Eksandeshlive Desk
तेहरान : ईरान ने अमेरिका के साथ समझौता ज्ञापन पर शुक्रवार को हस्ताक्षर से पहले मंगलवार को स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस समझौते में इज़राइल और हिज़्बुल्लाह भी पक्ष हैं तथा लेबनान में लड़ाई रोकना इस समझौते का जरूरी हिस्सा है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़्ची ने मंगलवार को यहां विदेशी राजनयिक मिशनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक में कहा कि ईरान, लेबनान के संगठन हिज़्बुल्लाह के साथ-साथ इज़राइल को भी अमेरिका के साथ हुए समझौते का एक पक्ष मानता है। अराग़्ची ने कहा, “मैं एक ज़रूरी बात पर ज़ोर देना चाहता हूं। हमारे नज़रिए से, समझौते का एक पक्ष अमेरिका और इज़राइल है और दूसरा पक्ष ईरान और हिज़्बुल्लाह है। लेबनान में लड़ाई रोकना, अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने का एक ज़रूरी हिस्सा है।”
ईरान के शीर्ष राजनयिक ने कहा, “इस युद्ध के दौरान कब्ज़े में लिए गए इलाकों से इज़राइली सेना के हटे बिना, युद्ध को पूरी तरह खत्म नहीं माना जा सकता। लेबनान पर इज़राइल का कोई भी हमला समझौते का उल्लंघन माना जाएगा।” समझौते के अगले चरण के बारे में अराग़्ची ने कहा कि ईरान और अमेरिका परमाणु मुद्दों और प्रतिबंध हटाने पर अंतिम समझौते के लिए 19 जून को बातचीत शुरू करने की योजना बना रहे हैं। अराग़्ची ने कहा, “समझौता ज्ञापन पर आधिकारिक हस्ताक्षर जल्द ही, शायद शुक्रवार को होंगे और जगह तय की जाएगी। अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए उसी दिन ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत का एक नया दौर शुरू होगा।”
गौरतलब है कि ईरान और अमेरिका ने सोमवार को समझौता ज्ञापन को अंतिम रूप दिया। इस पर 19 जून को स्विट्ज़रलैंड में औपचारिक रूप से हस्ताक्षर किए जाएंगे। ईरान के अनुसार, इस समझौता ज्ञापन का मतलब लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य अभियानों को रोकना है। इस बीच तस्नीम समाचार एजेंसी की मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में ईरान के उप विदेश मंत्री माजिद तख्त-रवांची के हवाले से कहा गया है कि युद्ध खत्म करने के समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के समय ईरान की संसद के सभापति मोहम्मद बाग़ेर ग़ालिबाफ़ और अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस मौजूद रहेंगे। उन्होंने कहा, “अमेरिकी पक्ष से वेंस होंगे और ईरानी पक्ष से ग़ालिबाफ़ होंगे।”
