रक्षा मंत्री ने कहा, एयरोस्पेस में आत्मनिर्भरता को स्वदेशी एयरो-इंजन क्षमता तक बढ़ाना होगा
Eksandeshlive Desk
नई दिल्ली: हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) की कोरापुट डिवीजन ने मंगलवार को 2,000वें एयरो इंजन की डिलीवरी की। इसी मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शक्ति इंजन के लिए दूसरी प्रोडक्शन लाइन शुरू करने की घोषणा की। इसे भारत की एयरोस्पेस यात्रा में बड़ी उपलब्धि बताते हुए उन्होंने एडवांस्ड एयरो इंजन के डिजाइन, डेवलपमेंट, टेस्टिंग, मैन्युफैक्चरिंग और मेंटेनेंस में स्वदेशी क्षमताओं को मजबूत करने की अपील की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एयरोस्पेस और डिफेंस सेक्टर में आत्मनिर्भरता के लिए प्रोपल्शन टेक्नोलॉजी में महारत हासिल करना जरूरी है। एचएएल कोरापुट के इंजीनियरों, टेक्नीशियन, साइंटिस्ट और स्किल्ड वर्कफोर्स को बधाई देते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि 2,000 इंजनों की डिलीवरी डिफेंस फोर्सेज की ऑपरेशनल कैपेबिलिटी में 2,000 अहम योगदान है।
रक्षा मंत्री ने मिलिट्री एविएशन में एचएएल कोरापुट के योगदान पर रोशनी डालते हुए कहा कि इसके इंजनों ने मिग-21, मिग-27, मिग-29 और सुखोई-30एमकेआई जैसे फ्रंटलाइन एयरक्राफ्ट को पावर दी है। उन्होंने एचएएल कोरापुट की स्वदेशी रिपेयर और ओवरहॉल कैपेबिलिटी की तारीफ की, जिसमें अब तक 9,000 से ज्यादा इंजनों की ओवरहालिंग की गई है। उन्होंने कहा कि कंपोनेंट्स का स्वदेशीकरण और कम टर्नअराउंड टाइम ऑपरेशनल रेडीनेस और जरूरी डिफेंस एसेट्स की सर्विस लाइफ बढ़ाने में योगदान दे रहा है। रक्षा मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि एयरोस्पेस में आत्मनिर्भरता को स्वदेशी एयरो-इंजन क्षमता तक बढ़ाना होगा, खासकर एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एएमसीए) प्रोग्राम के लिए। उन्होंने लगभग 5,000 करोड़ रुपये के प्रस्तावित इन्वेस्टमेंट, मिश्र धातु निगम लिमिटेड के साथ पार्टनरशिप में कच्चे माल का स्वदेशीकरण और भारत की पहली स्वदेशी हाई-थ्रस्ट इंजन टेस्टिंग फैसिलिटी की स्थापना पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि एक सॉवरेन एयरोस्पेस इकोसिस्टम के लिए मटीरियल, डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग, टेस्टिंग और मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल में स्वदेशी क्षमताओं की जरूरत होती है। उन्होंने 218 करोड़ रुपये के इन्वेस्टमेंट से दूसरी शक्ति इंजन प्रोडक्शन लाइन की भी घोषणा की। नई लाइन हर साल 100 इंजन तक बनाएगी और 2028-29 तक पूरी तरह से तैयार हो जाएगी, जो ध्रुव एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर और प्रचंड लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर जैसे देसी हेलीकॉप्टरों के लिए होगी। भारत के हेलीकॉप्टर इकोसिस्टम के लिए भरोसेमंद देसी प्रोपल्शन की जरूरत पर जोर देते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि डिफेंस फोर्सेज को ऐसे इंजन चाहिए, जो जरूरत पड़ने पर उपलब्ध हों। एयरो-इंजन डेवलपमेंट एक लंबे समय का काम है, जिसके लिए लगातार इन्वेस्टमेंट, खास टेस्टिंग, स्किल्ड मैनपावर और एक मजबूत इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम की जरूरत होती है।
