Eksandeshlive Desk
धनबाद: जिले के टुंडी प्रखंड के गुलियाडीह गांव में हाथी के हमले में पारा शिक्षक ग्रीजा मुर्मू की मौत के बाद ग्रामीणों का आक्रोश सामने आया। मंगलवार तड़के करीब 3 बजे गिरिजा मुर्मू (51) को हाथियों ने कुचल दिया, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई। घटना के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग के खिलाफ नाराजगी जताते हुए शव उठाने से इनकार कर दिया था। ग्रामीणों की मांग थी कि डीएफओ मौके पर पहुंचे और मृतक के परिजनों को मुआवजा देने के साथ हाथियों से सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाया जाए। इसके बाद डीएफओ विकास पालीवाल मौके पर पहुंचे, जहां उन्होंने ग्रामीणों के आक्रोश का सामना करना पड़ा। इसके बाद ग्रामीणों के साथ घंटों बैठक कर उन्होंने उनकी समस्याएं सुनीं।
बैठक के बाद मृतक के परिजनों को कुल 10 लाख रुपये मुआवजा और एक नियोजन देने पर सहमति बनी। इसमें एक लाख रुपये नगद, आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से चार लाख रुपये और वन विभाग की ओर से पांच लाख रुपये शामिल हैं। वहीं डीएफओ विकास पालीवाल ने बताया कि पिछले करीब 15 दिनों से हाथियों का झुंड टुंडी इलाके में भ्रमण कर रहा है, जिस पर वन विभाग की क्यूआरटी टीम लगातार नजर बनाए हुए है। उन्होंने कहा कि हर वर्ष हाथियों का झुंड इस इलाके में आता है और फिर वापस चला जाता है। फिलहाल खेती का सीजन होने के कारण हाथियों का रुख खेतों की ओर ज्यादा है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि हाथी दिखाई देने पर उसके करीब न जाएं और इसकी सूचना तत्काल वन विभाग को दें। साथ ही उन्होंने कहा कि घर या फसल को नुकसान होने की स्थिति में वन विभाग की ओर से नियमानुसार मुआवजा दिया जाता है।डीएफओ के आश्वासन और बैठक में मुआवजे और नियोजन पर सहमति बनने के बाद ग्रामीण शांत हुए। हालांकि, पारा शिक्षक की मौत ने टुंडी क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे हाथियों के खतरे और मानव-हाथी संघर्ष को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
