प्रतापपुर/चतरा: झारखंड में लगातार बढ़ रही गर्मी व तेज धूप ने लोगों का जनजीवन प्रभावित कर दिया है। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों को हो रही है, जिन्हें चिलचिलाती धूप में पैदल स्कूल आना-जाना पड़ रहा है। इन सब के बीच लोगों के जेहन में एक सवाल लगातार उठ रहा है कि जब पूरे देश में गर्मी का मौसम लगभग एक समान, तो फिर स्कूलों में गर्मी की छुट्टी को लेकर देश भर में विरोधाभास क्यों? ये अपनेआप में भी एक बड़ा सवाल है। बताते चलें कि राज्य भर में आवासीय विद्यालयों (जैसे -नेतरहाट, इंदिरा गांधी, जवाहर नवोदय, सैनिक आदि सरीखे विद्यालय) सहित अन्य केंद्रीय विद्यालयों में गर्मी की छुट्टी लगभग दो माह (1 मई से 30 जून) तक दी जाती है, तो फिर राज्य के सरकारी विद्यालयों सहित डीएवी, डीपीएस व अन्य निजी विद्यालयों में गर्मी की छुट्टी मात्र ढाई से तीन सप्ताह देकर औपचारिकता निभाना कितना सही है। हालांकि गर्मी बढ़ने की हालत में राज्य सरकार समय-समय पर दो या चार दिन करके छुट्टी बढ़ाने का आदेश निकालती रहती है। साथ ही जिले के डीसी के पास भी गर्मी के प्रकोप को देखते हुए स्कूलों की छुट्टी बढ़ाने का विशेषाधिकार मौजूद है, परंतु ये नाकाफी है। जब मई व जून माह में भीषण गर्मी पड़ती है तो फिर सरकारी विद्यालयों में गर्मी की छुट्टी पूरा मई का महीना निकल जाने के बाद क्यों?
इस बारे में जब चतरा बीईईओ से पूछा गया तो उनका कहना है कि छुट्टी का कलेंडर जनवरी माह में ही तैयार हो जाता है जिसके अनुसार विद्यालयों में गर्मी की छुट्टी 22 मई से शुरू हो जाएगी, जो लगभग तीन सप्ताह रहेगी। इस बीच यदि गर्मी का प्रकोप जारी रहा तो राज्य सरकार की ओर से समय समय पर आदेश निकाल कर छुट्टी को विस्तारित किया जाता है।।
मालूम हो कि चतरा सहित राज्य भर में पिछले 15 दिन से भीषण गर्मी का प्रकोप जारी है वहीं कई जिलों में तो पारा 40 से 45 डिग्री के पार पहुंच चुका है, ऐसे में स्कूलों में गर्मी की छुट्टी नहीं होना एक सवाल खड़ा करता है। चतरा की जनता डीसी सहित राज्य सरकार से गर्मी की छुट्टी को लेकर पुराने ढर्रे व परिपाटी को बदलते हुए नये सिरे से समीक्षा कर राज्य के नौनिहालों के हित में गर्मी की छुट्टी का एकरुपता प्रदर्शित करने वाला कैलेंडर पूरे राज्य में संचालित विद्यालयों के लिए जारी किए जाने की मांग करती है, ताकि राज्य में पढ़ने वाले बच्चों को डेढ़ से दो महीना मई-जून माह में गर्मी की छुट्टी दी जा सके व उन्हें राहत पहुंचाई जा सके।
