भीषण गर्मी में बूंद बूंद पानी एवं पंखे की हवा के लिए तरसते प्रखंड कर्मी एवं कार्यालय आने वाले आमजन, और पदाधिकारी हैं मौन
अजय राज
प्रतापपुर(चतरा): एक तरफ भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान को देखते हुए मुख्यमंत्री के निर्देश पर चतरा जिला प्रशासन आमजनों को राहत पहुंचाने के उद्देश्य से नगर क्षेत्र में चलित प्याऊ व्यवस्था कर लोगों को राहत पहुंचा रही है तथा ई-रिक्शा के माध्यम से शहर के प्रमुख मार्गों, चौक-चौराहों एवं सार्वजनिक स्थलों पर घूम-घूम कर लोगों को निःशुल्क शीतल पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। तो वहीं दूसरी तरफ प्रतापपुर प्रखंड क्षेत्र के चौक चौराहों पर पेयजल की व्यवस्था तो दूर की बात है खुद प्रखंड कार्यालय में हीं कर्मियों एवं अपने -अपने कार्य के सिलसिले में प्रखंड कार्यालय पहुंचने वाले आमजनों के लिए पीने का पानी के लाले पड़े हुए हैं।
सरकारी निर्देश के बाबजूद प्रखंड कार्यालय में चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी में विभिन्न पंचायतों से प्रखंड कार्यालय पहुंचने वाले आम लोगों के लिए पेयजल की कोई समुचित स्थाई तौर पर कोई व्यवस्था नहीं की गई है। जो दुर्भाग्यपूर्ण है। हालांकि आधी गर्मी निकल जाने के बाद उपायुक्त के निर्देश पर बीते सोमवार से जरूर मिट्टी के दो घड़ों में पीने का पानी रख दिया गया है परंतु यह कोई स्थाई समाधान नहीं है। प्रखंड कार्यालय में स्थायीतौर पर पीने का पानी का व्यवस्था नहीं होने के बाबत पूछे जाने पर नाम न छापने की शर्त पर कुछ कर्मियों ने बताया कि प्रखंड कार्यालय में चिल्ड वाटर मशीन अधिष्ठान तो छोड़िए, कर्मियों के लिए प्रतिदिन आने वाला पीने का पानी का 20 लीटर का जार भी कभी कभार हीं आता है वो भी जब किसी तरह की बैठक हो या कोई अधिकारी के आने की खबर हो तब। जिस वजह से इस झुलसती गर्मी में काफी परेशानी की स्थिति बनी रहती है और कर्मियों को निजी खर्च से बाहर से पानी का बोतल मंगवाकर अपनी प्यास बुझानी पड़ती है। एक तो भीषण गर्मी और उसपर कार्यालय में कर्मियों के लिए पीने का पानी की किल्लत तो बिजली की किल्लत। पंखे -कूलर भी कभी कभार हीं बिजली आने पर हिलते- डुलते हैं। वैसे कहने को तो कार्यालय में पावर बैकअप के लिए कुछ वर्ष पूर्व हीं लाखों रुपए खर्च कर सोलर सिस्टम अधिष्ठान किया गया था जो बताया जा रहा है कि कुछ मामूली तकनीकी फॉल्ट की वजह से ठप पड़ा हुआ है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस प्रखंड कार्यालय के द्वारा प्रखंड अंतर्गत आने वाले सभी 18 पंचायतों में विकास की गाथा लिखे जाने का दावा किया जाता है!! जिस प्रखंड कार्यालय के सभागार भवन में बैठक कर संबंधित कर्मियों एवं जन प्रतिनिधियों को अपने -अपने पंचायत क्षेत्र में लोगों को पेयजल आपूर्ति के लिए जलमीनार दुरूस्त करने, चापानल दुरुस्त करने का भारी भरकम निर्देश जारी किए जाते हैं।
जिस प्रखंड में पंद्रहवीं वित्त की अधिकतर राशि चिल्ड वाटर इक्यूपमेंट अधिष्ठान करने के नाम पर, जल मीनार लगाने एवं मरम्मती आदि के नाम पर करोड़ो करोड़ खर्च करने का प्रस्ताव पास कराया जाता है। जिस प्रखंड में कुछ दिन पूर्व ही पेयजल पखवाड़ा कार्यक्रम चलाया गया है।
उसी प्रखंड कार्यालय परिसर में कर्मियों एवं आमजनो की प्यास बुझाने के लिए एक अदद चिल्ड वाटर मशीन तक का अधिष्ठान नहीं किया गया है और न हीं पेयजल की कोई स्थायी व्यवस्था की गई है, यानी जो खुद प्यासा है वो क्या खाक दूसरे की प्यास बुझाएगा।
मालूम हो कि मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद जिला प्रशासन के द्वारा इससे पूर्व विभिन्न सरकारी कार्यालयों, प्रखंड कार्यालयों एवं सार्वजनिक स्थलों पर स्थायी प्याऊ की व्यवस्था सुनिश्चित करने का फरमान जारी किया जा चुका है तो फिर आखिर किस मजबूरी की वजह से इस चिलचिलाती उमस भरी गर्मी में भी प्रतापपुर प्रखंड कार्यालय परिसर में पीने का पानी का कोई स्थाई व्यवस्था नहीं की गई है?
जब प्रखंड कार्यालय के छत पर लाखों रुपए के सोलर प्लेट एवं बैट्री पावर बैकअप हेतु अधिष्ठित किया गया है तो फिर प्रखंड कर्मी गर्मी में पसीना क्यों बहा रहे हैं क्यों कार्यालय में लगे पंखे और कूलर यदा कदा बिजली आने के बाद हीं हिलते डुलते हैं। सवाल कई हैं परंतु जवाब किसी के पास नहीं है। इसी लिए यह सवाल उठना लाज़मी है कि क्या संबंधित प्रखंड के पदाधिकारी सरकारी निर्देशों का पालन करने में जान बुझ कर कोताही बरत रहे हैं? इस बारे में जब प्रखंड विकास पदाधिकारी अभिषेक कुमार पांडेय से बात करने की कोशिश की गई तो संपर्क नहीं हो सका।
