फुटबॉल के मैदान की स्टार दिव्यानी माँ के अधूरे आशियाने और संघर्ष के लिए खेल रही जिंदगी की जंग

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By Mustaffa

​मेसरा (रांची): मैदान पर फुटबॉल को अपनी उंगलियों पर नचाने वाली ओरमांझी की उभरती हुई फुटबॉलर दिव्यानी लिंडा इन दिनों जिंदगी के मैदान में एक अलग ही जंग लड़ रही हैं। खेल के मैदान में विरोधियों को पस्त करने वाली इस होनहार बेटी की आंखों में इस वक्त अपनी मजदूर मां का संघर्ष और सालों से अधूरा पड़ा अंबेडकर आवास पूरा होने का दर्द तैर रहा है। हाल ही में अपने गांव लौटीं दिव्यानी बुधवार को अपने कोच सह पंचायत समिति सदस्य रश्मि तिर्की के साथ प्रखंड मुख्यालय पहुंचीं। उन्होंने अंचलाधिकारी (सीओ) उज्जवल सोरेन से मुलाकात कर अपनी मां के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार और आशियाने को पूरा कराने की गुहार लगाई। ​सीओ से मुलाकात के दौरान दिव्यानी ने अपनी पारिवारिक स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी मां प्रतिमा देवी घर चलाने के लिए हर दिन मजदूरी करने ओरमांझी से रांची जाती हैं। इतनी दूर आने-जाने में उन्हें शारीरिक और आर्थिक दोनों तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। दिव्यानी ने मांग रखी कि उनकी मां को स्थानीय स्तर पर ही मनरेगा या किसी अन्य योजना के तहत रोजगार उपलब्ध कराया जाए। इसके साथ ही उन्होंने कछुए की रफ्तार से चल रहे अंबेडकर आवास योजना की प्रगति पर भी चिंता जताई। ​मामले की गंभीरता को देखते हुए सीओ उज्जवल सोरेन ने खिलाड़ी दिव्यानी को निराश नहीं होने का भरोसा दिया। उन्होंने तुरंत मातहत अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि मकान निर्माण कार्य अब तक क्यों अधूरा है,इसकी पूरी रिपोर्ट अविलंब पेश की जाए। निर्माण में आ रही तकनीकी या प्रशासनिक बाधाओं को दूर कर आवास को जल्द से जल्द पूर्ण कराया जाएगा। साथ ही उन्होंने आश्वस्त किया कि प्रतिमा देवी को स्थानीय स्तर पर रोजगार देने के लिए भी हर संभव प्रयास किए जाएंगे। सीओ उज्जवल सोरेन ने कहा,जो खिलाड़ी मैदान पर राज्य का मान बढ़ाते हैं,उनके परिवार को बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष नहीं करना चाहिए। दिव्यानी के हौसले को टूटने नहीं दिया जाएगा। प्रशासन उसकी मां को स्थानीय स्तर पर काम देने और आवास पूरा कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

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