Ranchi : बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान मेसरा के क्वांटिटेटिव इकोनॉमिक्स एंड डेटा साइंस विभाग ने सोमवार कोआर्टिफिशियल इंटेलिजेंस फॉर हाइपरस्पेक्ट्रल डेटा एनालिटिक्स पर संकाय विकास कार्यक्रम का उद्घाटन किया। यह कार्यक्रम भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, के सहयोग से ईएंडआईसीटी अकादमी, एनआईटी पटना के साथ मिलकर आयोजित किया गया। इस एक सप्ताह के एफडीपी के दौरान ‘हिमक्लाइमएक्स को लॉन्च किया गया, जो बीआईटी मेसरा के क्यूईडीएस के एप्लाइड डेटा साइंस लैब में हिमालयन क्लाइमेट रिसर्च इनिशिएटिव के तहत विकसित एक उन्नत क्लाइमेट इंटेलिजेंस और विजुअलाइजेशन प्लेटफॉर्म है। यह प्लेटफॉर्म हिमालयी ऊंचाई वाले क्षेत्रों के एक सदी से भी अधिक के जलवायु रिकॉर्ड को एकीकृत करता है और जलवायु प्रवृत्ति के विश्लेषण, अनोमली डिटेक्शन, स्थानिक विजुअलाइजेशन, प्रभाव मूल्यांकन और एआई-संचालित पूवार्नुमान जैसी क्षमताएं प्रदान करता है। इस प्लेटफॉर्म को नीरज के. मौर्य, नवनीत कुमार और भोला महतो की ओर से विकसित किया गया है, जो अनुसंधान-आधारित तकनीकी नवाचार के प्रति विभाग की प्रतिबद्धता को दशार्ता है।
इस उद्घाटन सत्र में इसरो अहमदाबाद के स्पेस एप्लीकेशंस सेंटर के वैज्ञानिक एसजी और डिवीजन प्रमुख डॉ. अनूप कुमार दास मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। यह कार्यक्रम बीआईटी मेसरा के कुलपति प्रोफेसर इंद्रनिल मन्ना के नेतृत्व में आयोजित किया गया। प्रोफेसर वंदना ने वैज्ञानिक, पर्यावरणीय और सामाजिक चुनौतियों से निपटने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा-संचालित पद्धतियों की बढ़ती भूमिका के बारे में बात की। इसके बाद डॉ. मनीष के. पांडे ने एआई-हायडा 2026 का अवलोकन प्रस्तुत किया, जिसमें इसके उद्देश्यों, विषयगत फोकस और हाइपरस्पेक्ट्रल डेटा एनालिटिक्स में क्षमता निर्माण के अवसरों को रेखांकित किया गया।
अपने मुख्य भाषण में डॉ. अनूप कुमार दास ने अर्थ आॅब्जर्वेशन और जियोस्पेशियल एनालिटिक्स में उभरते विकास पर बात की, जिसमें नासा और इसरो द्वारा संयुक्त रूप से विकसित पृथ्वी अवलोकन मिशन ‘निसार’ पर विशेष जोर दिया गया। उन्होंने उल्लेख किया कि इस मिशन की उन्नत रडार इमेजिंग क्षमताएं ग्लेशियरों, जंगलों, कृषि प्रणालियों, पारिस्थितिक तंत्रों और प्राकृतिक खतरों की उच्च-रिजॉल्यूशन निगरानी का समर्थन करेंगी। वही आईआईटी रुड़की के प्रोफेसर पी. के. गर्ग ने हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग, इसके अनुप्रयोगों, अवसरों और उभरती चुनौतियों पर एक व्यावहारिक व्याख्यान दिया। बीआईटी मेसरा के भौतिकी विभाग के डॉ. दिलीप के. सिंह ने विद्युत चुंबकीय स्पेक्ट्रम और सेंसर प्रौद्योगिकियों पर एक सत्र आयोजित किया, जिससे प्रतिभागियों को रिमोट सेंसिंग और डेटा अधिग्रहण प्रणालियों में एक मजबूत वैचारिक आधार मिला।
