Eksandeshlive Desk
मुंबई : रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक में रेपो रेट में बदलाव नहीं किया है। आरबीआई ने इसे 5.25 फीसदी पर बरकरार रखा है। इससे होम और कार लोन महंगे नहीं होंगे तथा ईएमआई नहीं बढ़ेगी। साथ ही चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर का अनुमान घटाकर 6.6 फीसदी कर दिया है। केंद्रीय बैंक ने अप्रैल में जीडीपी की वृद्धि दर 6.9 फीसदी रहने का अनुमान जताया था। वहीं चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए खुदरा महंगाई दर के अनुमान को बढ़ाकर 5.1 फीसदी कर दिया। रिजर्व बैंक पहले इसके 4.6 फीसदी पर रहने का अनुमान जताया था।
घरेलू आर्थिक गतिविधियां काफी हद तक स्थिर बनी हुई हैं : आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को यहां चालू वित्त वर्ष की दूसरी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीति (एमपीसी) की तीन दिवसीय समीक्षा बैठक के फैसले की घोषणा करते हुए कहा कि कई उच्च-आवृत्ति संकेतकों से पता चलता है कि संकट शुरू होने के बाद से घरेलू आर्थिक गतिविधियां काफी हद तक स्थिर बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि भारत के विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के पीएमआई से पता चलता है कि दोनों क्षेत्र मजबूत बने हुए हैं एवं व्यावसायिक अपेक्षाएं अब भी सकारात्मक हैं। आरबीआई गवर्नर ने बताया कि मांग पक्ष पर निजी खपत अब तक मजबूत बनी हुई है। बढ़ती लागत के दबाव के बावजूद स्थिर निवेश ने भी अपनी गति बनाए रखी है। माल निर्यात में अप्रैल में ढुलाई और बीमा लागत के अधिक होने के बावजूद मजबूत वृद्धि दर्ज की। संजय मल्होत्रा ने कहा कि इन सभी कारकों को ध्यान में रखते हुए चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 6.6 फीसदी रहने का अनुमान है। इसमें पहली तिमाही में इसके 6.6 फीसदी, दूसरी तिमाही में 6.3 फीसदी, तीसरी तिमाही में 6.5 फीसदी और चौथी तिमाही में 6.8 फीसदी रहने का अनुमान है। मल्होत्रा ने कहा कि कुल मिलाकर आर्थिक स्थिति व्यापक रूप से मजबूत बनी हुई है। उन्होंने कहा कि आगे चलकर ऊर्जा और अन्य कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि तथा आपूर्ति व्यवधान आर्थिक गतिविधियों पर दबाव डाल सकते हैं। प्रभावित वस्तुओं में आयात विविधीकरण से आपूर्ति में सुधार हो सकता है, लेकिन इसकी लागत अधिक होगी। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि कुल प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि पश्चिम एश्यिा संकट कितने समय तक चलता है, आपूर्ति श्रृंखलाओं के सामान्य होने में कितना समय लगता है और विभिन्न हितधारकों के बीच भार का बंटवारा कैसे होता है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि कमजोर वैश्विक मांग और ऊंची लॉजिस्टिक लागत वस्तु निर्यात के लिए चुनौती हैं, जबकि सेवा निर्यात अपनी गति बनाए रखेगा, क्योंकि भारतीय सेवाओं की मांग मजबूत बनी हुई है। सेवा निर्यात भी बेहतर बना हुआ है, जो कृत्रिम मेधा (एआई) को लेकर चिंताओं के बावजूद निरंतर मांग को दर्शाता है।
चालू वित्त वर्ष के लिए खुदरा महंगाई दर अनुमान 5.1 फीसदी : आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को यहां चालू वित्त वर्ष की दूसरी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीति (एमपीसी) की तीन दिवसीय समीक्षा बैठक के फैसले की घोषणा करते हुए कहा कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान, जिंस कीमतों में झटके, मानसून को लेकर जारी अनिश्चितता और अल नीनो जैसी परिस्थितियों के कारण महंगाई दर बढ़ने का जोखिम बना हुआ है। संजय मल्होत्रा ने जून मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए कहा कि इसका मुख्य कारण ईंधन की बढ़ती कीमतों से कच्चे माल की लागत में बढ़ोतरी है। पेट्रोल की खुदरा कीमतों में मई से अब तक कुल 7.4 फीसदी और डीजल में 8.4 फीसदी की वृद्धि हुई है। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि खाद्य महंगाई में कुछ बढ़ोतरी हुई, जबकि मार्च और अप्रैल में पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रहने से ईंधन की महंगाई दर नियंत्रित रही। उन्होंने बताया कि फरवरी में 3.2 फीसदी से थोड़ा बढ़ने के बावजूद मार्च और अप्रैल में कुल खुदरा महंगाई दर लक्ष्य से नीचे (क्रमशः 3.4 फीसदी और 3.5 फीसदी) रही। मुख्य महंगाई मार्च-अप्रैल के दौरान 3.7 फीसदी पर स्थिर रही। वहीं, कीमती धातुओं को छोड़कर मुख्य महंगाई इसी अवधि में और कम होकर 2.1-2.2 फीसदी रही। मल्होत्रा ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें (भारत पर भार) अप्रैल-मई, 2026 के दौरान औसतन लगभग 110 डॉलर प्रति बैरल रही हैं। ऐसे संकेत हैं कि वित्त वर्ष 2026-27 में औसत कीमतें पिछली अनुमानित स्तर से काफी अधिक रहेंगी। उन्होंने कहा कि ऊर्जा की ऊंची कीमतों और कई कच्चे माल की लागत में बढ़ोतरी के कारण अप्रैल, 2026 में थोक महंगाई दर (डब्ल्यूपीआई) में तेज उछाल देखा गया। तिमाही आधार पर खुदरा महंगाई दर का अनुमान पहली तिमाही में 4.2 फीसदी, दूसरी में 5.1 फीसदी, तीसरी में 5.9 फीसदी और चौथी में 5.4 फीसदी लगाया गया है। साथ ही वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कुल महंगाई 4.7 फीसदी रहने का अनुमान है। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि दक्षिण-पश्चिम मानसून के सामान्य से कम रहने के अनुमान और अल नीनो के कारण खाद्य परिदृश्य अनिश्चित बना हुआ है। उन्होंने कहा कि महंगाई बढ़ने के जोखिम बढ़े हैं, लेकिन मौद्रिक नीति समिति ने समीक्षा बैठक में अधिक स्पष्टता आने तक इंतजार करना उचित समझा है।
