सिमडेगा। वनवासी कल्याण केंद्र झारखंड के शैक्षिक इकाई श्रीहरि वनवासी विकास समिति झारखंड की ओर से संचालित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, सलडेगा में शिक्षण को अधिक सरल, सहज, प्रभावशाली व रुचिकर बनाने के उद्देश्य से टीएलएम मेले का भव्य आयोजन बुधवार को किया गया। मेले में विद्यालय के आचार्य-आचार्याओं ने अपनी सृजनात्मक प्रतिभा, कलात्मक कौशल व शैक्षणिक दक्षता का परिचय देते हुए आकर्षक व उपयोगी शिक्षण-अधिगम सामग्री का निर्माण कर उसका प्रदर्शन किया। रंग-बिरंगी, सुंदर व ज्ञानवर्धक सामग्रियों से सुसज्जित इस मेले ने विद्यालय परिसर को ज्ञान, नवाचार व रचनात्मकता के जीवंत केंद्र में परिवर्तित कर दिया। टीएलएम मेले का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना व कठिन विषयों को सरल उदाहरणों व आकर्षक शिक्षण-सामग्रियों के माध्यम से सहजता से समझाने की विधियों को प्रोत्साहित करना था। मेले में आचार्य-आचायार्ओं ने अपनी कल्पनाशीलता व कौशल का परिचय देते हुए यह दशार्या कि उपयुक्त शिक्षण-सामग्री के प्रयोग से पढ़ाई को न केवल सरल, बल्कि आनंददायक व प्रभावशाली भी बनाया जा सकता है। कार्यक्रम में अतिथि के रूप में विद्यालय प्रबंधन समिति के उपाध्यक्ष विद्या बड़ाईक, वनवासी कल्याण केंद्र की नगर समिति के अध्यक्ष सूर्यनारायण साहू, सचिव रवि वर्मा व चिकित्सा प्रमुख अनिरुद्ध सिंह उपस्थित रहे। विद्यालय के प्रधानाचार्य जितेंद्र कुमार पाठक ने अतिथियों का परिचय कराया व टीएलएम मेले के निरीक्षण के दौरान उनका मार्गदर्शन किया। निरीक्षण के क्रम में अतिथियों ने आचार्य-आचार्याओं के निर्मित शिक्षण-सामग्रियों का अवलोकन किया व उनकी रचनात्मकता, परिश्रम व शिक्षण के प्रति समर्पण को देखा। प्रत्येक शिक्षण-सामग्री अपने आप में एक नवीन विचार व प्रभावी शिक्षण-पद्धति का उदाहरण प्रस्तुत कर रही थी। मेले ने यह संदेश दिया कि एक कुशल शिक्षक अपनी कल्पनाशीलता, नवाचार व उपलब्ध संसाधनों के सदुपयोग से शिक्षा को अधिक जीवंत व परिणामोन्मुख बना सकता है। टीएलएम मेले का आकर्षण केवल शिक्षण-सामग्रियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भैया-बहनों की उत्सुकता व सक्रिय सहभागिता ने भी कार्यक्रम को विशेष बना दिया। बच्चों ने विभिन्न मॉडलों व शिक्षण-सामग्रियों को बड़े कौतूहल से देखा, उनके कार्य करने के तरीके को समझने का प्रयास किया व उनसे संबंधित अनेक प्रश्न पूछे। उनकी जिज्ञासा, उत्साह व सीखने की ललक ने मेले के शैक्षणिक उद्देश्य को सार्थकता प्रदान की। इस प्रकार विद्यार्थियों को देखकर, समझकर, प्रश्न पूछकर व अनुभव प्राप्त करके सीखने का अवसर मिला। विद्यालय के सभी आचार्य-आचार्याओं ने अपनी प्रतिभा, कौशल व रचनात्मक सोच के माध्यम से टीएलएम मेले को सफल व ज्ञानवर्धक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस आयोजन ने शिक्षण की पारंपरिक पद्धतियों के साथ नवाचार का सुंदर समन्वय प्रस्तुत किया व यह स्पष्ट किया कि जब शिक्षा में कल्पनाशीलता, प्रयोगशीलता व रोचकता का समावेश होता है, तब सीखना बोझ नहीं, बल्कि आनंददायक अनुभव बन जा
