मेहनत ने बदल दी तकदीर: जिस बंजर जमीन को लोग छोड़ चुके थे, वहां हरियाली की नई दुनिया
राजेश दुबे
विष्णुगढ़/हजारीबाग : जहां कभी सूखी मिट्टी, जंगली झाड़ियां और वीरानी पसरी रहती थी, आज वहां दूर-दूर तक हरियाली मुस्कुरा रही है। विष्णुगढ़ प्रखंड के बादी खरना निवासी किसान तालेश्वर यादव ने अपनी अथक मेहनत, दृढ़ इच्छाशक्ति और सरकारी योजनाओं के सहयोग से यह साबित कर दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों तो बंजर धरती से भी खुशहाली उगाई जा सकती है। तालेश्वर यादव की कहानी आज पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। जिस जमीन को लोग अनुपयोगी और बेकार मान चुके थे, उसी जमीन को उन्होंने अपने पसीने से सींचकर उपजाऊ बना दिया। लगभग चार एकड़ परती और बंजर जमीन को लीज पर लेकर उन्होंने खेती करने का फैसला किया। शुरुआत संघर्षों से भरी थी। खेत में उगी घनी झाड़ियों और जंगली पेड़ों को साफ करने में ही उनका एक पूरा साल गुजर गया। कई लोगों ने उन्हें निराश भी किया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। साल 2024 में बिरसा सिंचाई कूप योजना के तहत कूप निर्माण और किसान समृद्धि योजना के माध्यम से अनुदान पर सोलर पंप मिलने के बाद उनकी मेहनत को नई ताकत मिली। सिंचाई की सुविधा मिलते ही सूखी पड़ी जमीन में जैसे नई जान आ गई। धीरे-धीरे खेतों में तरबूज, खीरा, बैंगन, टमाटर समेत कई सब्जियों की खेती शुरू हुई और आज वही खेत हरियाली से लहलहा रहे हैं। आज तालेश्वर यादव की खेती सिर्फ उनके परिवार की आजीविका का सहारा नहीं, बल्कि पूरे इलाके के किसानों के लिए प्रेरणा का केंद्र बन चुकी है। खेतों में उगती सब्जियां यह गवाही दे रही हैं कि किसान अगर ठान ले, तो पत्थर जैसी जमीन को भी सोना बना सकता है। तालेश्वर यादव कहते हैं कि पहले इस जमीन को देखकर कोई सोच भी नहीं सकता था कि यहां खेती संभव है। लेकिन मेहनत, धैर्य और सरकारी सहयोग ने सब कुछ बदल दिया। उन्होंने कहा कि मनरेगा योजना और सोलर पंप का लाभ मिलने के बाद उन्हें सही मायनों में किसान होने का आत्मविश्वास मिला। अब खेती से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है और भविष्य को लेकर उम्मीदें भी बढ़ी हैं। इसी दौरान योजनाओं के निरीक्षण के लिए पहुंचे विष्णुगढ़ प्रखंड विकास पदाधिकारी अखिलेश कुमार भी किसान की मेहनत देखकर भावुक हो उठे। खेतों की हरियाली और किसान की लगन की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि तालेश्वर यादव जैसे किसान यह साबित करते हैं कि मेहनत और संकल्प के आगे कोई भी मुश्किल बड़ी नहीं होती। उन्होंने इसे अन्य किसानों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बताया। विष्णुगढ़ प्रखंड में मनरेगा और बिरसा सिंचाई कूप योजना के तहत कई किसानों को लाभ मिल रहा है, लेकिन तालेश्वर यादव की कहानी इन योजनाओं की जीवंत सफलता बनकर सामने आई है। यह कहानी सिर्फ खेती की नहीं, बल्कि उस जज्बे की है जिसने बंजर जमीन पर भी उम्मीदों की फसल उगा दी। आज बादी खरना की यह हरियाली “एक संदेश” दे रही है की अगर किसान को संसाधन, सहयोग और हौसला मिले, तो वह सूखी धरती में भी जीवन की हरियाली लौटा सकता है।
