​बिरसा जैविक उद्यान में गूंजी किलकारी: भारत के सबसे बड़े जंगली गोवंशीय गौर की दूसरी पीढ़ी ने लिया जन्म

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Reporting by Mustaffa

मेसरा (रांची): भगवान बिरसा जैविक उद्यान (ओरमांझी) से वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरणविदों के लिए एक बेहद सुखद और गौरवपूर्ण खबर आई है। उद्यान में वन्यजीव संरक्षण और सफल प्रजनन के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कामयाबी हासिल हुई है। यहाँ भारत के सबसे बड़े जंगली गोवंशीय वन्यप्राणी गौर की दूसरी पीढ़ी का जन्म हुआ है। ​मिली जानकारी के अनुसार,बीते 20 मई 2026 को उद्यान में एक मादा गौर ने एक अत्यंत स्वस्थ बछिया (शावक) को जन्म दिया। फिलहाल माँ और बच्चे दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं। उद्यान के डॉक्टरों और पशुपालकों की एक विशेष टीम चौबीसों घंटे उनकी देखरेख और स्वास्थ्य की निगरानी कर रही है। उद्यान के निदेशक ने इस बड़ी सफलता की जानकारी साझा करते हुए बताया कि यह उद्यान के सफल प्रबंधन का नतीजा है। दरअसल,कुछ समय पहले इसी उद्यान में एक मादा गौर का जन्म हुआ था। समय के साथ वह पूरी तरह से विकसित हुई और अब उसी मादा गौर ने एक बछिया को जन्म दिया है। इस तरह उद्यान में गौर की दूसरी पीढ़ी ने कदम रख दिया है,जिसे वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक मील का पत्थर माना जा रहा है। गौर भारत का सबसे बड़ा जंगली गोवंशीय वन्यप्राणी माना जाता है। यह वन पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे शर्मीले और बड़े वन्यप्राणियों का कृत्रिम या सीमित दायरे में सफल प्रजनन कराना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। इसलिए वन्यजीव संरक्षण की दिशा में इसे एक बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। ​निदेशक ने बताया कि उद्यान प्रशासन वन्यप्राणियों को पूरी तरह से प्राकृतिक और उनके अनुकूल वातावरण देने के लिए प्रतिबद्ध है। उद्यान में जीवों के लिए संतुलित और पौष्टिक आहार,​चौबीस घंटे समुचित चिकित्सीय सुविधा,आधुनिक वैज्ञानिक प्रबंधन,उपलब्ध कराया जा रहा है,जिसके सकारात्मक परिणाम अब इस तरह की बड़ी खुशखबरी के रूप में सामने आ रहे हैं। गौर जैसे महत्वपूर्ण और दुर्लभ वन्यप्राणी का सफल प्रजनन पूरे उद्यान प्रबंधन के लिए गर्व और प्रसन्नता का विषय है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर उद्यान प्रबंधन ने गहरी खुशी व्यक्त की है। प्रबंधन ने इस सफलता का श्रेय दिन-रात मेहनत करने वाले डॉक्टरों,पशुपालकों और समर्पित कर्मचारियों को देते हुए उन्हें बधाई दी है। साथ ही,भविष्य में भी वन्यजीवों के संरक्षण,संवर्धन और उनकी आबादी बढ़ाने के लिए इसी तरह निरंतर और प्रतिबद्ध होकर कार्य करने का संकल्प दोहराया है।

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