स्टील उद्योग के विस्तार के साथ भारत वैश्विक फेरो-अलॉय हब बनने की ओर

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आईएफएपीए 300-मिलियन-टन स्टील उत्पादन क्षमता के लक्ष्य के बीच उद्योग ने कच्चे माल की सुरक्षा और प्रतिस्पर्धी इनपुट लागत की मांग उठाई, गोवा में आयोजित 6वें इंटरनेशनल फेरो अलॉयज कॉन्फ्रेंस में उद्योग जगत के दिग्गजों ने फेरो-अलॉय क्षेत्र के बढ़ते महत्व पर चर्चा की

Eksandeshlive Desk

गोवा: भारत का तेजी से विस्तार करता स्टील उद्योग domestic फेरो-अलॉय क्षेत्र के लिए विकास के नए द्वार खोल रहा है। इंडियन फेरो अलॉय प्रोड्यूसर्स’ एसोसिएशन (IFAPA) ने गोवा में आयोजित 6वें इंटरनेशनल फेरो अलॉयज कॉन्फ्रेंस (IFAC 2026) के दौरान कहा कि भारत के पास वैश्विक फेरो-अलॉय बाजार में अपनी स्थिति को और अधिक मजबूत करने का सुनहरा अवसर है। इस सम्मेलन का आयोजन “इंडिया की स्टील वृद्धि को गति देना: फेरो अलॉय का बढ़ता महत्व” थीम के तहत किया जा रहा है। स्टील उत्पादन और मांग में रिकॉर्ड वृद्धिसम्मेलन में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, कैलेंडर वर्ष 2025 में भारत का कच्चा स्टील उत्पादन 10% से अधिक की वार्षिक वृद्धि के साथ लगभग 165 मिलियन टन तक पहुंच गया है। वहीं, स्टील की मांग लगभग 7% की वार्षिक दर से बढ़ रही है। वित्त वर्ष 2031 तक भारत का लक्ष्य अपनी स्टील निर्माण क्षमता को 300 मिलियन टन तक पहुंचाना है। इसके अलावा, भारत में प्रति व्यक्ति स्टील की खपत वर्ष 1991 के 24 किलोग्राम से बढ़कर 2025 में लगभग 109 किलोग्राम हो गई है। खपत के इस 100-किलोग्राम के पड़ाव को पार करने के बाद अब फेरो-अलॉय (मैंगनीज, क्रोमियम, सिलिकॉन आदि) की मांग में अभूतपूर्व विस्तार की संभावना है।
कच्चे माल की स्वदेशी सुरक्षा और नीतिगत सुधार आवश्यक: आईएफएपीए के चेयरमैन मनीष सरडा ने उद्योग की प्राथमिकताओं पर जोर देते हुए कहा:“वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन को मजबूती देने के लिए भारतीय फेरो-अलॉय उत्पादकों को कच्चे माल के स्वदेशी स्रोतों को सुरक्षित करना होगा। हमें घरेलू मैंगनीज और क्रोम खनिजों के विकास में तेजी लानी होगी। वर्तमान में कई नीलाम खदाने आर्थिक रूप से अनुकूल न होने के कारण बंद पड़ी हैं। नीलामी की रूपरेखा केवल सबसे ऊंची बोली के बजाय वास्तविक खदान विकास और उत्पादन को प्रोत्साहित करने वाली होनी चाहिए।” आईएफएपीए ने सरकार से मांग की है कि जिन आवश्यक कच्चे माल के पर्याप्त घरेलू ग्रेड उपलब्ध नहीं हैं, उनके आयात पर शून्य शुल्क लागू किया जाए। साथ ही, ऊर्जा-गहन फेरो-अलॉय उत्पादकों के लिए प्रतिस्पर्धी बिजली दरों और शुल्कों के युक्तिकरण की अपील की गई है। उत्पादन आंकड़े और निर्यात में बढ़तबिगमिंट (BigMint) के आंकड़ों के मुताबिक सिलिको-मैंगनीज उत्पादन: वित्त वर्ष 2020 के 1.9 मिलियन टन से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 में लगभग 3.5 मिलियन टन पहुंचा। फेरो-मैंगनीज उत्पादन: लगभग 0.9 मिलियन टन से बढ़कर 1.7 मिलियन टन हुआ। वैश्विक स्थिति: 2025 में भारत मैंगनीज अलॉय का दुनिया का अग्रणी निर्यातक रहा। हालांकि, कच्चे माल पर निर्भरता चुनौती बनी हुई है। 2026 की पहली छमाही में मैंगनीज अयस्क का आयात 27% बढ़कर 4.03 मिलियन टन पहुंच गया।

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