केन्द्र सरकार के बजट में निराशा ही निराशा: डॉ0 सहदेव राम

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KAMESH THAKUR

रांची: केन्द्रीय कर्मचारी एवं अधिकारी परिसंघ बिहार -झारखण्ड के अध्यक्ष डॉ0 सहदेव राम ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा पारित 2025-2026 में केन्द्र सरकार की 50 लाख कर्मचारी तथा 65 लाख पेंशनभोगियों में निराशा और उदासीनता व्याप्त हो गया है, क्योंकि केन्द्र सरकार ने अपने बजट में केन्द्रीय कर्मचारियों एवं पेंशनधारियों के 18 महिने के बकाये महगाई भत्ते को भुगतान करने का प्रावधान नहीं रखा। वहीं 7वें वेतन आयोग के अनुशंसा के अनुसार 50 प्रतिशत से अधिक महंगाई भत्ते होने पर मूलभूत में शामिल करना जिसका प्रावधान इस बजट में नहीं रखा। सरकारी कर्मचारियों के लिए आवास ऋण के ब्याज दर में कोई कटौती नहीं की, जबकि वाहन ऋण ब्याज की दर को ज्यो का त्यों रखा गया।
जस्टिस एचएन नागा टी0 मोहन दास की रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में केन्द्र सरकार, सार्वजनिक क्षेत्रों के उपक्रमों और राज्य सरकारों में 60 लाख से अधिक रिक्तियां है। सिर्फ केन्द्र सरकार के संस्थानों में लगभग 30.75 लाख पद खाली हैं, जबकि अकेले कनार्टका में 3.3 लाख पद खाली है, जिसके कारण एस0सी0/एस0टी0 आरक्षण में वृद्धि हुई है। अगर पदों की भर्त्ती होती है तो एस0सी0/एस0टी0 को 15 लाख नौकरियों मिलेगी, जबकि वर्तमान में देश में बेरोजगारी का प्रतिशत 8.18 प्रतिशत है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 34 लाख लोगों में से करीब 30 लाख बेरोजगारों ने रोजगार की तलाश बंद कर दी है। सरकार ने देश में बढ़ती बेरोजगारी और रिक्त पदों में बहाली हेतु बजट में कोई प्रावधान नहीं रखा।
असमानता रिपोर्ट 2024 में कहा गया है कि 100 साल में पहली बार देश की 40 प्रतिशत सम्पत्ति, 22 प्रतिशत आय मात्र 01 प्रतिशत अमिरों के पास है। इस बजट में किसानों की कर्ज की माफी नहीं की गई है, जबकि 16 लाख करोड़ पूँजीपतियों की कर्ज माफी हो चुकी है। इससे देश में असमानता को बढ़ा दिया है।
वहीं सांसदों और विधायकों के वेतन, भत्ता, पेंशन आदि में पेंशन अधिनियम 1954 के अनुसार अप्रैल 2023 से वेतन 03 गुणा तो भत्ते 02 गुणे किये गये हैं। सांसद का वेतन प्रतिमाह एक लाख रूपये, निर्वाचन भत्ता सत्तर हजार रूपये, कार्यालय खर्च भर्त्ता साठ हजार रूपये, दैनिक भत्ता दो हजार रूपये प्रति माह के अलावे स्टेशनरी भत्ता, हवाई यात्रा, रेल यात्रा, टेलीफोन भत्ता, दिल्ली में निवास, ब्राण्ड बेण्ड भत्ता, बिजली, सी0जी0एच0एस0 के आधार पर मुफ्त चिकित्सा की सुविधा मिलने के बावजूद भी आयकर अधिनियम की धारा 13ए/1961 के तहत यदि दिखाया गया है कि विधायकों और सांसदों का वेतन आय का स्त्रोत वेतन से अलग स्त्रोतों में गिना जाता है। इसी कारण से इन्हें आयकर का भुगतान भी करने में छुट है। जबकि 543 सांसदों में से 93 प्रतिशत सांसद करोड़पति हैं, जिसमें भाजपा के ही 42 प्रतिशत सांसद के पास 10 करोड़ से अधिक की संपत्ति है। आखिर करोड़पति बनने का कारण क्या है? सरकार को पर्दाफाश करना चाहिए। यही कारण है कि आज देश भ्रष्टाचार, असंतोष, पदलिप्सा, महंगाई और संगठन जैसी बुराईयों से कराह रहा है, इसके बावजूद भी देश का ढ़ांचा इसलिए चल रहा है कि देश की मजबूर जनता खामोश है।
उपरोक्त रिर्पोटों/आलेखों से स्पष्ट है कि भारत गणतंत्र देश जरूर है, लेकिन इसके पीछे गण का कम और तंत्र ज्यादा ताकतवर है। डीन थाम्पसन कार्यवाहक विदेश मंत्री दक्षीण और मध्य एशिया ने कहा है कि “भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जहां कानुन का शासन बहुत मजबूत है, लेकिन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध सहित भारत सरकार के कुछ कार्यों ने चिन्तायें पैदा की है जो देश की लोकतांत्रित मूल्यों के साथ असंगत है। केन्द्र सरकार ने जनता की समस्याऐं देश में महंगाई और बेरोजगारी को बिना ध्यान रखे बजट का प्रावधान रखी है, जिसमें देश की जनता को निराशा ही निराशा का खामियाजा भुगतना पड़ेगा।

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