ट्रंप ने कहा- ईरान के साथ अब समझौता संभव, प्रोजेक्ट फ्रीडम ऑपरेशन रुका, ईरान के विदेशमंत्री पहुंचे चीन
Eksandeshlive Desk
वाशिंगटन/बीजिंग/पेरिस/तेहरान : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि पिछले 24 घंटों में ईरान के साथ उनकी बहुत अच्छी बातचीत हुई है। अब यह पूरी तरह संभव है कि हम कोई समझौता कर लें। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता का कहना है कि तेहरान ने अभी तक वाशिंगटन के ताजा प्रस्ताव पर कोई औपचारिक जवाब नहीं दिया है, लेकिन मध्यस्थ पाकिस्तान के जरिए कूटनीतिक संदेशों का आदान-प्रदान जारी है। इस बीच ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के लिए अमेरिकी सेना के प्रोजेक्ट फ्रीडम ऑपरेशन को रोक दिया है। उधर, ईरान के विदेशमंत्री चीन पहुंचे हैं। वहां उन्होंने इस समझौते के संबंध में बातचीत की है। खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही सामान्य करने की जोरदार अपील की है। उन्होंने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से बातचीत के बाद कहा कि सभी पक्षों को बिना किसी शर्त और देरी के इस अहम समुद्री मार्ग से नाकेबंदी हटानी चाहिए।
कोई समय सीमा तय नहीं है, लेकिन समझौता जरूर होगा : अल जजीरा, सीबीएस न्यूज और तेहरान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने बुधवार को ओवल ऑफिस में एक सवाल पर कहा कि ईरान के साथ बातचीत के लिए कोई समय सीमा तय नहीं है, लेकिन समझौता जरूर होगा। उन्होंने कहा कि अमेरिकी अधिकारियों को आमने-सामने की बातचीत के लिए ईरान भेजना अभी जल्दबाजी होगी। उन्होंने कहा कि ईरान जल्द से जल्द समझौता करना चाहता। ट्रंप ने दोहराया कि अगर अमेरिका अभी ईरान को छोड़ देता है, तो उसे दोबारा खड़ा होने में 20 साल लग जाएंगे। उनका मानना है कि ईरान पतन के कगार पर है। वह हार मानने को तैयार है। ट्रंप ने स्टॉक मार्केट के ऊपर जाने और तेल की कीमतों के नीचे आने की बात की। उन्होंने कहा कि तेल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। उन्होंने कहा कि युद्ध का जितना असर ईरान पर पड़ रहा है, उतना ही आर्थिक असर अमेरिका में भी पड़ रहा है। उधर, ईरान के शीर्ष राजनयिक ने बुधवार को बीजिंग में अपने समकक्ष वांग यी सहित चीन के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की। वांग ने चीन को ईरान का एक भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार बताया है। वांग ने अमेरिका-इजराइल की एकीकृत सैन्य कार्रवाई और युद्ध की निंदा की। चीन के विदेशमंत्री ने लड़ाई को तत्काल समाप्त करने का आह्वान किया और संघर्ष के फिर से शुरू होने के प्रति आगाह किया। उन्होंने फारस की खाड़ी के देशों से अपने भविष्य की बागडोर अपने हाथों में लेने का आग्रह किया और अच्छे संबंध बनाने के लिए ईरान तथा उसके पड़ोसियों के बीच बातचीत को प्रोत्साहित किया। बीजिंग में ईरान के विदेशमंत्री अब्बास अराघची ने ईरान-अमेरिका वार्ता में हुए नवीनतम घटनाक्रम के बारे में वांग को जानकारी दी। अराघची की चीन यात्रा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बीजिंग की यात्रा से ठीक एक सप्ताह पहले हुई है। ट्रंप 14-15 मई को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ एक उच्च-स्तरीय शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए बीजिंग जाने वाले हैं। यह ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के दौरान चीन की उनकी पहली यात्रा होगी। ईरान के विदेश मंत्री ने सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान के साथ बुधवार को फोन पर बातचीत भी की। उन्होंने क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के प्रयासों के साथ-साथ हाल के क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर चर्चा की। रियाद ने क्षेत्रीय स्थिरता को बनाए रखने के लिए बातचीत का आह्वान किया है। ईरान का कहना है कि फारस की खाड़ी में अमेरिका की मौजूदगी ही पश्चिम एशिया में अस्थिरता का मुख्य कारण है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव के बीच मैक्रों की अपील- सभी पक्ष तुरंत हटाएं नाकेबंदी : वहीं फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने अपने बयान में कहा कि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य बेहद महत्वपूर्ण है, इसलिए यहां पहले जैसी निर्बाध आवाजाही बहाल करना जरूरी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हालिया घटनाएं दिखाती हैं कि इस क्षेत्र में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बहुपक्षीय सहयोग की आवश्यकता है। फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने फ्रांस और ब्रिटेन की ओर से प्रस्तावित एक बहुराष्ट्रीय मिशन का भी जिक्र किया, जिसका उद्देश्य इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने अन्य देशों से भी इस पहल में शामिल होने पर विचार करने का आग्रह किया। मैक्रों ने कहा कि वे इस मुद्दे पर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भी चर्चा करेंगे। दूसरी ओर, ईरान के राष्ट्रपति पेजेशकियन ने बातचीत के दौरान अमेरिका के प्रति अपने देश के गहरे अविश्वास को दोहराया। ईरानी पक्ष का कहना है कि क्षेत्र में तनाव के पीछे बाहरी शक्तियों की भूमिका भी अहम है और किसी भी समाधान के लिए आपसी सम्मान और भरोसे की जरूरत होगी। उल्लेखनीय है कि हाल के महीनों में इस क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों और हमलों की घटनाओं के चलते समुद्री यातायात प्रभावित हुआ है, जिससे वैश्विक बाजारों में भी चिंता बढ़ी है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक प्रयास तेज होते नजर आ रहे हैं, ताकि इस रणनीतिक जलमार्ग में स्थायी शांति और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
