रांची: पारस एचईसी हॉस्पिटल, रांची में अब उन्नत एआई आधारित रोबोट्रिक्स प्लस तकनीक की मदद से पर्सनलाइज्ड टोटल नी रिप्लेसमेंट (टीकेआर) किया जा रहा है। इस तकनीक का इस्तेमाल कंसल्टेंट ऑर्थोपेडिक एवं जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जन डॉ विवेक कुमार डेविड कर रहे हैं। अस्पताल में यह सिस्टम आने के बाद पिछले एक महीने में इसकी सहायता से सात घुटना प्रत्यारोपण सर्जरी की जा चुकी हैं।रोबोट्रिक्स प्लस मरीज की शारीरिक संरचना और घुटने के प्राकृतिक एलाइनमेंट को ध्यान में रखते हुए इम्प्लांट की स्थिति एवं एलाइनमेंट की योजना बनाने में सर्जन की सहायता करता है। सिस्टम प्री-ऑपरेटिव प्लानिंग, सर्जरी के दौरान गाइडेंस और पोस्ट-ऑपरेटिव वैलिडेशन के तीनों चरणों में आवश्यक माप एवं जानकारी उपलब्ध कराता है।डॉ डेविड ने कहा कि हर व्यक्ति के घुटने की बनावट अलग होती है। रोबोट्रिक्स प्लस मरीज की प्राकृतिक शारीरिक संरचना को बेहतर तरीके से समझकर उसी के अनुरूप घुटना प्रत्यारोपण की योजना बनाने में सहायता करता है। शुरुआती सात मामलों में अनुभव उत्साहजनक रहा है।उन्होंने कहा कि रोबोट्रिक्स प्लस सर्जन का स्थान नहीं लेता, बल्कि एआई आधारित उन्नत प्लानिंग एवं गाइडेंस सिस्टम के रूप में काम करता है। सर्जरी से जुड़े अंतिम निर्णय सर्जन ही लेते हैं। इस तकनीक के जरिए झारखंड के मरीजों को आधुनिक और पर्सनलाइज्ड घुटना प्रत्यारोपण की सुविधा रांची में ही उपलब्ध हो सकेगी।पारस एचईसी हॉस्पिटल के फैसिलिटी डायरेक्टर डॉ नीतेश कुमार ने कहा कि रोबोट्रिक्स प्लस जैसी उन्नत एआई आधारित तकनीक की शुरुआत से घुटना प्रत्यारोपण के क्षेत्र में मरीजों को अधिक व्यक्तिगत और आधुनिक उपचार उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। हमारा प्रयास है कि झारखंड के मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए दूसरे शहरों का रुख न करना पड़े। इस तकनीक के माध्यम से सर्जनों को अधिक सटीक प्लानिंग और सर्जरी के दौरान बेहतर गाइडेंस मिलती है। पारस एचईसी हॉस्पिटल भविष्य में भी आधुनिक चिकित्सा तकनीकों को अपनाकर मरीजों को गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
