Eksandeshlive Desk
आइची-नागोया: भारत के अमन सहरावत ने एशियाई खेल 2026 में पुरुषों के 57 किग्रा फ्रीस्टाइल कुश्ती वर्ग में उत्तर कोरिया के मौजूदा विश्व चैंपियन हान चोंग सोंग को 11-7 से हराकर स्वर्ण पदक जीत लिया। यह एशियाई खेलों में 57 किग्रा फ्रीस्टाइल वर्ग में भारत का पहला स्वर्ण पदक है। विश्व रैंकिंग में 32वें स्थान पर मौजूद अमन ने फाइनल में शीर्ष वरीयता प्राप्त और 2025 विश्व चैंपियन हान चोंग सोंग को अंकों के आधार पर 11-7 से हराया। मुकाबला शुरुआत में बेहद करीबी रहा और दोनों पहलवान शुरुआती दौर में बराबरी पर रहे। अमन ने सबसे पहले अंक हासिल कर बढ़त बनाई। चोट के कारण मुकाबला कुछ देर रुकने के बाद अमन ने तेजी से बढ़त बनाई और देखते ही देखते 6-1 से आगे हो गए। हालांकि, एक और चोट के कारण खेल रुकने के बाद उत्तर कोरियाई पहलवान ने जोरदार वापसी की। उसने अमन को लगातार पटखनी देकर बढ़त हासिल कर ली।मुकाबला निर्णायक दौर में पहुंच चुका था लेकिन आखिरी मिनट से भी कम समय रहते अमन ने शानदार दांव लगाकर हान चोंग सोंग को पलटा और अहम अंक हासिल किए। इसके बाद भारतीय पहलवान ने अपनी बढ़त बनाए रखते हुए 11-7 से मुकाबला अपने नाम कर लिया।
कम उम्र में माता-पिता को खोया, कुश्ती ने दी नई दिशा: अमन सहरावत का यह एशियाई खेलों में दूसरा पदक है। उन्होंने 2022 में हांगझोउ में हुए एशियाई खेलों में इसी वर्ग में कांस्य पदक जीता था। हान चोंग सोंग ने भी हांगझोउ एशियाई खेलों में रजत पदक हासिल किया था। इस स्वर्ण के साथ अमन ने एशियाई खेलों में 57 किग्रा फ्रीस्टाइल में भारत के लिए पहली बार स्वर्ण पदक हासिल किया। यह इन खेलों में फ्रीस्टाइल कुश्ती में भारत का दूसरा पदक है। इससे पहले सुजीत कालकल ने स्वर्ण पदक जीता था। भारत के लिए यह एशियाई खेल 2026 का कुल चौथा कुश्ती पदक है। अमन सहरावत ने बेहद कठिन व्यक्तिगत परिस्थितियों से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। उन्होंने 11 साल की उम्र तक अपने माता और पिता दोनों को खो दिया था। इसके बाद कुश्ती उनके जीवन में लक्ष्य और सहारे का माध्यम बनी। ओलंपिक पदक विजेता सुशील कुमार से प्रेरित होकर वह 10 साल की उम्र में दिल्ली के प्रसिद्ध छत्रसाल स्टेडियम में प्रशिक्षण लेने पहुंचे, जहां कोच ललित कुमार के मार्गदर्शन में उन्होंने अपनी आक्रामक कुश्ती शैली को विकसित किया। 2022 में अमन ने स्पेन में अंडर-23 विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा। वह इस प्रतियोगिता में स्वर्ण जीतने वाले पहले भारतीय पहलवान बने। इसके बाद 2023 एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप में कजाखस्तान में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने वरिष्ठ स्तर पर भी अपनी मजबूत पहचान बनाई। अमन का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय पड़ाव 2024 पेरिस ओलंपिक रहा। भारत के एकमात्र पुरुष पहलवान के रूप में उतरे अमन ने 57 किग्रा वर्ग में प्यूर्टो रिको के डेरियन क्रूज को हराकर कांस्य पदक जीता। उस समय 21 साल और 24 दिन की उम्र में वह व्यक्तिगत ओलंपिक पदक जीतने वाले सबसे कम उम्र के भारतीय खिलाड़ी बने थे। अब एशियाई खेल 2026 में विश्व चैंपियन को हराकर अमन ने अपने पदकों के संग्रह में एक ऐतिहासिक स्वर्ण भी जोड़ लिया है।
