कुड़मी समाज सभी वर्गों को साथ लेकर चलने का सामर्थ्य रखता है : सुदेश महतो

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Ranchi / Puruliya । कुड़मी समाज की सामाजिक एकता, सांस्कृतिक चेतना और सामूहिक भागीदारी का संदेश रविवार को पुरुलिया के कोड़ाडीह मैदान से गूंजा। अवसर था कुड़मी समाज के ऐतिहासिक ‘करम परबतीया महा जड़ूआही’ का, जिसमें पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओडिशा के विभिन्न क्षेत्रों से लाखों की संख्या में लोग शामिल हुए। विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए झारखंड के पूर्व उप मुख्यमंत्री एवं आजसू पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष सुदेश कुमार महतो ने समाज को शिक्षा, आर्थिक विकास, सामाजिक चिंतन और राजनीतिक भागीदारी के क्षेत्र में आगे बढ़ने का आह्वान किया। महाजुटान को संबोधित करते हुए सुदेश कुमार महतो ने कहा कि समाज की एकता ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है। हमें एक साथ चलना है, अपना सामाजिक दायरा बढ़ाना है और शिक्षा, आर्थिक विकास, सामाजिक चिंतन तथा राजनीतिक भागीदारी के क्षेत्र में अपनी सक्रियता बढ़ानी है। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की मजबूती केवल उसकी संख्या से नहीं, बल्कि शिक्षा, संगठन, सामाजिक चेतना और सामूहिक सोच से तय होती है। समाज के सामने मौजूद चुनौतियों का सामना संगठित होकर ही किया जा सकता है। उन्होंने सामाजिक दायरे को सीमित रखने के बजाय सभी वर्गों के साथ संवाद, सहयोग और भाईचारे को मजबूत करने पर जोर दिया।सुदेश महतो ने कहा कि कुड़मी समाज का इतिहास गौरवशाली रहा है। समाज की अपनी भाषा, संस्कृति, परंपरा और जीवन-पद्धति रही है। प्रकृति के साथ समाज का गहरा संबंध रहा है और मेहनत इसकी पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। करम पर्व केवल धार्मिक अथवा सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि प्रकृति, परंपरा, सामाजिक एकजुटता और आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का अवसर भी है।उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में अपनी सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखते हुए शिक्षा और आर्थिक प्रगति के रास्ते पर आगे बढ़ना जरूरी है। नई पीढ़ी को अपनी भाषा, संस्कृति और परंपरा से जोड़ने के साथ-साथ आधुनिक शिक्षा, रोजगार और नेतृत्व के अवसर उपलब्ध कराने पर समाज को विशेष ध्यान देना होगा।सामाजिक समरसता पर जोर देते हुए श्री महतो ने कहा कि एसटी, एससी, ओबीसी और अन्य सभी समुदायों के साथ सम्मान, सहयोग और भाईचारे की भावना को मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि समाज की प्रगति किसी एक वर्ग की प्रगति से संभव नहीं है। सभी वर्गों को साथ लेकर चलने और साझा विकास की सोच के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है। कुड़मी समाज में यह सामर्थ्य है कि वह सभी वर्गों को साथ लेकर सामाजिक एकता और विकास की दिशा में आगे बढ़ सकता है। उन्होंने समाज की पहचान और अधिकारों से जुड़े सवालों का भी उल्लेख किया। श्री महतो ने कहा कि समाज की पहचान, भाषा और अधिकार से जुड़े विषयों को केंद्र सरकार के समक्ष भी रखा गया है। इन सवालों का समाधान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अपनी पहचान और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने के साथ समाज को शिक्षा, रोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में भी मजबूत होना होगा।सुदेश महतो ने विशेष रूप से युवाओं की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि आने वाला समय युवाओं का है। युवाओं को केवल रोजगार की तलाश तक सीमित न रहकर सामाजिक जिम्मेदारियों और नेतृत्व की भूमिका में भी आगे आना होगा। शिक्षा, रोजगार, सामाजिक जागरूकता और संगठन के माध्यम से युवाओं को समाज के निर्माण में सक्रिय भागीदार बनाना समय की आवश्यकता है।

श्री महतो ने मानभूम और जंगलमहल क्षेत्र के सामाजिक एवं सांस्कृतिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओडिशा के लोगों के बीच लंबे समय से ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रिश्ते रहे हैं। इन रिश्तों को और मजबूत करते हुए तीनों राज्यों के लोगों के बीच सामाजिक संवाद और सहयोग की भावना को आगे बढ़ाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि इस तरह के विशाल सामाजिक जुटान यह दर्शाते हैं कि लोग अपनी सामाजिक पहचान, सांस्कृतिक विरासत और विकास से जुड़े विषयों को लेकर जागरूक हैं। उन्होंने उपस्थित लोगों से आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर एकता, संगठन और सामाजिक जिम्मेदारी को मजबूत करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री श्री शुभेंदु अधिकारी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इसके अलावा विभिन्न क्षेत्रों से आए जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता, युवा, महिलाएं और समाज के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। महाजुटान में पारंपरिक सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ समाज की एकजुटता और सांस्कृतिक गौरव की झलक देखने को मिली।

आयोजकों ने कहा कि कोड़ाडीह मैदान में हुआ यह महाजुटान सामाजिक एकता, सांस्कृतिक चेतना और सामूहिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण संदेश लेकर आया है। कार्यक्रम में तीन राज्यों से पहुंचे लोगों की व्यापक भागीदारी ने सामाजिक संबंधों और सांस्कृतिक जुड़ाव को और मजबूत करने का संकल्प दोहराया।

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