Eksandeshlive Desk
रांची : शिव शिष्य हरीन्द्रानन्द फाउंडेशन, रांची के तत्वावधान में दीदी नीलम आनंद के 74वें जन्म दिवस के अवसर पर एच ई सी धुर्वा में शिव शिष्यों द्वारा पौधरोपण किया गया। शिव शिष्य हरीन्द्रानन्द फाउंडेशन की अध्यक्ष बरखा आनंद ने कहा कि वन की महत्ता से हम सभी परिचित हैं। अगर हम इतिहास के पन्नों को पलट कर देखेंगे, तो हम पायेंगे कि पूर्व में वनों का प्रतिशत ज्यादा था, जनसंख्या कम था, पशुओं की संख्या कम थी। इसलिए इसके महत्व के बारे में उतना नहीं सोचते थे, लेकिन बाद में जनसंख्या वृद्धि, औद्योगिकरण, शहरीकरण, संरचनात्मक विकास की वृद्धि के साथ-साथ वनों का विनाश होता गया, जिसके परिणाम स्वरूप कहीं भू-स्खलन, कहीं सुखा तो कही बाढ़ का सामना तो कहीं अति वृष्टि और कहीं आना वृष्टि, का सामना करना पड़ता है। पौध लगाने का हमें केवल संकल्प ही नहीं इसे कार्यान्वयन करना चाहिए।
शिष्य हरीन्द्रानन्द फाउंडेशन के मुख्य सलाहकार अर्चित आनन्द ने कहा कि हमें पौधों को लगाना चाहिए। हम सब मिलकर लगभग अब तक एक करोड़ से अधिक पौधे पूरे देश में लगा चुके हैं और निरंतर इस दिशा में हम काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अभी भारत में वनों का क्षेत्रफल 79.42 Million Hectare है, जो कि कुल भू-भाग का 24.16% है, जबकि झारखण्ड के कुल वनों का क्षेत्रफल 23605 Km2 है, जो कि कुल भू-भाग का करीब 26.61% है। सामान्य परिस्थिति में कुल भू-भाग का एक तिहाई, यानि 33.33% भू-भाग होना चाहिए, जो कि झारखण्ड में करीब 3.50% अभी भी कम है। पुनः पहाड़ी क्षेत्रों में ढलान (Slope) के अनुसार वनों का प्रतिशत 40% से 80% तक होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वृक्ष लगाने के साथ साथ वृक्षों का संरक्षण भी किया जाय ताकि प्रदूषण से लड़ा जा सके और हम स्वच्छ हवा में साँसें ले सकें। इस अवसर पर सैकड़ों की संख्या में शिव शिष्य/शिष्याएं मौजूद रहे।
