न्यूजीलैंड के खिलाफ अंतिम दो वनडे के लिए चयन; घरेलू क्रिकेट और इंडिया ए में लगातार प्रदर्शन का मिला इनाम
Ranjeet Kumar
रांची: घरेलू क्रिकेट में रनों की चमक और मिले अवसरों को उपलब्धि में बदलने का जज्बा झारखंड के विकेटकीपर बल्लेबाज कुमार कुशाग्र को भारतीय टीम तक ले आया है। न्यूजीलैंड दौरे के चौथे और पांचवें वनडे के लिए उन्हें पहली बार भारत की सीनियर टीम में चुना गया है। उनके चयन से झारखंड के क्रिकेट प्रेमियों में खुशी है और राज्य के युवा खिलाड़ियों को आगे बढ़ने की नई प्रेरणा मिली है। कुशाग्र का यह मुकाम लंबे अभ्यास, धैर्य और अपने प्रदर्शन में निरंतरता लाने की कोशिशों का परिणाम है। बोकारो के मैदानों से शुरू हुआ उनका सफर आयु वर्ग के क्रिकेट से होते हुए झारखंड की सीनियर टीम और फिर इंडिया ए तक पहुंचा। इस दौरान चुनौती प्रतिभा दिखाने के साथ उसे लगातार बड़ी पारियों में बदलने की भी रही। झारखंड के कोच रतन कुमार के अनुसार, कुशाग्र की क्षमता को तीनों प्रारूपों में नियमित रनों में बदलने पर विशेष ध्यान दिया गया। पिछले सत्र में उन्होंने विभिन्न प्रारूपों में करीब 1500 रन बनाकर इस दिशा में मजबूत कदम बढ़ाया।
सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी, रणजी ट्रॉफी और दलीप ट्रॉफी जैसे अलग-अलग मंचों पर खेलने के अनुभव ने उनकी बल्लेबाजी को निखारा। हालिया बड़े मुकाबलों में उन्होंने दिखाया कि वह जरूरत पड़ने पर आक्रामक बल्लेबाजी करने के साथ पारी संभालने का धैर्य भी रखते हैं। दलीप ट्रॉफी के फाइनल में दक्षिण क्षेत्र के खिलाफ पूर्वी क्षेत्र की ओर से खेलते हुए उनकी 101 रन की पारी इसी क्षमता की मिसाल रही। बड़े मुकाबले में आए इस शतक ने राष्ट्रीय चयन की दौड़ में उनका दावा मजबूत किया। इंडिया ए में अवसर मिलने पर भी कुशाग्र ने अपनी तैयारी का प्रमाण दिया। ऑस्ट्रेलिया ए के खिलाफ उन्होंने 113 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली। भारत ए के पांच विकेट महज 97 रन पर गिर चुके थे, तब उन्होंने तनुश कोटियान के साथ मिलकर पारी को संभाला। इस मुकाबले में वह 82 रन पर रिटायर्ड हर्ट हुए, लेकिन अगले दिन लौटकर अपना शतक पूरा किया। दबाव और शारीरिक परेशानी के बीच खेली गई यह पारी उनके जुझारूपन की पहचान बनी। उनके क्रिकेट सफर में परिवार का सहयोग भी अहम रहा है। पिता शशिकांत ने शुरुआती उम्र से उनकी तैयारी में समय दिया और बल्लेबाजी की तकनीक समझाने के लिए खुद भी क्रिकेट का अध्ययन किया। वर्षों के अभ्यास और परिवार के भरोसे से तैयार हुई यह बुनियाद अब राष्ट्रीय टीम में चयन की उपलब्धि तक पहुंची है। कुशाग्र के सामने अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की नई चुनौती है। टीम में चयन के बाद अगला लक्ष्य अंतिम एकादश में जगह बनाना और अवसर मिलने पर भारत के लिए उपयोगी प्रदर्शन करना होगा। घरेलू मैदानों से इंडिया ए तक उन्होंने जिस तरह हर अगले मंच पर अपनी छाप छोड़ी है, उससे झारखंड की उम्मीदें बढ़ी हैं। राज्य के क्रिकेट प्रेमियों को अब उस पल का इंतजार है, जब कुमार कुशाग्र भारतीय जर्सी में बल्ले और दस्तानों से अपनी पहचान बनाएंगे।