भारतीय पहलवान दीपक पूनिया ने 97 किग्रा वर्ग में जीता कांस्य: भारत के अनुभवी पहलवान दीपक पूनिया ने शनिवार को एशियाई खेल 2026 में पुरुषों के 97 किग्रा फ्रीस्टाइल वर्ग में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया। दीपक ने कांस्य पदक मुकाबले में मंगोलिया के गंखुयाग गनबातर को 2-1 से हराया। इस जीत के साथ उन्होंने इस भार वर्ग में एशियाई खेलों में भारत को 60 साल बाद पदक दिलाया। दीपक ने मुकाबले के शुरुआती दौर में दो अंक हासिल कर बढ़त बनाई। दूसरे दौर में मंगोलियाई पहलवान ने एक अंक हासिल कर वापसी की कोशिश की, लेकिन दीपक ने आखिरी क्षणों में शानदार रक्षात्मक कुश्ती का प्रदर्शन करते हुए अपनी बढ़त कायम रखी और 2-1 से मुकाबला अपने नाम कर लिया। मुकाबले के अंतिम दौर में दोनों पहलवान लंबे समय तक बराबरी की स्थिति में रहे। रेफरी ने दोनों की निष्क्रियता को लेकर चेतावनी दी और दीपक को एक पैसिविटी अंक गंवाना पड़ा। इसके बाद गंखुयाग ने कुछ आक्रामक प्रयास किए लेकिन दीपक ने खुद को बचाए रखा और आखिरी 30 सेकंड में अपनी बढ़त को कायम रखते हुए कांस्य पदक पक्का कर लिया।
60 साल बाद 97 किग्रा में भारत का पदक: दीपक का कांस्य पदक इस भार वर्ग में एशियाई खेलों में भारत का 60 साल बाद पदक है। इससे पहले भारत ने 97 किग्रा फ्रीस्टाइल में 1962 और 1966 के एशियाई खेलों में पदक जीते थे। भारत के लिए इस वर्ग में अब तक पांच पदक हो चुके हैं। 1962 में मारुति माने ने स्वर्ण और गणपत आंदलकर ने रजत पदक जीता था। 1966 में विश्वनाथ सिंह ने रजत और भीम सिंह ने कांस्य पदक हासिल किया था। दीपक के कांस्य के साथ भारत ने इस भार वर्ग में अपना पांचवां एशियाई खेल पदक जीता। दीपक पूनिया का यह एशियाई खेलों में लगातार दूसरा पदक है। हांगझोउ एशियाई खेलों में उन्होंने 86 किग्रा फ्रीस्टाइल वर्ग में रजत पदक जीता था। इस बार उन्होंने 97 किग्रा वर्ग में उतरकर कांस्य पदक अपने नाम किया। गंखुयाग गनबातर ने हांगझोउ एशियाई खेलों में 97 किग्रा वर्ग में कांस्य पदक जीता था। इस बार वह दीपक के खिलाफ कांस्य पदक मुकाबले में हार गए। 19 मई 1999 को हरियाणा के झज्जर में जन्मे दीपक पूनिया ने महज पांच साल की उम्र में छारा गांव के मिट्टी के अखाड़े से कुश्ती शुरू की। पूर्व पहलवान वीरेंद्र सिंह ने उन्हें शुरुआती प्रशिक्षण दिया। उनके पिता सुभाष पूनिया भी पूर्व पहलवान और डेयरी किसान रहे हैं। कुश्ती से जुड़े परिवार में पले-बढ़े दीपक ने स्थानीय दंगलों में हिस्सा लेकर अपनी तकनीक को निखारा और परिवार की मदद में भी योगदान दिया। स्कूल स्तर की राष्ट्रीय प्रतियोगिता में उनकी प्रतिभा पहचाने जाने के बाद उन्हें दिल्ली के प्रतिष्ठित छत्रसाल स्टेडियम में प्रशिक्षण का अवसर मिला। पारंपरिक मिट्टी के अखाड़े से अंतरराष्ट्रीय मैट तक का सफर आसान नहीं था लेकिन दीपक ने अपनी मेहनत और अनुकूलन क्षमता के दम पर खुद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित किया। 2021 टोक्यो ओलंपिक में दीपक पदक से चूक गए और पांचवें स्थान पर रहे। अमेरिका के पहलवान के खिलाफ हार ने उन्हें निराश किया लेकिन उन्होंने इसके बाद वापसी की। हांगझोउ एशियाई खेलों में उन्होंने 86 किग्रा वर्ग के फाइनल तक पहुंचकर रजत पदक जीता। दीपक ने 2022 राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक भी जीता है। इसके अलावा वह 2021, 2022 और 2025 की वरिष्ठ एशियाई चैंपियनशिप में रजत पदक तथा 2019 और 2020 की वरिष्ठ एशियाई चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीत चुके हैं। 2019 विश्व चैंपियनशिप में भी उन्होंने रजत पदक हासिल किया था। दीपक फिलहाल दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में प्रशिक्षण लेते हैं। 97 किग्रा वर्ग में ऐतिहासिक कांस्य के साथ उन्होंने एशियाई खेलों में लगातार दूसरी बार पदक जीतने की उपलब्धि भी हासिल की।
