एनयूएसआरएल में जेंडर एंड लीगल जस्टिस पर दो दिवसीय राज्य स्तरीय परामर्श शुरू

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रांची : नेशनल यूनिवर्सिटी आॅफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ रांची में सेंटर फॉर सोशल जस्टिस की ओर द अल्टरनेट स्पेस के सहयोग से जेंडर एंड लीगल जस्टिस विषय पर दो दिवसीय राज्य स्तरीय परामर्श का आयोजन किया जा रहा है। इस परामर्श में कानून विशेषज्ञों, नीति निमार्ताओं, शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकतार्ओं, गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों तथा नागरिक समाज के सदस्यों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य लैंगिक न्याय से जुड़े मुद्दों, कानूनी अधिकारों और न्याय तक प्रभावी पहुंच से संबंधित चुनौतियों पर व्यापक विचार-विमर्श करना है।कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग की निदेशक किरण कुमारी पासी, आईएएस, मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। द अल्टरनेट स्पेस की निदेशक खदीजा फारूकी विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुईं। इस अवसर पर एनयूएसआरएल के कुलपति प्रो. (डॉ.) अशोक आर. पाटिल, रजिस्ट्रार प्रो. (डॉ.) धर्मेंद्र कुमार तथा सहायक प्रोफेसर एवं कार्यक्रम समन्वयक डॉ. जूलियन सील पसारी भी मंच पर उपस्थित रहे। उद्घाटन सत्र में स्वागत भाषण देते हुए एनयूएसआरएल के कुलपति प्रो. (डॉ.) अशोक आर. पाटिल ने कहा कि विश्वविद्यालय ऐसे सार्थक मंच तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है, जहां कानून, समाज और न्याय से जुड़े प्रश्नों पर गंभीर एवं रचनात्मक संवाद हो सके। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के विभिन्न केंद्र और समितियां झारखंड में कानूनी जागरूकता और सामाजिक न्याय से जुड़े विषयों पर निरंतर कार्य कर रहे हैं। मुख्य अतिथि किरण कुमारी पासी, आईएएस ने अपने विशेष संबोधन में महिलाओं के अधिकार, कानूनी सशक्तीकरण, बदलती सामाजिक सोच तथा महिलाओं के सामने मौजूद चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में अपने कार्य अनुभवों का उल्लेख करते हुए कहा कि सामाजिक बदलाव के बावजूद कई क्षेत्रों में महिलाओं को आज भी असुरक्षा, सामाजिक दबाव तथा शारीरिक और मानसिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। पासी ने कहा, ह्ललैंगिक न्याय के प्रश्न केवल अकादमिक या कानूनी बहस तक सीमित नहीं रह सकते; उन्हें जवाबदेह संस्थानों, प्रभावी सार्वजनिक नीति और न्याय तक सार्थक पहुंच में परिवर्तित होना चाहिए।ह्व उन्होंने कहा कि दो दिवसीय परामर्श के दौरान सामने आने वाले मुद्दों और समस्याओं के समाधान की दिशा में प्रयास किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि परामर्श से निकलने वाले निष्कर्षों पर आगे भी ध्यान दिया जाएगा। दो दिवसीय परामर्श का उद्देश्य औपचारिक कानूनी समानता और लैंगिक न्याय की वास्तविक सामाजिक स्थिति के बीच मौजूद अंतर को समझना तथा उसके समाधान के लिए संभावित रास्तों पर विचार करना है। इस दौरान न्यायविदों, नीति निमार्ताओं, शिक्षाविदों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों के बीच न्याय तक सार्थक पहुंच, कानूनी संस्थानों में विभिन्न वर्गों की आवाज और कानून तथा सामाजिक वास्तविकताओं के बीच की खाई जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की जा रही है।कार्यक्रम के माध्यम से कानूनी शिक्षा, सार्वजनिक संस्थानों और नागरिक समाज के बीच सहयोग को मजबूत करने तथा लैंगिक न्याय के क्षेत्र में नए संवाद और सहयोग की संभावनाओं को विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।

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