सिमड़ेगा/जलडेगा। प्रखंड क्षेत्र में झुंड से बिछड़े जंगली हाथी का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। पहले टांगिया गांव के बर टोली में हाथी ने देर रात पहुंचकर रोयन तोपनो के मकान को क्षतिग्रस्त कर दिया था। अब कोनमेरला पंचायत के सातकोठा पर्यटन स्थल से सटे खरवागढ़ा जंगल में हाथी के हमले से अलग-अलग घटनाओं में दो ग्रामीणों की मौत हो गई। लगातार हो रही घटनाओं से ग्रामीणों में दहशत के साथ-साथ वन विभाग के प्रति आक्रोश भी बढ़ गया है। जानकारी के अनुसार, शनिवार सुबह ग्रामीणों ने जंगल में हाथी की मौजूदगी की सूचना वन विभाग को दी थी। ग्रामीणों का आरोप है कि सूचना के बावजूद समय पर हाथी को खदेड़ने के लिए टीम नहीं पहुंची। शनिवार शाम करीब 3:30 बजे भुडुंपानी निवासी नोवेल बरला, पिता स्व. सामुएल बरला, जंगल में हाथी के सामने आ गए। हाथी ने उन पर हमला कर दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। परिजन देर रात शव को गांव ले आए।इधर, खरवागढ़ा निवासी अकालु प्रधान शनिवार से लापता थे। रविवार सुबह जंगल से सटे एक खेत में उनका शव मिलने के बाद इलाके में सनसनी फैल गई। दोनों घटनाओं के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया। दो ग्रामीणों की मौत से आक्रोशित ग्रामीणों ने विधायक प्रतिनिधि अर्जुन होरो के नेतृत्व में रविवार सुबह करीब 6 बजे गांगुटोली लाडो चौक पर जलडेगा-गांगुटोली-कोलेबिरा मुख्य मार्ग को जाम कर दिया। सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई और आवागमन पूरी तरह ठप हो गया।ग्रामीणों ने मृतकों के आश्रितों को 10-10 लाख रुपये मुआवजा, सरकारी नौकरी तथा हाथी को क्षेत्र से सुरक्षित बाहर निकालने की मांग रखी। करीब 11 बजे बीडीओ डॉ. प्रवीण कुमार, थाना प्रभारी सकलदेव महतो, मुखिया अनिमा तोपनो तथा वन विभाग के प्रतिनिधि हेमंत कुमार मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों के साथ वार्ता कर विभागीय प्रावधानों के तहत दोनों परिवारों को 10-10 लाख रुपये मुआवजा देने तथा हाथी को क्षेत्र से बाहर खदेड़ने की कार्रवाई का आश्वासन दिया।
वन विभाग की ओर से तत्काल दोनों पीड़ित परिवारों को 10-10 हजार रुपये अंत्येष्टि सहायता दी गई। अधिकारियों ने बताया कि पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद नियमानुसार शेष मुआवजा राशि जारी की जाएगी। आश्वासन मिलने के बाद करीब पांच घंटे बाद ग्रामीणों ने सड़क जाम समाप्त किया।
बताया जा रहा है कि यही हाथी क्षेत्र में लगातार उत्पात मचा रहा है। इससे पहले टांगिया गांव के बर टोली में देर रात पहुंचे हाथी ने रोयन तोपनो के मकान को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया था। हाथी ने घर में रखा सामान भी तहस-नहस कर दिया था।वहीं, बड़कीटांगर गांव में भी हाथी ने अमर सिंह के घर को नुकसान पहुंचाया और वहां रखा महुआ खा गया। लगातार अलग-अलग गांवों में हाथी की मौजूदगी से ग्रामीणों में भय का माहौल है।
वन विभाग ने ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए डीजल और जूट के बोरे उपलब्ध कराए हैं तथा जंगल की ओर नहीं जाने और हाथी से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील की है। हालांकि, ग्रामीणों की मांग है कि हाथी को जल्द से जल्द आबादी वाले क्षेत्र से दूर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जाए, ताकि आगे किसी अनहोनी को रोका जा सके।
दो ग्रामीणों की मौत और लगातार मकानों को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं ने वन विभाग की तैयारियों और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब ग्रामीणों की निगाहें प्रशासन और वन विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं
