डॉ. करमा उरांव की 74वीं जयंती पर श्रद्धांजलि सभा
MRITYUNJAY PRASAD
रांची: रांची विश्वविद्यालय के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग (टीआरएल) में महान शिक्षाविद् एवं समाजसेवी डॉ. करमा उरांव की 74वीं जयंती धर्मेश उरांव मेमोरियल फाउंडेशन के तत्वावधान में श्रद्धा एवं सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर डॉ. करमा उरांव के जीवन, संघर्ष, विचारों एवं सामाजिक योगदान को याद किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की एवं बंधु तिर्की उपस्थित रहे। साथ ही रांची विश्वविद्यालय के कुलपति, विनोबा भावे विश्वविद्यालय के कुलपति, डॉ. स्मृति सिंह (विभागाध्यक्ष, रसायन विज्ञान, रांची विश्वविद्यालय), विभिन्न जनजातीय विभागों के विभागाध्यक्ष, डॉ. आरती महतो (निदेशक, आई आई ए आर) तथा फाउंडेशन की निदेशक शांति उरांव सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन, पुष्पांजलि एवं माल्यार्पण के साथ हुआ। इस अवसर पर ‘डॉ. करमा उरांव : व्यक्तित्व एवं जीवन संदेश’ पुस्तक का विमोचन भी किया गया, जिसके माध्यम से उनके जीवन दर्शन, नैतिक मूल्यों एवं सामाजिक विचारों को जनमानस तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।
अपने संबोधन में कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि डॉ. करमा उरांव के नैतिक विचारों एवं आदर्शों को केवल याद करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें अपने जीवन में उतारना आवश्यक है। उन्होंने उनके विचारों को व्यवहार में अपनाकर समाज और आने वाली पीढ़ियों को सही दिशा देने का आह्वान किया।
श्री तिर्की ने जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग (टीआरएल) के निर्माण में डॉ. करमा उरांव के महत्वपूर्ण योगदान एवं संघर्षों को विशेष रूप से याद किया। वहीं रांची विश्वविद्यालय के कुलपति ने डॉ. करमा उरांव के नाम पर फेलोशिप शुरू करने की घोषणा की। साथ ही विभाग का नाम उनके नाम पर रखने की मांग भी उठाई गई।
इस अवसर पर धर्मेश उरांव मेमोरियल फाउंडेशन की निदेशक शांति उरांव ने घोषणा की कि फाउंडेशन डॉ. करमा उरांव के विचारों को धरातल पर उतारने के उद्देश्य से झारखंड में कृषि, शिक्षा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में कार्य करेगा। इसका उद्देश्य ग्रामीण एवं जनजातीय समाज के सर्वांगीण विकास को बढ़ावा देना है। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित अतिथियों एवं शिक्षाविदों ने डॉ. करमा उरांव के आदर्शों पर चलने तथा उनके सपनों के झारखंड के निर्माण में योगदान देने का संकल्प लिया।
