केरल के वायनाड में सुरंग परियोजना में भूस्खलन, 3 मजदूरों की मौत, कई अन्य के दबे होने की आशंका

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Eksandeshlive Desk

वायनाड : केरल के वायनाड जिले के कल्लाडी क्षेत्र में निर्माणाधीन ट्विन-टनल परियोजना स्थल पर मंगलवार को हुए भीषण भूस्खलन में कम-से-कम तीन मजदूरों की मौत हो गई, जबकि 9 अन्य घायल हो गए। अधिकारियों को आशंका है कि कई मजदूर अब भी मलबे के नीचे फंसे हो सकते हैं। घटना के बाद राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), अग्निशमन एवं बचाव सेवा, पुलिस तथा जिला प्रशासन की संयुक्त टीमों ने युद्धस्तर पर राहत एवं बचाव अभियान शुरू कर दिया है। राहत दल ने अबतक 9 घायल मजदूरों को सुरक्षित निकाल कर अस्पताल पहुंचाया है। घायलों की पहचान हिरन कुमार, दिलीप, सूरज यादव, संजय टापुर, रजनीश, तन्मय घोष, कुडम्मल, संतोष और कुंजू के रूप में हुई है। सभी का उपचार बीम्स अस्पताल में चल रहा है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार घायलों की स्थिति फिलहाल स्थिर है।

अधिकारियों के अनुसार, क्षेत्र में पिछले कई दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश के कारण परियोजना स्थल के समीप मिट्टी और चट्टानों का बड़ा हिस्सा अचानक ढह गया। हादसे के समय सुरंग निर्माण परियोजना में कंक्रीट का कार्य चल रहा था। इसी दौरान रिटेनिंग वॉल तथा खुदाई की गई मिट्टी का हिस्सा धंस गया, जिसके बाद पहाड़ी ढलान से भारी मात्रा में मिट्टी, चट्टान और कीचड़ तेजी से नीचे आ गया। देखते-ही-देखते निर्माण स्थल का एक बड़ा हिस्सा मलबे में दब गया और वहां कार्यरत मजदूरों को संभलने का अवसर तक नहीं मिला। जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र (डीईओसी) के अनुसार, राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। हालांकि भारी मात्रा में जमा मलबा, लगातार हो रही बारिश और फिसलन भरे हालात बचाव कार्य में बड़ी चुनौती बने हुए हैं। प्रशासन यह पता लगाने का प्रयास कर रहा है कि मलबे के नीचे कितने मजदूर और कर्मचारी फंसे हुए हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, निर्माण स्थल के समीप स्थित मजदूरों के अस्थायी शिविर और कुछ वाहन भी भूस्खलन की चपेट में आ गए हैं। प्रशासन ने बताया कि पिछले 24 घंटों में क्षेत्र में लगभग 265 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जिससे पहाड़ी क्षेत्र की मिट्टी पूरी तरह जलसंतृप्त (वॉटर सैचुरेटेड) होकर अस्थिर हो गई। एहतियात के तौर पर रविवार से निर्माण कार्य रोक दिया गया था लेकिन परियोजना स्थल पर मौजूद कई मजदूर और अन्य कर्मचारी हादसे की चपेट में आ गए। केरल राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (केएसडीएमए) के अनुसार, सुरंग निर्माण के दौरान निकाली गई मिट्टी का बड़ा हिस्सा लगातार वर्षा के कारण नीचे की ओर खिसक गया। इससे संपर्क मार्ग अवरुद्ध हो गए और अस्थायी कार्यस्थल तथा निर्माण उपकरण भी मलबे में दब गए। घटनास्थल पर भारी मात्रा में कीचड़ और चट्टानों के कारण राहत कार्य प्रभावित हो रहा है। बचाव दल आधुनिक खोज एवं बचाव उपकरणों तथा जेसीबी जैसी भारी मशीनों की सहायता से मलबा हटाकर फंसे लोगों तक पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं।

घटना की गंभीरता को देखते हुए कोझिकोड और वायनाड से एनडीआरएफ की अतिरिक्त टीमें, अग्निशमन एवं बचाव सेवा, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग तथा जिला प्रशासन के अधिकारी घटनास्थल पर तैनात हैं। प्रशासन ने आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है और अनावश्यक आवाजाही पर रोक लगा दी है, ताकि राहत एवं बचाव अभियान बिना किसी बाधा के जारी रखा जा सके। राज्य सरकार ने घटना के बाद स्थिति की समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय बैठक बुलाई है। संबंधित मंत्रियों को तत्काल घटनास्थल पहुंच कर राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी करने तथा घायलों के समुचित उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। जिला कलेक्टर भी मौके पर पहुंच कर अभियान की निगरानी कर रहे हैं, जबकि राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारियों को राहत कार्यों के समन्वय की जिम्मेदारी सौंपी गई है। घटनास्थल का दौरा करने के बाद प्रभारी मंत्री टी. सिद्दिकी ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह हादसा सुरंग परियोजना में कथित अवैज्ञानिक निर्माण पद्धति का परिणाम हो सकता है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना, घायलों का समुचित उपचार सुनिश्चित करना और राहत अभियान को तेजी से आगे बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि बचाव अभियान पूरा होने के बाद दुर्घटना के कारणों की विस्तृत जांच कराई जाएगी और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित पक्षों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। लगातार हो रही बारिश, अस्थिर पहाड़ी ढलानों और दोबारा भूस्खलन की आशंका के बीच राहत एवं बचाव दल संघर्ष करते हुए अभियान चला रहे हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जब तक सभी संभावित रूप से फंसे लोगों का पता नहीं चल जाता, तब तक खोज एवं बचाव अभियान लगातार जारी रहेगा।

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