है। इन पहलों से प्राप्त आंकड़े नीति-निमार्ताओं को दिशा देने और प्रमाण आधारित हस्तक्षेपों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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