Eksandeshlive Desk
पश्चिमी सिंहभूम: कोरोना संक्रमण के दौरान इलाज पर हुए खर्च का बीमा दावा खारिज करना बजाज एलियांज जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को महंगा पड़ गया। पश्चिमी सिंहभूम जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, चाईबासा ने सीसी केस संख्या 08/2025 में शिकायतकर्ता रंजिता पॉल के पक्ष में फैसला सुनाते हुए बीमा कंपनी को कुल 7.10 लाख रुपये भुगतान करने का आदेश दिया है। इसमें छह लाख रुपये बीमा दावा राशि, एक लाख रुपये मानसिक प्रताड़ना एवं उत्पीड़न और 10 हजार रुपये मुकदमा खर्च शामिल है। मामला चाईबासा के बंधपाड़ा निवासी रंजिता पॉल से जुड़ा है। उन्होंने बजाज एलियांज की स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी ली थी। अप्रैल 2021 में कोरोना संक्रमित होने के बाद उन्हें सांस लेने में गंभीर परेशानी हुई। 18 अप्रैल को उन्हें कोलकाता के गुड समैरिटन अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां एक मई तक इलाज चला। इसके बाद दो मई से पांच मई तक रेपोस क्लिनिक एंड रिसर्च सेंटर में उनका उपचार हुआ। इलाज, दवा और अन्य चिकित्सा खर्च के रूप में उन्होंने कुल 6,34,530 रुपये खर्च किए थे।
बीमा कंपनी ने जांच के बाद 12 मई 2022 को उनका दावा खारिज कर दिया। कंपनी की ओर से अस्पताल द्वारा जांच में सहयोग नहीं करने, इलाज से जुड़ी कथित विसंगतियों, चिकित्सक से संबंधित जानकारी, इन-हाउस फार्मेसी तथा बिल और पर्चियों की उपलब्धता को लेकर आपत्तियां उठाई गई थीं। मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने कहा कि बीमा कंपनी की जांच रिपोर्ट को अकेले किसी दावे को फर्जी या अपात्र साबित करने का निर्णायक आधार नहीं माना जा सकता। इसके लिए उपलब्ध अन्य साक्ष्यों का भी मूल्यांकन जरूरी है। आयोग ने पाया कि शिकायतकर्ता ने अस्पताल के बिल, भुगतान रसीद, चिकित्सा दस्तावेज और दवाओं से संबंधित रसीदें प्रस्तुत की थीं। आयोग ने यह भी पाया कि बीमा कंपनी ऐसा कोई स्वतंत्र चिकित्सकीय विशेषज्ञ साक्ष्य पेश नहीं कर सकी, जिससे यह साबित हो सके कि शिकायतकर्ता का इलाज फर्जी, अनावश्यक या कोरोना संक्रमण से असंबंधित था। आयोग के अनुसार, यदि कंपनी को किसी विशेष खर्च पर आपत्ति थी तो उसे पूरे दावे को खारिज करने के बजाय अलग-अलग मदों की जांच करनी चाहिए थी और केवल अपात्र राशि को अस्वीकार करना चाहिए था। आयोग ने स्पष्ट किया कि सिर्फ संदेह या अधूरी जांच के आधार पर पूरे बीमा दावे को खारिज करना उचित नहीं है। बीमा दावा खारिज करने के लिए कंपनी को पॉलिसी की किसी विशिष्ट शर्त या अपवर्जन का ठोस आधार और विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत करना आवश्यक है। मामले में शिकायतकर्ता की ओर से अधिवक्ता प्रणब कुमार दरिपा और श्वेता पुरोहित ने पक्ष रखा। वहीं, केनरा बैंक की चाईबासा शाखा के खिलाफ सेवा में कमी का पर्याप्त प्रमाण नहीं मिलने पर आयोग ने बैंक के विरुद्ध शिकायत खारिज कर दी। आयोग ने बजाज एलियांज को 45 दिनों के भीतर निर्धारित राशि का भुगतान करने का आदेश दिया है। निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं करने पर कंपनी को नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
