एक ऐसा विद्यालय जहां पढते हैं मात्र चार बच्चें

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अशोक अनन्त

सिमरिया/चतरा: प्रखंड क्षेत्र के मंझली टांड़ के उत्क्रमित मध्य विद्यालय मंझली टांड़ के विद्यालय में मात्र चार बच्चे शिक्षा पा रहे है। मात्र चार बच्चों पर दो शिक्षिका मौजूद हैं। शिक्षिका को पूछने पर बताई कि हमारे स्कूल में मात्र चार हीं बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं और मात्र चार का हीं नामांकन है। जबकि विद्यालय बहुत बड़ा है। कई कमरे हैं। जिसमें रसोइया के लिए चुनाव किया गया है और मिडमिल के लिए अध्यक्ष का चुनाव किया गया है महज चार बच्चे में। इस तरह एक शिक्षिका पर दो बच्चे पढ़ते हैं। रसोइया मात्र चार बच्चों का खाना घर बना कर खिला देती है। दूसरी ओर किसी विद्यालय में सौ से दो सौ बच्चे हैं किंतु शिक्षक के अभाव में मात्र दो या तीन शिक्षक हैं जिससे पठन पाठन का क्या हाल होगा यह भली भांति समझा जा सकता है। इस तरह कई विद्यालयों में पढ़ाई के नाम पर केवल खाना पूर्ति किया जा रहा है चुकी सरकारी विद्यालय है और मात्र गरीब के बच्चे हीं पढ़ते है।

शिक्षिका का कहना है कि हमारा विद्यालय को किसी दूसरे विद्यालय में मर्ज किया जाता तो अच्छा था। चुकी यहां गांव की आबादी नहीं है और बच्चों की संख्या नहीं है। जबकि उक्त विद्यालय पर प्रति माह लाखों का सरकारी खर्च किया जा रहा है और नतीजा सिफर है। यही अगर इस स्कूल में बच्चों की संख्या अधिक रहती तो शिक्षकों की सार्थकता सिद्ध होती है। या फिर इस स्कूल के बच्चों को किसी अन्य विद्यालय के साथ मर्ज करने से बच्चों के लिए और शिक्षकों के लिए भी लाभप्रद होता।

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