रांची: नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ (एनयूएसआरएल) रांची के 64 विद्यार्थियों ने मंगलवार को रातू प्रखंड के चितरकोटा गांव का क्षेत्रीय दौरा किया। डॉ. जे. के. पटनायक के मार्गदर्शन में यह दौरा ग्रामीण जीवन, सामाजिक परिस्थितियों और सरकारी योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन को समझने के लिए किया गया।छात्रों को पंचायत व्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और कल्याणकारी योजनाओं पर शोध कार्य सौंपा गया। उन्होंने ग्रामीण परिवारों, मुखिया, पारंपरिक ग्राम प्रमुखों, आशा कार्यकर्ताओं और वार्ड सदस्यों से साक्षात्कार, केस स्टडी और प्रत्यक्ष अवलोकन के जरिए जानकारी जुटाई।चितरकोटा गांव पाली पंचायत के अंतर्गत आता है और अनुसूचित क्षेत्र में स्थित है, जहां ढएरअ अधिनियम 1996 लागू है। अध्ययन में पाया गया कि अधिकतर परिवार कृषि और वन-आधारित आजीविका पर निर्भर हैं। रोजगार की कमी से युवाओं का पलायन, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी प्रमुख समस्याएं हैं।आंगनबाड़ी केंद्र पर पोषण सेवाओं और मध्याह्न भोजन योजना का जायजा लिया गया। मुखिया और पारंपरिक प्रमुखों से चर्चा में पंचायती राज और पारंपरिक नेतृत्व के सह-अस्तित्व को समझा। ग्रामीणों ने बताया कि कई योजनाओं का लाभ पहुंचा है, पर जागरूकता की कमी और प्रक्रियागत देरी से दिक्कतें आती हैं।डॉ. पटनायक ने कहा कि ऐसे क्षेत्रीय अध्ययन कानून और समाज के संबंध को समझने में मदद करते हैं। एकत्र तथ्यों से क्षेत्रीय रिपोर्ट तैयार कर अधिकारियों को सौंपी जाएगी। अंत में छात्रों ने जागरूकता बढ़ाने, योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने, ग्राम सभा में भागीदारी और युवाओं के लिए शिक्षा के अवसर बढ़ाने के सुझाव दिए।
